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डॉक्टर​​​​​​ ने मृत घोषित किया, 5 घंटे बाद मुर्दाघर में जिंदा मिला 18 महीने का बच्चा, मां को मिली खबर तो नहीं रहा खुशी का ठिकाना!

डॉक्टर​​​​​​ ने मृत घोषित किया, 5 घंटे बाद मुर्दाघर में जिंदा मिला 18 महीने का बच्चा, मां को मिली खबर तो नहीं रहा खुशी का ठिकाना!

एरिजोना, अमेरिका: जिस मां को लगा कि उसने अपने 18 महीने के बेटे को हमेशा के लिए खो दिया है, उसे करीब पांच घंटे बाद ऐसी खबर मिली जिसने उसकी दुनिया बदल दी। स्विमिंग पूल में डूबने के बाद बच्चे को अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था। परिवार गहरे सदमे में था, लेकिन इसके कुछ घंटे बाद मुर्दाघर में बच्चे के जिंदा होने के संकेत मिले। इसके बाद उसे तुरंत दोबारा इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, बच्चे की जान बचने के बावजूद उसकी गंभीर हालत ने परिवार की चिंता बढ़ा दी है।

यह मामला अमेरिका के एरिजोना का है, जहां एलेक्सस फियोर्डिलिनो के 18 महीने के बेटे विंसेंट लोरेंजो फियोर्डिलिनो के साथ यह घटना हुई। बच्चा घर के स्विमिंग पूल में डूब गया था। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मां को लगा कि अब वह अपने बेटे को कभी अपनी गोद में नहीं ले पाएगी।

बेटे को आखिरी बार गले लगाते समय मां को हुआ था शक

एलेक्सस ने NBC न्यूज को दिए इंटरव्यू में उस दर्दनाक पल को याद किया, जब वह अपने बेटे को आखिरी बार गले लगा रही थीं। उनके मुताबिक, उस समय उन्हें लगा कि बच्चे की सांसें चल रही हैं, लेकिन डॉक्टर ने इसे उसकी आखिरी सांस बताया।

मां के अनुसार, डॉक्टर ने उन्हें समझाया था कि बच्चे को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा चुका है और आगे इलाज जारी रखने से उसे तकलीफ हो सकती है। ऐसे में परिवार ने मान लिया कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। जिस बच्चे को कुछ समय पहले तक वे अपने साथ देख रहे थे, उसे खोने का दुख पूरे परिवार पर टूट पड़ा।

पांच घंटे बाद पुलिस के फोन ने बदल दी पूरी कहानी

बच्चे को मृत घोषित किए जाने के करीब पांच घंटे बाद परिवार को ऐसी जानकारी मिली, जिस पर यकीन करना मुश्किल था। पुलिस बच्चे के पूल में डूबने की घटना की जांच कर रही थी और इसी दौरान एक डिटेक्टिव ने माता-पिता को बताया कि उनका बेटा जिंदा है।

दरअसल, मेडिकल एग्जामिनर के कार्यालय का एक कर्मचारी बच्चे को लेने के लिए अस्पताल के मुर्दाघर पहुंचा था। वहां उसे बच्चे में सांस चलने के संकेत दिखाई दिए। इसके बाद तुरंत मेडिकल सहायता की व्यवस्था की गई और विंसेंट को दूसरे अस्पताल ले जाया गया।

एलेक्सस ने बताया कि बेटे के जिंदा होने की खबर सुनकर वह और उनके पति रो पड़े और राहत में चीख उठे। कुछ घंटे पहले जिस बच्चे को वे खो चुका मान रहे थे, उसके जीवित होने की जानकारी ने उन्हें गहरे सदमे के बीच उम्मीद दी।

पुलिस अधिकारियों ने भी जताई थी चिंता

इस मामले में डॉक्टर की शुरुआती जांच को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दो पुलिस अधिकारियों ने भी बच्चे को मृत घोषित किए जाने से पहले उसमें जीवन के संकेत देखने की बात कही थी। पुलिस रिपोर्ट में दावा किया गया कि अधिकारियों ने इस बारे में डॉक्टर का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की थी।

