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पति ने नहीं छोड़ी वसीयत, चार बच्चों से हुआ संपत्ति का विवाद; अदालत ने पत्नी को दिलाया करीब 22 करोड़ रुपये में आधा हिस्सा

पति ने नहीं छोड़ी वसीयत, चार बच्चों से हुआ संपत्ति का विवाद; अदालत ने पत्नी को दिलाया करीब 22 करोड़ रुपये में आधा हिस्सा

अमेरिका: पति की मृत्यु के बाद संपत्ति के बंटवारे को लेकर एक महिला और उसके चार सौतेले बच्चों के बीच कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। मामला लाखों डॉलर के निवेश खातों से जुड़ा था, जिनमें बच्चों को लाभार्थी बनाया गया था। हालांकि, केंटकी की अपील अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए माना कि राज्य के कानून के तहत पत्नी नैन्सी बोबो पेरिन निवेश की रकम में अपने कानूनी हिस्से की हकदार हैं।

मामले में विवादित निवेश खातों की कुल कीमत पति की मृत्यु के समय करीब 23.3 लाख डॉलर थी, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 22 करोड़ रुपये के बराबर बताई गई है। अदालत के फैसले से पत्नी के आधे हिस्से पर दावा बरकरार रहा, जबकि पति की मृत्यु से कुछ दिन पहले बच्चों और पोते-पोतियों को दिए गए 1.26 लाख डॉलर के उपहारों को भी वैध माना गया।

कई दशक बाद दोबारा मिले थे पति-पत्नी

अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, बिल और नैन्सी की पहली मुलाकात 1952 में अटलांटा में हुई थी। बाद में दोनों अलग हो गए और उन्होंने अलग-अलग लोगों से शादी कर ली। दोनों के अपने-अपने परिवार और बच्चे भी थे।

अपने जीवनसाथियों की मृत्यु के बाद वर्ष 2007 में दोनों फिर संपर्क में आए। इसके बाद अक्टूबर 2015 में उन्होंने शादी कर ली। रिपोर्ट के अनुसार, शादी से पहले या बाद में दोनों के बीच संपत्ति को लेकर कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ था।

दिसंबर 2022 में बिल गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद उन्हें कई महीनों तक अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। 6 फरवरी 2024 को उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने कोई वसीयत नहीं छोड़ी थी। उनकी मृत्यु के बाद नैन्सी को उनकी संपत्ति के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई।

निवेश खातों में बच्चों के नाम थे लाभार्थी

बिल के पास श्वाब के माध्यम से संचालित दो निवेश खाते थे। मृत्यु के समय इनकी कुल कीमत 23.3 लाख डॉलर थी। इन खातों में उनके चार बच्चों को लाभार्थी के रूप में नामित किया गया था, जिसके आधार पर बच्चे रकम पर अपना अधिकार जता रहे थे।

दूसरी ओर, नैन्सी ने केंटकी के कानून का हवाला देते हुए दावा किया कि पति की मृत्यु बिना वसीयत के होने के कारण वह उनकी संपत्ति के निर्धारित हिस्से की हकदार हैं। उनका तर्क था कि खातों में बच्चों के नाम लाभार्थी के तौर पर दर्ज होने से उनके वैधानिक अधिकार समाप्त नहीं हो जाते।

इस विवाद में 1.26 लाख डॉलर की रकम भी शामिल थी। यह पैसा बिल की मृत्यु से करीब एक सप्ताह पहले, 30 जनवरी 2024 को उनके निवेश खाते से बच्चों और पोते-पोतियों को हस्तांतरित किया गया था।

बच्चों ने फैसले को दी चुनौती

अक्टूबर 2025 में फेयेट सर्किट कोर्ट ने नैन्सी के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद बिल के चार बच्चों ने अपील दायर की। उनका कहना था कि निवेश खातों में जिन लोगों को लाभार्थी बनाया गया था, रकम उन्हीं को मिलनी चाहिए।

अपील अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने ध्यान दिया कि बिल अपने जीवनकाल में निवेश खातों पर नियंत्रण रखते थे। वह खातों से रकम निकाल सकते थे, लाभार्थियों के नाम बदल सकते थे या खाते बंद कर सकते थे।

अदालत ने यह भी माना कि बच्चे उस कानूनी धारणा को गलत साबित नहीं कर पाए, जिसके आधार पर पत्नी के वैधानिक हिस्से को सुरक्षित रखा गया था। परिणामस्वरूप, नैन्सी के पक्ष में दिया गया फैसला बरकरार रहा।

पत्नी के हिस्से और उपहारों पर क्या हुआ फैसला?

अदालत ने निवेश खातों की कुल रकम में नैन्सी के आधे हिस्से से जुड़े फैसले को कायम रखा। साथ ही, पति की मृत्यु से कुछ दिन पहले बच्चों और पोते-पोतियों को दिए गए उपहारों की वैधता पर निचली अदालत के निष्कर्ष को भी बरकरार रखा।

यह मामला दिखाता है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद संपत्ति का बंटवारा केवल खाते में दर्ज लाभार्थियों के नाम पर निर्भर नहीं करता। संबंधित राज्य के उत्तराधिकार कानून और संपत्ति की कानूनी स्थिति भी अहम भूमिका निभा सकती है।

सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध अदालती रिकॉर्ड और प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित है। डॉलर से रुपये में राशि का अनुमान लगाया गया है; वास्तविक मूल्य विनिमय दर के अनुसार बदल सकता है।

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