स्टॉक ब्रोकरों और बाजार से जुड़े दूसरे लोगों ने एक बार फिर स्टॉक एक्सचेंजों से अनुरोध किया है कि वे पिछले साल की तरह ही इस बार भी दिन के समय मुहूर्त ट्रेडिंग आयोजित करने पर विचार करें. ब्रोकर्स ने ‘ब्रोकर्स इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स फोरम’ के माध्यम से एक्सचेंजों को एक प्रस्ताव सौंपा है. ब्रोकर्स ने बताया है कि इस साल दिवाली पर शुभ मुहूर्त का समय दोपहर 1:47 बजे से 3:12 बजे के बीच है. उन्होंने दोपहर 2 बजे से 3 बजे के बीच ट्रेडिंग सत्र आयोजित करने का प्रस्ताव दिया है. सूत्रों के अनुसार, एक्सचेंज इस अनुरोध पर विचार कर रहे हैं.

शुरुआती योजना के तहत, मुहूर्त ट्रेडिंग दोपहर 2:20 बजे से 3:20 बजे के बीच हो सकती है. इससे पहले दोपहर 1:50 बजे से 2:05 बजे तक ‘ब्लॉक डील विंडो’ और उसके बाद 2:05 बजे से 2:20 बजे तक ‘प्रीओपन सत्र’ हो सकता है. अभी तक कोई आधिकारिक सर्कुलर जारी नहीं किया गया है. एक्सचेंज आमतौर पर ट्रेडिंग शेड्यूल और छुट्टियों को अंतिम रूप देने से पहले आपस में सलाहमशविरा करते हैं. इन चर्चाओं के पूरा होने के बाद ही मुहूर्त ट्रेडिंग के अंतिम शेड्यूल की घोषणा होने की उम्मीद है. पिछले साल, मुहूर्त ट्रेडिंग को शाम के पारंपरिक समय से हटाकर दोपहर 1:45 बजे से 2:45 बजे के बीच कर दिया गया था.
प्रोफेशनल्स को भी मिले दिवाली मनाने का मौका
‘एसोसिएशन ऑफ NSE मेंबर्स ऑफ इंडिया’ ने भी एक्सचेंजों से दोपहर में मुहूर्त ट्रेडिंग कराने के प्रस्ताव पर विचार करने का आग्रह किया है. उन्होंने इसके पीछे ‘परंपरा, समावेशिता और कामजीवन के बीच संतुलन’ का तर्क दिया है. ANMI के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश श्रॉफ ने कहा कि इससे हमारी बाजार की पुरानी परंपरा भी बनी रहेगी और ब्रोकर्स, कर्मचारियों तथा उनके परिवारों को देर शाम तक चलने वाले ट्रेडिंग सत्र के दबाव के बिना एक साथ दिवाली मनाने का मौका मिलेगा.
‘धन’ के फाउंडर जय प्रकाश गुप्ता, जिन्होंने पिछले साल दिन के समय मुहूर्त ट्रेडिंग कराने के लिए पहल की थी, उन्होंने इस साल भी ऐसा ही आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि हालांकि मुहूर्त ट्रेडिंग बाजार की एक बहुत ही खास परंपरा है, लेकिन इसके साथ कई तरह की ऑपरेशनल और कंप्लायंस जिम्मेदारियां भी आती हैं, जिनकी वजह से लोगों को अक्सर देर शाम तक काम करना पड़ता है. इस दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग को दोपहर में आयोजित करने से इन प्रोफेशनल्स को अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने और अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने का मौका मिल सकेगा.
क्या है ब्रोकर्स का तर्क
ब्रोकर्स का तर्क है कि दोपहर के सत्र से ब्रोकरेज फर्मों, स्टॉक एक्सचेंजों, क्लियरिंग कॉरपोरेशन, डिपॉजिटरी, कस्टोडियन, बैंकों और बाजार से जुड़े अन्य संस्थानों में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों को अपना काम समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी. इससे वे शाम के शुभ समय में अपने परिवारों के साथ दिवाली मना सकेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मकसद नियमों में कोई ढील मांगना नहीं है, बल्कि बाजार के प्रोफेशनल्स को अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने में मदद करना है, ताकि बाजार का कामकाज भी सुचारू रूप से चलता रहे.
ब्रोकर्स ने मुहूर्त ट्रेडिंग के बाद पूरी की जाने वाली कंप्लायंस जरूरतों की ओर भी ध्यान दिलाया है. उन्होंने सुझाव दिया है कि कुछ प्रक्रियाओं, जैसे कि सिक्योरिटीज का ‘अर्ली पेइन’ और फंड एलोकेशन को अगले कारोबारी दिन पूरा करने की अनुमति दी जाए. अन्य सुझावों में इस दौरान ‘पीक मार्जिन’ की कमी पर लगने वाले जुर्माने को माफ करना और ‘एंडऑफडे’ एलोकेशन को अगले कारोबारी दिन सुबह 9 बजे से पहले पूरा करने की छूट देना शामिल है. ब्रोकर्स के अनुसार, मौजूदा शेड्यूल की वजह से स्टॉक एक्सचेंजों और क्लियरिंग कॉरपोरेशन सहित बाजार से जुड़े संस्थानों के कर्मचारियों को अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने के लिए बहुत कम समय मिल पाता है.
काफी पुरानी है ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ की परंपरा
जैसेजैसे कंप्लायंस की जरूरतें बढ़ रही हैं और रिपोर्टिंग की समयसीमा सख्त होती जा रही है, कर्मचारियों को अक्सर फंड एलोकेशन और सिक्योरिटीज के ‘अर्ली पेइन’ जैसी पोस्टट्रेड प्रोसेस को पूरा करने के लिए देर तक रुकना पड़ता है. ब्रोकर्स ने बताया कि जब तक वे अपना काम खत्म करके घर पहुंचते हैं, तब तक दिवाली मनाने का उत्साह खत्म हो चुका होता है. उन्होंने कहा कि यह समस्या कई सालों से बनी हुई है.
मुहूर्त ट्रेडिंग भारतीय शेयर बाजार की एक पुरानी परंपरा है, जो हर साल दिवाली के दिन आयोजित की जाती है. हिंदू परंपरा में देवी लक्ष्मी की पूजा से जुड़ी समृद्धि और धन को आमंत्रित करने के प्रतीक के रूप में निवेशक इस विशेष सत्र में हिस्सा लेते हैं. यह सत्र विक्रम संवत कैलेंडर के अनुसार नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का भी प्रतीक है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने 1957 में ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ की परंपरा शुरू की थी. तब से, यह विशेष ट्रेडिंग सत्र पारंपरिक रूप से शाम के समय आयोजित किया जाता रहा है, हालाँकि पिछले साल इसका समय बदलकर दोपहर कर दिया गया था.



