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बचपन की 5 आदतें बढ़ा सकती हैं डायबिटीज का खतरा! आज से बच्चों की दिनचर्या में करें ये बदलाव.

बचपन की 5 आदतें बढ़ा सकती हैं डायबिटीज का खतरा! आज से बच्चों की दिनचर्या में करें ये बदलाव.

नई दिल्ली: बच्चों में मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज की समस्या अब स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन रही है। पहले टाइप-2 डायबिटीज को मुख्य रूप से वयस्कों से जुड़ी बीमारी माना जाता था, लेकिन खानपान में बदलाव, शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ते मोटापे के कारण बच्चों और किशोरों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में बचपन से ही सही खानपान और स्वस्थ दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी है।

बच्चों की सेहत पर असर डालने वाले प्रमुख कारकों में ज्यादा मीठे पेय पदार्थों का सेवन, बार-बार पैकेटबंद स्नैक्स खाना, शारीरिक गतिविधियों की कमी और पर्याप्त नींद न लेना शामिल हैं। इन आदतों में सुधार करने से स्वस्थ वजन बनाए रखने और भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

बच्चों में क्यों बढ़ रही है टाइप-2 डायबिटीज की चिंता?

टाइप-2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल नहीं कर पाता या पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता। इससे खून में ग्लूकोज यानी ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने लगता है। बच्चों में अधिक वजन, परिवार में डायबिटीज का इतिहास, कम शारीरिक गतिविधि और खानपान से जुड़ी आदतें इस बीमारी के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं।

हालांकि, केवल किसी एक खाद्य पदार्थ को खाने या एक आदत के कारण डायबिटीज होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। बीमारी का जोखिम कई कारकों पर निर्भर करता है।

1. सुबह का नाश्ता छोड़ने की आदत बदलें

बच्चों के लिए सुबह का संतुलित नाश्ता दिन की शुरुआत करने का अच्छा तरीका है। नाश्ते में प्रोटीन, फाइबर और दूसरे जरूरी पोषक तत्व शामिल करने से ऊर्जा और पेट भरा रहने में मदद मिल सकती है।

नाश्ते में इन विकल्पों को शामिल किया जा सकता है:

  • दलिया या ओट्स
  • रागी, बाजरा या दूसरे साबुत अनाज से बने व्यंजन
  • मूंगफली या बिना ज्यादा चीनी वाला पौष्टिक मिश्रण
  • अंडा, दही या दूध जैसे प्रोटीन के स्रोत
  • मौसमी फल

नाश्ता छोड़ने से हर बच्चे को डायबिटीज होगी, ऐसा नहीं है। लेकिन नियमित और संतुलित भोजन बच्चों की सेहत और दिनभर की गतिविधियों के लिए उपयोगी है।

2. मीठे पेय पदार्थों की जगह पानी को दें प्राथमिकता

कोला, मीठे पैकेटबंद जूस और अन्य शुगर वाले पेय पदार्थों में काफी मात्रा में अतिरिक्त चीनी हो सकती है। इनका बार-बार सेवन अतिरिक्त कैलोरी बढ़ा सकता है और वजन बढ़ने के जोखिम में योगदान दे सकता है।

बच्चों को बचपन से पानी पीने की आदत डालना फायदेमंद है। घर और स्कूल में साफ पीने का पानी आसानी से उपलब्ध होना चाहिए। मीठे पेय पदार्थों को रोजमर्रा की आदत बनाने के बजाय सीमित रखना बेहतर है।

3. फल, सब्जियां और मोटे अनाज खिलाएं

रागी, बाजरा, ज्वार और साबुत अनाज फाइबर के अच्छे स्रोत हो सकते हैं। इनके साथ दालें, हरी सब्जियां और साबुत फल बच्चों के आहार को संतुलित बनाने में मदद करते हैं।

बच्चों की थाली में अलग-अलग रंगों के फल और सब्जियां शामिल करने की कोशिश करें। साबुत फल को जूस की तुलना में प्राथमिकता देना बेहतर है, क्योंकि साबुत फल में फाइबर मिलता है।

