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​संसद से ताजमहल और परमाणु प्लांट तक, CISF कहां-कहां तैनात है?

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में सुरक्षा व्यवस्था को बदलने की तैयारी है. यह बदलाव 1 नवंबर से लागू होगा. देश के 250 पोर्ट की सुरक्षा के लिए मुंबई और चेन्नई में अलग से कमान होगी. बिजली, कोयला, स्टील पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के लिए भी अलग सेक्टर होंगे. फिलहाल CISF देश के 13 बड़े पोर्ट की सुरक्षा करता है. अभी सुरक्षा की जिम्मेदारी भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर तय होती है. गृह मंत्रालय ने नई व्यवस्था को मंजूरी दे दी है.

​संसद से ताजमहल और परमाणु प्लांट तक, CISF कहां-कहां तैनात है?

CISF गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाला केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है. इसकी जड़ें 1969 से जुड़ी हैं, जब संसद ने CISF अधिनियम 1968 पारित किया था. 1983 के संशोधन के बाद इसे संघ का सशस्त्र बल घोषित किया गया. शुरुआत में इसका काम सार्वजनिक क्षेत्र के कारखानों की सुरक्षा था, लेकिन समय के साथ इस बल की जिम्मेदारी बढ़ती है.

कहांकहां CISF की सुरक्षा का पहरा?

  • हवाई अड्डा: मार्च 2026 के आंकड़ों के मुताबिक CISF देशभर में 361 प्रतिष्ठानों की सुरक्षा कर रहा है, जिनमें 70 हवाई अड्डे शामिल हैं. कुछ अन्य रिपोर्टों में हवाई अड्डों की संख्या 71 बताई गई है. यह CISF की सबसे जानीपहचानी जिम्मेदारी है. एयरपोर्ट की सुरक्षा साल 2000 में IC814 विमान अपहरण के बाद इसे सौंपी गई थी. आज यह बल यात्रियों और सामान की जांच से लेकर पूरे परिसर की सुरक्षा संभालता है. हाल में खुले नोएडा इंटरनेशनल और नवी मुंबई एयरपोर्ट भी इस सूची में गिने जाते हैं.

    सीआईएसएफ जवान. फोटो: पीटीआई

  • दिल्ली मेट्रो: CISF ने 2007 में दिल्ली पुलिस से दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा संभाली थी. अब नेटवर्क पर 3,500 से ज्यादा जवान तैनात हैं. इनके साथ मेटल डिटेक्टर, एक्सरे बैगेज स्कैनर और डॉग स्क्वॉड काम करते हैं.
  • परमाणु और अंतरिक्ष प्रतिष्ठान: CISF परमाणु बिजलीघरों, अंतरिक्ष प्रतिष्ठानों और सीमावर्ती सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील बिजली परियोजनाओं तक की सुरक्षा संभालता है. ये वे ठिकाने हैं जिनकी सुरक्षा में चूक का असर बहुत बड़ा हो सकता है.
  • बंदरगाह, बिजली और औद्योगिक इकाइयां: बल के दायरे में परमाणु और अंतरिक्ष केंद्रों के अलावा तेल रिफाइनरियां, स्टील प्लांट, बंदरगाह, बिजलीघर और खदानें भी हैं. देश के प्रमुख बंदरगाहों पर भी इसकी तैनाती है. मार्च 2026 के आसपास तक के आंकड़ों में बड़े बंदरगाहों की गिनती का जिक्र अलगअलग मिलता है, इसलिए संख्या लिखनी हो तो आधिकारिक स्रोत से मिला लें.
  • संसद भवन और सरकारी इमारतें: संसद भवन परिसर और जम्मूकश्मीर की केंद्रीय जेलें भी CISF की सुरक्षा में आती हैं. संवेदनशील सरकारी भवनों की सुरक्षा भी इसके जिम्मे है.

    ताजमहल की सुरक्षा करती सीआईएसएफ की महिला जवान. फोटो: PTI

  • ऐतिहासिक स्मारक: ताजमहल और लाल किले जैसे विरासत स्थल भी CISF की सुरक्षा के घेरे में हैं, जहां रोज हजारों पर्यटक आते हैं, वहां तैनाती का मकसद भीड़ और खतरे दोनों को संभालना होता है.
  • निजी कंपनियां: CISF सिर्फ सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं रहा. 2008 में हुए 26/11 के मुंबई हमले के बाद इसकी सेवाएं निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों तक बढ़ाई गईं. इंफोसिस का बेंगलुरु परिसर और रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी निजी कंपनियों की सूची में हैं. हालांकि, यह सेवा मुफ्त नहीं है. CISF सेवा शुल्क लेता है.
  • फायर विंग और VIP सुरक्षा: इसकी एक अलग पहचान दमकल सेवा भी है. CISF अपने फायर विंग के जरिए 115 प्रतिष्ठानों को अग्नि सुरक्षा देता है. इसके अलावा बल की एक अलग VIP सुरक्षा शाखा भी है, जो खास हस्तियों को चौबीसों घंटे सुरक्षा देती है.

CISF गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाला केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है. फोटो: PTI

आगे क्या बदलेगा?

बल का दायरा लगातार बढ़ रहा है. सरकार ने नए औद्योगिक केंद्रों, हवाई अड्डों और बंदरगाहों के विस्तार को देखते हुए CISF की स्वीकृत संख्या बढ़ाकर 2.20 लाख करने की मंजूरी दी है. साथ ही 2026 में बल 2,400 महिला कर्मियों की भर्ती करेगा, ताकि महिलाओं की हिस्सेदारी 10% हो सके, और पहली बार पूरी तरह महिला कमांडो टीम भी तैयार की जा रही है.

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