इस हफ्ते आने वाले 30,213 करोड़ रुपए तक के IPO से पहले, कई ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि अपनी टेलीकॉम यूनिट में 5G रोलआउट का काम काफी हद तक पूरा कर लेने के बाद, अब जियो प्लेटफॉर्म्स अपने अगले चरण के विकास के लिए AI, होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज सेवाओं और अपनी इनहाउस तकनीक के निर्यात पर ध्यान दे रहा है. यह बड़ा IPO, जिसमें 1,0651,119 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर नए शेयर जारी किए जाएंगे, 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. वहीं, एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 19 अक्टूबर को तय की गई है.

सूत्रों के अनुसार, देश और विदेश के प्रमुख संस्थागत निवेशकों ने जियो प्लेटफॉर्म्स के इस पब्लिक इश्यू में लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये की दिलचस्पी दिखाई है. सूत्रों ने बताया कि जियो प्लेटफॉर्म्स में पहले से निवेश कर चुकी ‘अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी’ ने भी IPO के संस्थागत हिस्से में भाग लेने में दिलचस्पी दिखाई है, हालांकि अभी तक इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है. सूत्रों के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स ने शनिवार को ब्रोकरों और विश्लेषकों के साथ प्रीIPO बैठकों का दूसरा दौर आयोजित किया. इस दौरान, कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी और उनकी बहन ईशा अंबानी ने प्रतिभागियों के सामने विकास का रोडमैप पेश किया. इससे पहले, बैठकों का एक दौर गुरुवार को भी हुआ था.
सूत्रों ने बताया कि रिटेल निवेशकों और कर्मचारियों के बीच भी इस IPO को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है, और कुछ ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स पर प्रीIPO आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है. उन्होंने आगे बताया कि जिन निवेशकों के पास डीमैट खाते हैं, वे संबंधित ब्रोकरों के जरिए आवेदन प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं. कर्मचारियों ने भी इस बारे में पूछताछ शुरू कर दी है, जो इस ऑफर में उनकी गहरी दिलचस्पी को दर्शाता है. इस बीच, ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि कंपनी का अगला विकास AI, होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज सेवाओं और विदेशों में अपनी तकनीक की लाइसेंसिंग से आएगा.
एमके ग्लोबल की रिपोर्ट
एमके ग्लोबल ने कहा कि कंपनी की अपनी इनहाउस तकनीक उसे विकास के अगले चरण के लिए तैयार करती है. उन्होंने बताया कि जियो ने मजबूत इनहाउस तकनीकी क्षमताएं विकसित की हैं, जिसमें ‘मेड इन इंडिया’ एंडटूएंड 5G स्टैक शामिल है. इसमें 4G+5G कॉम्बिनेशन कोर, 5G डिवाइस, और कंपनी के अपने ‘ऑपरेशंस सपोर्ट सिस्टम’ व ‘बिजनेस सपोर्ट सिस्टम’ शामिल हैं. इसकी अपनी ‘पॉइंटटूमल्टीपॉइंट अनलाइसेंस्ड बैंड रेडियो’ तकनीक ने इसे भारत की पहली ऐसी कंपनी बना दिया है, जो UBR के जरिए ‘फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस’ की सुविधा देती है. एमके ने बताया कि जियो प्लेटफॉर्म्स का लक्ष्य चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में स्थानीय ऑपरेटरों के साथ मिलकर इन तकनीकों को लागू करना है.
कंपनी के बाज़ार में अग्रणी होने, कीमतों को तय करने की क्षमता, विकास के मौकों और काम पूरा करने के शानदार ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए, ब्रोकरेज फर्म ने इस इश्यू को सब्सक्राइब करने की सलाह दी है. एमके ग्लोबल के अनुसार, मुख्य जोखिमों में स्पेक्ट्रम की लागत और नियमों में बदलाव शामिल हैं. इसके अलावा, बाज़ार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का असर प्रति यूज़र औसत रेवेन्यू और ग्राहकों के कंपनी छोड़कर जाने पर पड़ सकता है. साथ ही, रिलायंस ग्रुप की अन्य कंपनियों पर निर्भरता, पैसिव इंफ्रास्ट्रक्चर और उपकरण विक्रेताओं पर ज़्यादा निर्भरता, और विदेशी मुद्रा से जुड़े जोखिम भी इसमें शामिल हैं.
GEPL की रिपोर्ट में क्या है?
