
नई दिल्ली: ट्रेन में सफर करते समय मोबाइल के स्पीकर पर तेज आवाज में गाने बजाना, ऊंची आवाज में बात करना या रात के समय दूसरे यात्रियों की नींद में खलल डालना परेशानी का कारण बन सकता है। इसी समस्या को देखते हुए दक्षिण रेलवे ने ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर शोर-शराबे को रोकने के लिए यात्रियों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। यात्रियों से ईयरफोन इस्तेमाल करने और दूसरों की सुविधा का ध्यान रखने की अपील की गई है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि मोबाइल के स्पीकर पर गाना बजाने मात्र से हर स्थिति में अपने आप जुर्माना या जेल नहीं होती। कानूनी कार्रवाई इस बात पर निर्भर करती है कि यात्री का व्यवहार संबंधित कानून के तहत दंडनीय उपद्रव की श्रेणी में आता है या नहीं।
ट्रेन में तेज आवाज से दूसरे यात्रियों को होती है परेशानी
दक्षिण रेलवे के निर्देशों के मुताबिक, ट्रेन और स्टेशन पर मोबाइल के स्पीकर से तेज आवाज में संगीत बजाने से दूसरे यात्रियों को असुविधा हो सकती है। खासकर रात के समय शोर के कारण लोगों की नींद और आराम प्रभावित होते हैं।
इस समस्या को कम करने के लिए रेलवे ने सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से यात्रियों को जागरूक करने तथा हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में घोषणाएं करने के निर्देश दिए हैं। सूचना-पट्टों के जरिए भी यात्रियों को नियमों के प्रति जागरूक किया जा सकता है।
रेलवे ने यात्रियों से गाने सुनने के लिए ईयरफोन का इस्तेमाल करने, मोबाइल पर धीमी आवाज में बात करने और यात्रा के दौरान अनावश्यक शोर से बचने की अपील की है।
रेलवे बोर्ड के पुराने निर्देश भी लागू
दक्षिण रेलवे ने रेलवे बोर्ड के 23 जुलाई 2012 के निर्देशों का भी उल्लेख किया है। इन निर्देशों में मोबाइल फोन पर जोर-जोर से बात करने, तेज रिंगटोन बजाने और लंबी बातचीत के कारण दूसरे यात्रियों को होने वाली परेशानी से बचने की सलाह दी गई थी।
विशेष रूप से वातानुकूलित डिब्बों में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मोबाइल को साइलेंट या वाइब्रेशन मोड पर रखने, रिंगटोन धीमी करने और फोन पर कम आवाज में बात करने की सलाह दी गई है।
रेलवे अधिनियम की धारा 145 में क्या है प्रावधान?
रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 145 रेलवे परिसर में नशे की हालत में उपद्रव करने, झगड़ा करने, अश्लील या अभद्र व्यवहार करने और अन्य यात्रियों को परेशान करने जैसे मामलों से संबंधित है।
इस धारा के तहत दोष सिद्ध होने पर छह महीने तक की साधारण कैद और जुर्माने का प्रावधान है। कानून में जुर्माने की राशि और न्यूनतम सजा से संबंधित शर्तें भी हैं।
लेकिन केवल मोबाइल पर आवाज चलाने को हर मामले में धारा 145 के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। यह देखना जरूरी होगा कि संबंधित यात्री का व्यवहार कानून में बताए गए उपद्रव या अन्य दंडनीय गतिविधियों के दायरे में आता है या नहीं।
क्या ट्रेन में गाना बजाने पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगेगा?
ट्रेन में तेज आवाज में गाना बजाने पर हर यात्री से सीधे 1,000 रुपये वसूलने का कोई सार्वभौमिक नियम इस जानकारी से स्थापित नहीं होता। इसी तरह, केवल स्पीकर का इस्तेमाल करने पर जेल होना भी अनिवार्य नहीं है।
यदि कोई यात्री जानबूझकर दूसरों को परेशान करता है, उपद्रव करता है या रेलवे परिसर में कानून का उल्लंघन करता है, तो परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई हो सकती है। इसलिए जुर्माने या जेल से जुड़ा दावा पढ़ते समय संबंधित कानून और मामले की वास्तविक परिस्थितियों को समझना जरूरी है।
ट्रेन में सफर करते समय इन बातों का रखें ध्यान
- गाने सुनने के लिए ईयरफोन या हेडफोन का इस्तेमाल करें।
- मोबाइल पर तेज आवाज में संगीत न बजाएं।
- फोन पर बातचीत करते समय आवाज धीमी रखें।
- रात के समय दूसरे यात्रियों की नींद और आराम का ध्यान रखें।
- तेज रिंगटोन और अनावश्यक शोर से बचें।
- रेलवे कर्मचारियों के वैध निर्देशों का पालन करें।
निष्कर्ष: रेलवे का उद्देश्य ट्रेन और स्टेशन पर सभी यात्रियों के लिए शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना है। यात्रा के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल जिम्मेदारी से करें और दूसरों की सुविधा का सम्मान करें। साथ ही, जुर्माने और जेल से संबंधित दावों को बिना कानूनी संदर्भ समझे सच न मानें।
सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। किसी विशेष मामले में कार्रवाई से पहले रेलवे के आधिकारिक निर्देशों और लागू कानून के प्रावधानों की पुष्टि करें।



