
अक्सर लोग मानते हैं कि अगर ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की रिपोर्ट सामान्य है, तो दिल की सेहत को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। लेकिन कुछ मामलों में सामान्य रिपोर्ट के बावजूद भी हार्ट अटैक का जोखिम बना रह सकता है। इसकी एक वजह लिपोप्रोटीन(a), यानी Lp(a) का बढ़ा हुआ स्तर हो सकता है। यह खून में मौजूद एक प्रकार का लिपोप्रोटीन है, जिसका उच्च स्तर हृदय रोग और स्ट्रोक के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा है।
क्या है लिपोप्रोटीन(a)?
लिपोप्रोटीन(a) को संक्षेप में Lp(a) कहा जाता है। यह LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल की तरह खून में कोलेस्ट्रॉल ले जाने वाला कण है, लेकिन इसमें एक अतिरिक्त प्रोटीन भी जुड़ा होता है। इसका स्तर अधिक होने पर धमनियों में प्लाक बनने और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
इसकी खास बात यह है कि इसका स्तर काफी हद तक आनुवंशिक यानी जेनेटिक कारणों से तय होता है। इसलिए दुबले-पतले, फिट रहने वाले और नियमित व्यायाम करने वाले लोगों में भी Lp(a) का स्तर बढ़ा हुआ मिल सकता है।
सामान्य लिपिड प्रोफाइल में क्यों नहीं दिखता इसका स्तर?
रूटीन लिपिड प्रोफाइल में आमतौर पर कुल कोलेस्ट्रॉल, LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स की जांच की जाती है। Lp(a) का स्तर जानने के लिए अलग ब्लड टेस्ट की जरूरत होती है।
इसी वजह से कुछ लोगों में सामान्य लिपिड प्रोफाइल होने के बावजूद हृदय रोग का जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता। हालांकि, हार्ट अटैक के पीछे कई कारण हो सकते हैं और केवल Lp(a) ही इसकी वजह नहीं है।
जिंदगी में एक बार Lp(a) टेस्ट कराने पर विचार क्यों करें?
कई हृदय रोग संबंधी दिशानिर्देश वयस्कों में जीवनकाल में कम से कम एक बार Lp(a) की जांच पर विचार करने की सलाह देते हैं। खासकर उन लोगों के लिए यह जांच उपयोगी हो सकती है, जिनके परिवार में कम उम्र में हृदय रोग हुआ हो या जिन्हें बिना स्पष्ट कारण के हृदय संबंधी समस्या का सामना करना पड़ा हो।
इसका स्तर आमतौर पर वयस्क जीवन में अपेक्षाकृत स्थिर रहता है, इसलिए हर व्यक्ति को बार-बार जांच कराने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, दोबारा जांच की आवश्यकता व्यक्ति की स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर कर सकती है।
रिपोर्ट में कितना स्तर चिंता का विषय हो सकता है?
Lp(a) की रिपोर्ट को समझते समय उसकी यूनिट और संबंधित लैब की संदर्भ सीमा देखना जरूरी है। सामान्य तौर पर:
- 30 mg/dL से कम: इसे अक्सर अपेक्षाकृत कम स्तर माना जाता है।
- 30 से 50 mg/dL: इस दायरे को व्यक्ति के अन्य जोखिम कारकों के साथ देखकर समझा जाता है।
- 50 mg/dL या उससे अधिक: कई दिशानिर्देशों में इसे हृदय रोग के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा स्तर माना जाता है।
ध्यान रखें कि mg/dL और nmol/L अलग-अलग इकाइयां हैं। इनके बीच एक निश्चित रूपांतरण हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होता। इसलिए रिपोर्ट की व्याख्या डॉक्टर से कराना बेहतर है।
अगर Lp(a) बढ़ा हुआ मिले तो क्या करें?
Lp(a) का स्तर बढ़ा हुआ आने पर घबराने के बजाय अपने डॉक्टर से हृदय रोग के कुल जोखिम का आकलन कराएं। कुछ जरूरी कदम ये हो सकते हैं:
- LDL कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें: डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार LDL या ApoB जैसे अन्य संकेतकों को कम करने की रणनीति बता सकते हैं।
- ब्लड प्रेशर और शुगर पर ध्यान दें: इनका नियंत्रण हृदय रोग के जोखिम को घटाने में मदद करता है।
- धूम्रपान से दूर रहें: तंबाकू का सेवन हृदय और रक्त वाहिकाओं के लिए नुकसानदायक है।
- नियमित शारीरिक गतिविधि करें: अपनी क्षमता के अनुसार तेज चाल से चलना और सप्ताह में कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम करना उपयोगी हो सकता है।
- संतुलित भोजन और पर्याप्त नींद लें: सब्जियां, फल, साबुत अनाज और उपयुक्त मात्रा में प्रोटीन को आहार में शामिल करें।
जीवनशैली में बदलाव Lp(a) के स्तर को बहुत अधिक कम नहीं कर सकते, क्योंकि यह काफी हद तक आनुवंशिक होता है। फिर भी दूसरे जोखिम कारकों को नियंत्रित करना बेहद महत्वपूर्ण है। कुछ विशेष उपचारों पर शोध जारी है; दवा का चुनाव डॉक्टर व्यक्ति की पूरी मेडिकल स्थिति देखकर करते हैं।
हार्ट अटैक के लक्षणों को नजरअंदाज न करें
सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, मतली या दर्द का हाथ, पीठ, गर्दन अथवा जबड़े तक फैलना हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं। कुछ लोगों में लक्षण हल्के या असामान्य भी हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर जांच की रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है, व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं। Lp(a) की जांच की जरूरत और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए डॉक्टर से परामर्श करें।



