करवा चौथ का त्योहार काफी नजदीक आ चुका है। इस समय ज्यादातर महिलाएं करवा चौथ त्योहार की तैयारी में लगी होगी। हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना के लिए रखती हैं।

शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का समापन किया जाता है। इस व्रत में माता करवा, भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करने का विधान है।
करवा चौथ के व्रत में जरुरी चीजों का होना आवश्यक माना जाता है। आइए आपको बताते हैं करवा चौथ व्रत और पूजा की संपूर्ण सामग्री लिस्ट।
करवा चौथ पूजा सामग्री लिस्ट
पूजा के लिए भगवान गणेश, शिवजी और माता पार्वती की प्रतिमा
लकड़ी की चौकी
करवा माता, भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान शिव के नए वस्त्र व चुनरी
मिट्टी का करवा ढक्कन सहित और थाली
सोलह श्रृंगार की सामग्री, दीपक, गाय का शुद्ध घी और रूई की बाती
चांद देखने के लिए छलनी और कलश
कपूर, अगरबत्ती, अक्षत, हल्दी, चंदन, फूल, रोली, कुमकुम और पान का पत्ता
गेहूं, लहुआ, कच्चा दूध, दही, शहद, पिसी हुई शक्कर या बूरा और मिठाई
मौली या कलावा, गिलास अथला लोटा, करवा चौथ व्रत कथा की बुक और दक्षिणा के लिए कुछ पैसे
करवा चौथ की थाली में क्याक्या रखें?
करवा चौथ की थाली का विशेष महत्व हिंदू धर्म में माना जाता है। ऐसे में आप थाली को सजाने के लिए दीपक, छलनी, करवा, पानी का लोटा, दीपक, कांस की सींकें, मिट्टी की 5 डेलियां, सिंदूर और मिठाई जरुर शामिल करें।
करवा चौथ पूजा में करवा, छलनी, सींक और दीपक क्यों है जरूरी?
छलनी करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति का चेहरा छलनी से देखने के बाद व्रत को खोलती हैं। इसके साथ ही चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। छलनी को लेकर ऐसी मान्यता भी है कि इसमें हजारों छेद होते हैं और छलनी से देखने से चांद के जो प्रतिबिंब दिखाई पड़ते हैं उतनी ही अधिक पति आयु लंबी होती है।
करवा धार्मिक मान्यता के अनुसार, करवा भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है। करवे में लगी टोटी भगवान गणेश जी के सूंड समान होती है। इसी से चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत को पूर्ण फल प्राप्त होता है। वहीं, करवा को उस नदी का प्रतीक माना जाता है जिसमें मां करवा के पति का पैर मगरमच्छ ने पकड़ लिया था।
सींक पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार मगरमच्छ ने करवा के पति का पैर पकड़ लिया था, फिर इन सींकों की शक्ति से ही उन्होंने अपने पति के प्राणों की रक्षा की थी। ऐसे में करवा चौथ के दिन कांस की सींक को करवे की टोटी में डालकर रखने का विधान है।
दीपक जब चंद्रोदय हो जाता है, तो छलनी में दीपक रखकर पति का चेहरा देखा जाता है। इस दीपक की मान्यता है कि इसका उजाला पतिपत्नि के रिश्ते के अंधकार का दूर करके उसमें प्रेम की नई रोशनी भरता है।