ध्यान रखें कि कोई एक अनाज या फल डायबिटीज से पूरी तरह बचाव की गारंटी नहीं देता। नियमित रूप से विविध और संतुलित भोजन करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

4. रोज खेलकूद और शारीरिक गतिविधि के लिए समय निकालें

लंबे समय तक बैठकर मोबाइल चलाना, गेम खेलना या टीवी देखना बच्चों की सक्रियता कम कर सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि स्वस्थ वजन बनाए रखने, मांसपेशियों और हड्डियों के विकास तथा शरीर की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता के लिए फायदेमंद है।

बच्चों को रोज खेलने, साइकिल चलाने, दौड़ने, नृत्य करने या अपनी पसंद की शारीरिक गतिविधि में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करें। स्कूलों में भी खेलकूद के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 5 से 17 वर्ष की उम्र के बच्चों और किशोरों को पूरे सप्ताह में औसतन प्रतिदिन कम से कम 60 मिनट मध्यम से तेज शारीरिक गतिविधि करने का लक्ष्य रखना चाहिए। शुरुआत बच्चे की क्षमता के अनुसार की जा सकती है।

5. बच्चों की नींद पूरी कराएं

नींद की कमी बच्चों की ऊर्जा, एकाग्रता, भूख और वजन को प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक अपर्याप्त नींद रहने पर मेटाबॉलिज्म और ब्लड शुगर नियंत्रण से जुड़े जोखिम भी प्रभावित हो सकते हैं।

बच्चों के लिए उम्र के अनुसार पर्याप्त नींद जरूरी है। सामान्य तौर पर 6 से 12 वर्ष के बच्चों को प्रतिदिन 9 से 12 घंटे और 13 से 18 वर्ष के किशोरों को 8 से 10 घंटे सोने की सलाह दी जाती है।

बेहतर नींद के लिए सोने और जागने का समय नियमित रखें, रात में मोबाइल और दूसरे स्क्रीन उपकरणों का इस्तेमाल सीमित करें और सोने से पहले शांत माहौल बनाएं।

स्कूल और परिवार मिलकर कैसे सुधार सकते हैं बच्चों की आदतें?

बच्चों की खानपान और दिनचर्या से जुड़ी आदतें विकसित करने में परिवार और स्कूल दोनों की भूमिका होती है। अभिभावक घर में संतुलित भोजन उपलब्ध करा सकते हैं, बच्चों के साथ खेल सकते हैं और मीठे पेय पदार्थों की जगह पानी को प्राथमिकता दे सकते हैं।

स्कूलों में पौष्टिक भोजन, साफ पानी, नियमित खेलकूद और पोषण संबंधी शिक्षा को बढ़ावा देना उपयोगी हो सकता है। बच्चों को भोजन के पैकेट पर पोषण संबंधी जानकारी पढ़ना सिखाने से उन्हें बेहतर विकल्प चुनने में भी मदद मिल सकती है।

क्या इन आदतों से डायबिटीज पूरी तरह रोकी जा सकती है?

स्वस्थ आदतें अपनाने से बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है, लेकिन इससे बीमारी का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं होता। आनुवंशिकता, परिवार में बीमारी का इतिहास और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारक भी भूमिका निभाते हैं।

यदि बच्चे का वजन तेजी से बढ़ रहा है, गर्दन या बगल की त्वचा असामान्य रूप से गहरी हो रही है, बहुत ज्यादा प्यास लगती है या बार-बार पेशाब आता है, तो डॉक्टर से सलाह लें। इन लक्षणों के कई कारण हो सकते हैं, इसलिए जांच के बिना डायबिटीज का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

निष्कर्ष: बच्चों को संतुलित नाश्ता देना, मीठे पेय पदार्थ सीमित करना, फल-सब्जियां खिलाना, रोज खेलने के लिए प्रोत्साहित करना और पर्याप्त नींद सुनिश्चित करना उनकी सेहत के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं। इन आदतों को बचपन से अपनाने पर लंबे समय तक स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है, व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह नहीं। बच्चे में डायबिटीज के जोखिम या लक्षणों को लेकर चिंता हो तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।

contact.satyareport@gmail.com

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