उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की 12 सीटों पर एक बार फिर चुनाव होगा. इन सीटों पर चुने गए सदस्यों का कार्यकाल 30 जनवरी 2027 को समाप्त हो रहा है. चुनाव आयोग विधानसभा चुनाव से पहले नवंबरदिसंबर में इन सीटों के लिए चुनाव करा सकता है. इन चुनावों में विधायक मतदान करके विधान परिषद के सदस्यों को चुनेंगे. मौजूदा समय में 12 में से 11 सीटें बीजेपी के पास हैं, जबकि एक सीट सपा के पास है.

इस चुनाव में सबसे बड़ा बदलाव विधानसभा में बीजेपी और समाजवादी पार्टी की मौजूदा संख्या के कारण दिखाई दे सकता है. जनवरी 2021 में हुए पिछले चुनाव में बीजेपी ने 12 में से 10 सीटें जीती थीं, जबकि समाजवादी पार्टी को दो सीट मिली थी, लेकिन मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर अनुमान है कि बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को 8 से 9 और सपा को 3 से 4 सीटें मिल सकती हैं. इस हिसाब से एनडीए की दो से तीन सीट घटने और सपा की दो से तीन सीट बढ़ने की संभावना है.
2021 में बीजेपी ने जीती थीं 10 सीटें
विधान परिषद की इन 12 सीटों पर जनवरी 2021 में चुनाव हुआ था. उस समय बीजेपी के पास विधानसभा में 304 विधायक थे, जबकि समाजवादी पार्टी के विधायकों की संख्या 47 थी. चुनाव में बीजेपी ने 10 सीटों पर जीत दर्ज की थी और सपा को दो सीट मिली थी. बीजेपी से तत्कालीन उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा, तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, पूर्व IAS अरविंद शर्मा, लक्ष्मण आचार्य, बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष कुंवर मानवेंद्र सिंह, प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ला, अश्विनी त्यागी, सलिल विश्नोई, धर्मवीर प्रजापति और सुरेन्द्र चौधरी MLC बने थे.
सपा से विधान परिषद दल के नेता अहमद हसन और राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी भी विधान परिषद के लिए निर्वाचित हुए थे. बाद में अहमद हसन का निधन हो गया था, जिनकी जगह पर बीजेपी ने धर्मेंद्र सेंथवार को MLC बनाया था. वहीं लक्ष्मण आचार्य सिक्किम के राज्यपाल बनाए गए थे, जिसकी वजह से उनकी जगह पर पद्मसेन चौधरी को MLC बनाया गया था. दिनेश शर्मा को जब राज्यसभा भेजा गया तो उनकी जगह पर दारा सिंह चौहान को एमएलसी बनाया गया था. इस तरह बीजेपी के 11 एमएलसी हो गए थे.
किसे कितनी सीट मिल सकती है?
सभी निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल छह साल का है. अब विधानसभा में बीजेपी के पास 256 विधायक हैं, जबकि सपा के पास 101 विधायक हैं. एनडीए की सहयोगी पार्टियों और अन्य समर्थक विधायकों को जोड़ने पर सत्तारूढ़ गठबंधन की प्रभावी संख्या करीब 294 मानी जा रही है. इसी बदली हुई संख्या के आधार पर आगामी चुनाव में एनडीए को 8 से 9 और सपा को 3 से 4 सीटें मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है.
इन नेताओं का कार्यकाल होगा खत्म
30 जनवरी 2027 को जिन 12 एमएलसी सीटों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें 11 सीटें बीजेपी और एक सीट सपा के खाते में है. बीजेपी के मौजूदा सदस्यों में स्वतंत्र देव सिंह, अरविंद कुमार शर्मा, कुंवर मानवेंद्र सिंह, गोविंद नारायण शुक्ला, सलिल विश्नोई, अश्वनी त्यागी, धर्मवीर प्रजापति, सुरेंद्र चौधरी, धर्मेंद्र सेंथवार, पद्मसेन चौधरी और दारा सिंह चौहान शामिल हैं. सपा की ओर से राजेंद्र चौधरी का कार्यकाल समाप्त होगा.
सपा के लिए सीट बढ़ाने का मौका
समाजवादी पार्टी के लिए यह चुनाव विधान परिषद में अपनी संख्या बढ़ाने का मौका है. 2021 में दो सीट जीतने वाली सपा को इस बार तीन से चार सीटें मिलने का अनुमान है. विधानसभा सदस्यों द्वारा चुनी जाने वाली इन 12 एमएलसी सीटों के लिए चुनाव नवंबरदिसंबर 2026 में होने की संभावना जताई जा रही है. कार्यकाल जनवरी 2027 के अंत में समाप्त होना है, इसलिए चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले कराए जा सकते हैं.



