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पत्नी की अर्थी के पास सिंदूर लेकर पहुंचा पति, मांग भरते ही बिखर गया जिंदगी का साथ; एक साथ उठीं दोनों की अर्थियां

पत्नी की अर्थी के पास सिंदूर लेकर पहुंचा पति, मांग भरते ही बिखर गया जिंदगी का साथ; एक साथ उठीं दोनों की अर्थियां

औरैया: मधवापुर गांव में श्यामल दास और पिंकी की जिंदगी गरीबी और संघर्ष के बीच गुजर रही थी, लेकिन दोनों एक-दूसरे का सहारा बने हुए थे। पिंकी लंबे समय से बीमारी से जूझ रही थीं और श्यामल दास उनकी देखभाल में लगा रहता था। उसे हमेशा डर सताता था कि अगर पत्नी ने साथ छोड़ दिया तो वह कैसे जी पाएगा। शायद उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन ऐसा आएगा, जब दोनों की अर्थियां एक साथ उठेंगी और उनके दो मासूम बच्चे माता-पिता के बिना रह जाएंगे।

श्यामल दास की उम्र करीब 40 साल थी, जबकि पिंकी 35 वर्ष की थीं। पिंकी पिछले चार वर्षों से टीबी से पीड़ित थीं। उनका इलाज कानपुर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। बीमारी ने परिवार की आर्थिक हालत भी कमजोर कर दी थी। श्यामल दास भूमिहीन था और मजदूरी करके घर चलाता था, लेकिन पत्नी की देखभाल के कारण उसके लिए काम करना भी मुश्किल हो गया था।

इसके बावजूद उसने पत्नी का साथ नहीं छोड़ा। गांव के लोग बताते थे कि वह पिंकी से बहुत प्यार करता था। उसकी सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता था। वह अक्सर कहता था कि अगर पिंकी को कुछ हो गया तो उसके लिए जीना मुश्किल हो जाएगा।

रातभर पत्नी के पास बैठकर रोता रहा पति

सोमवार की शाम पिंकी की तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। परिवार और गांव के लोग उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी कर ही रहे थे कि उनकी मौत हो गई। पत्नी के दुनिया से चले जाने की बात श्यामल दास के लिए किसी गहरे सदमे से कम नहीं थी।

उस रात वह पत्नी के शव के पास बैठा रहा। कभी उसके चेहरे को निहारता, कभी उसका हाथ पकड़कर रोने लगता। उसके मन में शायद उन दिनों की यादें उमड़ रही थीं, जब दोनों ने साथ मिलकर घर बसाया था, बच्चों को बड़ा करने के सपने देखे थे और मुश्किल वक्त में एक-दूसरे का सहारा बनने का वादा किया था।

वह बार-बार पत्नी को याद करके बिलख उठता। घर में मौजूद लोगों के लिए उसे संभालना मुश्किल हो रहा था। रात बीतती रही, लेकिन श्यामल दास का दुख कम नहीं हुआ। पत्नी के बिना आगे की जिंदगी की कल्पना करना भी उसके लिए कठिन हो गया था।

पत्नी की मांग में सिंदूर भरते समय गिर पड़ा श्यामल दास

मंगलवार की सुबह परिवार के लोग पिंकी के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान श्यामल दास पत्नी की अर्थी के पास पहुंचा और उसकी मांग में सिंदूर भरने लगा। इसी समय वह अचानक लड़खड़ाकर गिर पड़ा। परिवार के लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही उसकी भी मौत हो गई।

जिस महिला के साथ उसने जीवन बिताने के वचन लिए थे, उसकी विदाई के समय वह भी दुनिया से चला गया। घर में पहले से पत्नी की मौत का मातम था, अब पति की अचानक मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया। गांव में खबर फैलते ही लोग स्तब्ध रह गए। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि एक ही परिवार पर इतना बड़ा दुख कैसे टूट पड़ा।

ग्रामीणों के मुताबिक, श्यामल दास अपनी पत्नी से बेहद प्रेम करता था और बीमारी के दौरान उसकी सेवा में लगा रहता था। हालांकि, उसकी मौत का सटीक चिकित्सकीय कारण सामने नहीं था; परिवार ने इसे पत्नी की मौत के सदमे से जोड़कर देखा।

एक साथ उठीं अर्थियां, गांव की आंखें हुईं नम

श्यामल दास और पिंकी की अंतिम विदाई भी एक साथ हुई। गांव के लोग दोनों की अर्थियों के साथ चले तो माहौल गमगीन हो गया। जिस दंपती ने कभी साथ मिलकर घर बसाया था, वह अब एक साथ अंतिम यात्रा पर निकल रहा था। ग्रामीणों की आंखें नम थीं और परिवार के लोगों को संभालना मुश्किल हो रहा था।

श्यामल दास के ससुर रामसनेही ने अंतिम संस्कार की व्यवस्था की। दोनों का अंतिम संस्कार नदी किनारे एक साथ किया गया। श्यामल दास के चचेरे भाई सुनील ने अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं।

पीछे रह गए दो मासूम बेटे

इस दुखद घटना का सबसे दर्दनाक पहलू उन दो बच्चों का भविष्य था, जिनके सिर से एक ही दिन में माता-पिता का साया उठ गया। श्यामल दास और पिंकी के दो बेटे देव, सात वर्ष और दिव्यांशु, नौ वर्ष के थे। उनकी दो बेटियों की भी पहले ही मौत हो चुकी थी।

परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी। श्यामल दास के पास अपनी जमीन नहीं थी और घर का खर्च मजदूरी से चलता था। अब माता-पिता दोनों के चले जाने के बाद बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी उनके नाना रामसनेही ने उठाने का फैसला किया।

मधवापुर गांव के लिए यह सिर्फ एक परिवार में हुई दो मौतों की घटना नहीं थी, बल्कि दो बच्चों के बचपन पर छा गया ऐसा अंधेरा था, जिसकी भरपाई आसान नहीं थी। श्यामल दास और पिंकी की कहानी अपने पीछे प्यार, संघर्ष और बिछोह की यादें छोड़ गई, लेकिन सबसे बड़ा सवाल उन मासूम बच्चों की जिंदगी का था, जिन्हें अब अपने माता-पिता के बिना आगे बढ़ना था।

सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह कहानी उपलब्ध विवरणों और ग्रामीणों के बयानों पर आधारित है। श्यामल दास की मौत का चिकित्सकीय कारण स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं है।

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