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बिहार के मखाने से मणिपुर के काले चावल तक, विदेशों में क्यों बढ़ रही इन भारतीय उत्पादों की मांग?

बिहार के मखाने से मणिपुर के काले चावल तक, विदेशों में क्यों बढ़ रही इन भारतीय उत्पादों की मांग?

नई दिल्ली: भारत के खेतों में उगने वाले कई पारंपरिक खाद्य उत्पाद अब विदेशी बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। बिहार का मखाना हो, मोटे अनाज हों या फिर सहजन की पत्तियों से बना मोरिंगा पाउडर, इन उत्पादों की मांग भारत के बाहर भी बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में बिहार के पूर्णिया के मखाने का जिक्र करते हुए बताया कि यह उत्पाद ग्रीस तक पहुंच रहा है।

भारतीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिल रही जगह से किसानों, प्रसंस्करण उद्योग और निर्यात कारोबार के लिए नए अवसर बन रहे हैं। आइए जानते हैं उन भारतीय खाद्य उत्पादों के बारे में, जिनकी विदेशों में भी मांग है।

1. बिहार का मखाना विदेशी बाजारों में बना पसंदीदा स्नैक

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बिहार मखाने के उत्पादन के लिए जाना जाता है। खासकर मिथिलांचल और आसपास के क्षेत्रों में इसकी खेती और प्रसंस्करण से बड़ी संख्या में लोग जुड़े हैं। मखाने को हल्के स्नैक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है और विदेशों में भी इसकी पहचान बढ़ रही है।

अमेरिका, कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बाजारों में भारतीय मखाने की मांग बताई जाती है। इसके अलावा यूरोप और ऑस्ट्रेलिया सहित दूसरे बाजारों में भी इसकी पहुंच बढ़ाने की संभावनाएं हैं। ग्रीस तक मखाना पहुंचने का उदाहरण दिखाता है कि स्थानीय कृषि उत्पाद अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुंच सकते हैं।

2. रागी, बाजरा और ज्वार की विदेशों में बढ़ती पहचान

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भारत में रागी, बाजरा और ज्वार जैसे मोटे अनाज लंबे समय से भोजन का हिस्सा रहे हैं। अब इन्हें पोषण से जुड़े गुणों और भोजन में विविधता के कारण दूसरे देशों के बाजारों में भी जगह मिल रही है।

अमेरिका, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भारतीय मोटे अनाजों के खरीदार मिलते हैं। इनका इस्तेमाल आटा, नाश्ते के उत्पादों और दूसरे खाद्य पदार्थों में किया जाता है।

मोटे अनाजों की मांग बढ़ने से किसानों को पारंपरिक फसलों के लिए नए बाजार मिल सकते हैं। हालांकि, किसी उत्पाद की मांग और निर्यात की मात्रा अलग-अलग देशों में समय के साथ बदलती रहती है।

3. मोरिंगा पाउडर की मांग क्यों बढ़ रही है?

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सहजन की पत्तियों से तैयार होने वाला मोरिंगा पाउडर भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बना रहा है। इसे स्मूदी, पेय पदार्थों और विभिन्न खाद्य उत्पादों में इस्तेमाल किया जाता है। कुछ बाजारों में यह वेलनेस और पोषण से जुड़े उत्पादों की श्रेणी में भी बिकता है।

अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में मोरिंगा उत्पादों के लिए बाजार मौजूद हैं। इसकी मांग के पीछे पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों में बढ़ती रुचि भी एक वजह हो सकती है।

हालांकि, मोरिंगा को लेकर किए जाने वाले स्वास्थ्य संबंधी दावों को सावधानी से समझना चाहिए। किसी खाद्य पदार्थ को बीमारी का इलाज मानने से पहले वैज्ञानिक प्रमाण और विशेषज्ञों की सलाह महत्वपूर्ण हैं।

4. भारतीय हल्दी और मसालों की दुनिया भर में मांग

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