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​​​बस ये खबर पढ़ लो फिर रोज़ाना जंक फूड खाने का उतर जाएगा नशा! 

​​​बस ये खबर पढ़ लो फिर रोज़ाना जंक फूड खाने का उतर जाएगा नशा! 

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड यानी जरूरत से ज्यादा औद्योगिक प्रक्रियाओं से तैयार किए गए खाद्य पदार्थ आजकल लोगों की डाइट का हिस्सा बन चुके हैं। पैकेटबंद स्नैक्स, मीठे पेय, इंस्टेंट नूडल्स और रेडी-टू-ईट चीजें स्वाद में भले ही अच्छी लगती हों, लेकिन इनका अधिक सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, रोजाना 100 ग्राम अतिरिक्त अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने का संबंध दिल और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों की घटनाओं के 14 प्रतिशत अधिक जोखिम से पाया गया।

हालांकि, इन आंकड़ों का मतलब यह नहीं है कि जंक फूड खाने वाले हर व्यक्ति को बीमारी होगी। ये आंकड़े भोजन की आदतों और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के बीच संबंध दिखाते हैं, न कि किसी बीमारी का निश्चित परिणाम।

दिल की बीमारी से लेकर मोटापे तक, कई समस्याओं से जुड़ा सेवन

रिपोर्ट में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के अधिक सेवन और कई स्वास्थ्य समस्याओं के बीच संबंध सामने आया। इसमें दिल की बीमारियों का जोखिम 24 प्रतिशत, कैंसर का 12 प्रतिशत और मोटापे या अधिक वजन का जोखिम 23 प्रतिशत अधिक होने से जुड़ा पाया गया।

इसके अलावा, मेटाबोलिक सिंड्रोम या डायबिटीज का जोखिम 24 प्रतिशत, डिप्रेशन और एंग्जायटी का 27 प्रतिशत तथा पाचन संबंधी बीमारियों का जोखिम 31 प्रतिशत अधिक होने से भी संबंध बताया गया। हाई ब्लड प्रेशर और किसी भी कारण से मृत्यु के जोखिम के साथ भी इसका संबंध पाया गया।

ध्यान देने वाली बात यह है कि ये प्रतिशत अलग-अलग स्वास्थ्य परिणामों से जुड़े रिपोर्ट के आंकड़े हैं। इन्हें हर व्यक्ति के लिए बीमारी होने की निश्चित संभावना या सभी मामलों में समान प्रभाव के रूप में नहीं समझना चाहिए।

आखिर क्या होते हैं अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड?

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड ऐसे खाद्य उत्पाद होते हैं, जिन्हें औद्योगिक स्तर पर कई चरणों में तैयार किया जाता है। इनमें स्वाद, रंग, बनावट और उत्पाद को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न सामग्रियों और एडिटिव्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इनके उदाहरणों में शामिल हैं:

  • पैकेटबंद चिप्स और कई तरह के नमकीन स्नैक्स
  • सोडा और अधिक चीनी वाले मीठे पेय
  • इंस्टेंट नूडल्स और कुछ रेडी-टू-ईट भोजन
  • पैकेटबंद मिठाइयां, कुकीज और केक
  • कुछ प्रोसेस्ड मीट उत्पाद

हालांकि, हर पैकेटबंद या प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ एक जैसा नहीं होता। किसी उत्पाद की पोषण गुणवत्ता जानने के लिए उसके लेबल पर मौजूद चीनी, नमक, संतृप्त वसा और फाइबर की मात्रा देखना उपयोगी है।

सेहत पर कैसे पड़ सकता है असर?

कई अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में कैलोरी, नमक, चीनी या संतृप्त वसा अधिक हो सकती है, जबकि फाइबर और कुछ जरूरी पोषक तत्व कम हो सकते हैं। इन्हें बार-बार खाने से संतुलित भोजन की जगह कम पौष्टिक विकल्प लेने की आदत बन सकती है।

कुछ खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले एडिटिव्स और प्रोसेसिंग के दौरान बनने वाले यौगिकों के संभावित प्रभावों पर भी शोध किया जा रहा है। वैज्ञानिक आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों, शरीर में सूजन और इंसुलिन के काम करने की प्रक्रिया जैसे पहलुओं का अध्ययन कर रहे हैं। हालांकि, सभी उत्पादों और सभी एडिटिव्स के प्रभाव एक जैसे नहीं होते और इनके बारे में अभी भी शोध जारी है।

जंक फूड कम करने के लिए क्या करें?

अपनी रोजमर्रा की डाइट में छोटे बदलाव करके अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर निर्भरता कम की जा सकती है। इसके लिए फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, मेवे और घर पर तैयार संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें।

  • प्यास लगने पर मीठे पेय के बजाय पानी चुनें।
  • पैकेटबंद स्नैक्स की जगह फल या बिना ज्यादा नमक वाले मेवे खाएं।
  • इंस्टेंट भोजन के बजाय ताजी सामग्री से तैयार खाना अधिक चुनें।
  • खरीदारी करते समय खाद्य पदार्थों के लेबल पर चीनी, नमक और संतृप्त वसा की मात्रा देखें।
  • जंक फूड को रोजाना की आदत बनाने के बजाय कभी-कभार और सीमित मात्रा में लें।

निष्कर्ष: स्वाद के लिए कभी-कभार जंक फूड खाना और रोजाना इसे अपनी डाइट का बड़ा हिस्सा बना लेना अलग बातें हैं। सेहत के लिए किसी एक खाद्य पदार्थ पर ध्यान देने के बजाय पूरी डाइट की गुणवत्ता, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और अन्य जीवनशैली संबंधी आदतों पर ध्यान देना जरूरी है।

सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। रिपोर्ट में बताए गए जोखिम संबंधों को बीमारी का निश्चित कारण या व्यक्तिगत भविष्यवाणी न मानें। अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर या योग्य आहार विशेषज्ञ से सलाह लें।

contact.satyareport@gmail.com

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