आरोप है कि डॉक्टर आर्यन तूसी ने अधिकारियों की बात को स्वीकार नहीं किया। रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टर ने एक अधिकारी से कहा था कि वह अपना काम जानते हैं। हालांकि, ये आरोप हैं और मामले की पूरी जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

डॉक्टर के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल बच्चे और उसके परिवार के बारे में सोच रहे हैं और विंसेंट के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं।

जान तो बच गई, लेकिन बच्चे को गंभीर चोटें आईं

विंसेंट के जिंदा मिलने से परिवार को राहत जरूर मिली, लेकिन उसकी सेहत को लेकर चिंता अभी भी बनी हुई है। परिवार के वकील जॉन ब्रेवर के मुताबिक, बच्चे को गंभीर दिमागी चोट पहुंची है। उसे निगलने में परेशानी होती है और दौरे भी पड़ते हैं। वकील के अनुसार, बच्चा फिलहाल खुद से बैठने या रेंगने में भी सक्षम नहीं है।

परिवार ने बताया कि बच्चे के फेफड़ों को ठीक होने में समय लग रहा है और उसे सांस लेने में मदद के लिए वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है। डॉक्टर उसकी हालत पर लगातार नजर रख रहे हैं और इलाज जारी है।

इस घटना ने परिवार को एक तरफ अपने बच्चे के जीवित बचने की खुशी दी, तो दूसरी तरफ उसके लंबे इलाज और रिकवरी की चिंता भी सामने ला दी।

माता-पिता के खिलाफ कार्रवाई की भी हुई थी चर्चा

बच्चे के स्विमिंग पूल में डूबने के बाद पुलिस ने माता-पिता की भूमिका की भी जांच की थी। पुलिस रिपोर्ट में घर में गांजे जैसी गंध मिलने और बच्चे की निगरानी को लेकर संदेह जताए जाने का उल्लेख था। रिपोर्ट के मुताबिक, माता-पिता ने हादसे की सुबह गांजे का सेवन करने की बात स्वीकार की थी।

शुरुआती जांच के दौरान लापरवाही से जुड़े आरोप लगाने की सिफारिश की गई थी। हालांकि, मैरिकोपा काउंटी की अटॉर्नी रेचल मिशेल ने बाद में घोषणा की कि माता-पिता के खिलाफ आरोप नहीं लगाए जाएंगे। जांच के दौरान सामने आए इन तथ्यों को माता-पिता की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

अस्पताल और डॉक्टर के खिलाफ शिकायत की तैयारी

परिवार के वकील जॉन ब्रेवर ने NBC न्यूज को बताया कि वह अस्पताल और डॉक्टर के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। परिवार इस बात के जवाब चाहता है कि बच्चे को मृत कैसे घोषित किया गया, जबकि बाद में उसमें जीवन के संकेत मिले।

दूसरी ओर, डॉक्टर के वकील स्कॉट होल्डन ने कहा कि डॉक्टर बच्चे के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं। अस्पताल ने घटना को बेहद दुखद बताया, लेकिन मरीज की निजता का हवाला देते हुए इलाज से संबंधित जानकारी पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

इस मामले में जांच और शिकायत की प्रक्रिया के जरिए ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के दौरान क्या हुआ था और क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई।

इलाज के खर्च के लिए परिवार जुटा रहा मदद

विंसेंट के इलाज और रिकवरी के खर्च को पूरा करने के लिए परिवार ने ऑनलाइन आर्थिक सहायता जुटाने की मुहिम भी शुरू की। परिवार ने 28 हजार डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उस समय तक करीब 25,751 डॉलर की मदद जमा हो चुकी थी।

मां के लिए यह घटना जिंदगी का ऐसा अनुभव बन गई है, जिसे भूल पाना आसान नहीं होगा। जिस दिन उन्हें लगा कि उनका बेटा हमेशा के लिए चला गया, उसी दिन उसके जिंदा होने की खबर भी मिली। अब परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि विंसेंट की हालत में सुधार हो और वह धीरे-धीरे बेहतर हो सके।

सत्‍य रिपोर्ट की बात: यह घटना अस्पताल में मृत्यु की पुष्टि की प्रक्रिया, आपातकालीन चिकित्सा और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल उठाती है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट उपलब्ध मीडिया जानकारी पर आधारित है। मामले से जुड़े आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की गई है।

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