GEPL ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कंपनी की अपनी स्वदेशी स्टैंडअलोन 5G तकनीक, ‘जियोब्रेन AI’ प्लेटफॉर्म, 6G रिसर्च में निवेश, क्लाउडनेटिव आर्किटेक्चर और AIआधारित नेटवर्क ऑटोमेशन उसे एक तकनीकी बढ़त देते हैं. इससे कंपनी को एंटरप्राइज़ सॉल्यूशंस और विदेशी बाजारों के जरिए अपनी क्षमताओं से कमाई करने के नए मौके मिल सकते हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर, जियो प्लेटफॉर्म्स 5G को अपनाने के बढ़ते चलन, फिक्स्ड ब्रॉडबैंड के विस्तार, एंटरप्राइज़ डिजिटलाइज़ेशन और AIआधारित सेवाओं से लाभ उठाने की स्थिति में है. कंपनी के पास अपनी तकनीक का मालिकाना हक है, बड़े पैमाने पर काम करने का फायदा है, एक विविध डिजिटल इकोसिस्टम है और मज़बूत मुनाफ़ा कमाने की क्षमता है, जो इसके निरंतर विकास में मदद करेगी.
GEPL के अनुसार, टेलीकॉम ऑपरेटरों के साथ साझेदारी करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने और अपनी 5G कोर तकनीक, क्लाउडनेटिव RAN, OSS/BSS और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस तकनीकों से कमाई करने पर, कंपनी घरेलू कनेक्टिविटी सेवाओं के अलावा भी रेवेन्यू के नए स्रोत बना सकती है. इसमें आगे कहा गया है कि जियो प्लेटफॉर्म्स अपने ‘जियोब्रेन AI’ प्लेटफॉर्म और ऑटोनॉमस नेटवर्क क्षमताओं को वैश्विक टेलीकॉम ऑपरेटरों और अन्य उद्योगों तक पहुंचाने की योजना बना रही है.
इसके लिए वह अपने व्यापक नेटवर्क और ऑपरेशनल डेटा का इस्तेमाल करके ऐसे तकनीकी समाधान विकसित करेगी, जिन्हें बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके. रिपोर्ट के अनुसार, सैटेलाइट कनेक्टिविटी और रिन्यूएबल एनर्जी में किया गया निवेश भी नेटवर्क की पहुंच बढ़ाने और कामकाज की दक्षता में सुधार करने के अच्छे अवसर हो सकते हैं.
क्या कहती है SMC?
SMC ने बताया कि जियो की खूबियों में “बेमिसाल पैमाना” , इनहाउस टेक्नोलॉजी स्टैक, रिलायंस रिटेल की डिस्ट्रीब्यूशन पहुंच, और स्पेक्ट्रम का एक व्यापक पोर्टफोलियो शामिल हैं. इसमें यह भी कहा गया कि FY26 में कैश कैपिटल एक्सपेंडिचर घटकर रेवेन्यू का 23.27 प्रतिशत रह गया, जो कंपनी के रेवेन्यू बेस की तुलना में कम निवेश तीव्रता को दर्शाता है.
रिस्क फैक्टर्स के संबंध में, SMC ने कहा कि टेलीकॉम डिपार्टमेंट द्वारा टेलीकॉम लाइसेंसिंग शर्तों, एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू की गणना, या स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज नियमों में कोई भी प्रतिकूल बदलाव वित्तीय देनदारियों को काफी बढ़ा सकता है. अन्य जोखिमों में रिलायंस जियो इन्फोकॉम पर 87 प्रतिशत से अधिक राजस्व निर्भरता, रिलायंस रिटेल के माध्यम से ही वितरण होना, प्रतिस्पर्धा और साइबर सुरक्षा शामिल हैं.
SBI सिक्योरिटीज की रिपोर्ट
SBI सिक्योरिटीज ने गौर किया कि जियो खुद को एक टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित कर रहा है. इसका अपना इनहाउस स्टैक, 5G में नेतृत्व और स्पेक्ट्रम की व्यापक उपलब्धता इसे केवल कनेक्टिविटी से कहीं आगे एक बढ़त दिलाती है. उन्हें टैरिफ को तर्कसंगत बनाने, 2G से ग्राहकों के माइग्रेशन, होम ब्रॉडबैंड और एंटरप्राइज स्तर पर अपनाए जाने से विकास की उम्मीद है. इसके अलावा, AI, सैटेलाइट और विदेशों में विस्तार के जरिए भी कमाई के नए अवसर मिल सकते हैं. उन्होंने कहा कि 5G के लिए किया गया पूंजीगत व्यय मजबूत कैश फ्लो में मदद करेगा. साथ ही, उन्होंने कैपेक्स की अधिकता, बुनियादी ढांचे पर निर्भरता, साइबर सुरक्षा, स्पेक्ट्रम के नवीनीकरण और नेटवर्क में रुकावट को संभावित जोखिमों के रूप में चिह्नित किया है.



