
शारजाह, यूएई: किस्मत कब और कैसे बदल जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में पिछले 33 साल से रह रहे भारतीय प्रवासी किशोर पांडुरंग राव के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। महज 50 दिरहम का लॉटरी टिकट खरीदने वाले राव ने 50 लाख दिरहम यानी करीब 12.95 करोड़ रुपये का इनाम जीत लिया। यह खुशखबरी उन्हें अपने 60वें जन्मदिन के आसपास मिली, जिससे उनके लिए यह मौका और भी खास बन गया। अब वह इस रकम से परिवार का भविष्य बेहतर बनाने, पत्नी के साथ दुनिया घूमने और यूएई का गोल्डन वीजा हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।
खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राव को लॉटरी जीतने की जानकारी ईमेल के जरिए मिली। शुरुआत में उन्हें लगा कि यह कोई सामान्य संदेश होगा, लेकिन जब उन्होंने उसे ध्यान से पढ़ा तो पता चला कि उन्होंने बड़ी रकम जीत ली है। इसके बावजूद उन्हें तुरंत यकीन नहीं हुआ। उन्होंने समाचार रिपोर्ट में अपना नाम देखा और फिर अपने लॉटरी अकाउंट में नतीजे की दोबारा जांच की। इसके बाद उन्हें अपनी जीत पर भरोसा हुआ।
50 दिरहम के टिकट से जीते 50 लाख दिरहम
किशोर पांडुरंग राव ने 3 अक्टूबर को आयोजित लकी डे ड्रॉ में हिस्सा लिया था। उन्होंने यूएई लॉटरी के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से 50 दिरहम का टिकट खरीदा और नंबर चुनने के लिए ‘ईजी पिक’ विकल्प का इस्तेमाल किया। इस विकल्प में नंबर खिलाड़ी खुद चुनने के बजाय सिस्टम के जरिए प्राप्त करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, राव ने ड्रॉ के ‘डेज’ सेक्शन के सभी छह नंबरों का सही मिलान किया। इसके चलते उन्होंने 50 लाख दिरहम का दूसरा पुरस्कार जीत लिया। भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत करीब 12.95 करोड़ रुपये बताई गई है।
हालांकि, सबसे बड़े जैकपॉट की रकम उनके हाथ नहीं लगी। वह 3 करोड़ दिरहम के जैकपॉट से केवल एक नंबर के अंतर से चूक गए। इसके बावजूद 50 लाख दिरहम की जीत ने उनकी जिंदगी के लिए नई संभावनाएं खोल दीं।
60वें जन्मदिन के आसपास मिली खुशखबरी
राव के लिए यह जीत इसलिए भी यादगार है, क्योंकि अक्टूबर में उनका 60वां जन्मदिन था। इसी अवधि में उन्हें करोड़ों रुपये जीतने की खबर मिली। शुरुआत में उन्होंने इस बात को समझने और पुष्टि करने के लिए समय लिया। बाद में जब उन्होंने अपनी पत्नी को बताया, तो परिवार की खुशी और बढ़ गई।
राव के लिए यह रकम केवल आर्थिक लाभ नहीं है। वह इसे अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने और भविष्य की योजनाओं को बेहतर ढंग से पूरा करने का अवसर मानते हैं।
परिवार को साथ रखना है सबसे बड़ा लक्ष्य
राव ने बताया कि वह इस रकम का इस्तेमाल केवल अपनी सुख-सुविधाओं के लिए नहीं करना चाहते। उनकी प्राथमिकता परिवार के लिए बेहतर भविष्य तैयार करना है। काम और अन्य जिम्मेदारियों के कारण उन्हें लंबे समय तक परिवार से दूर भी रहना पड़ा है। अब वह चाहते हैं कि पत्नी और बच्चों के साथ ज्यादा समय बिता सकें।
उनके मुताबिक, जीवन में मुश्किल दौर आते रहते हैं और ऐसे समय में जीवनसाथी का सहयोग बहुत मायने रखता है। अब आर्थिक स्थिति बेहतर होने से उन्हें परिवार के साथ नई योजनाएं बनाने का मौका मिला है।
बड़े बेटे को कारोबार और छोटे को पढ़ाई में मदद
लॉटरी जीतने के बाद राव ने अपने दोनों बेटों के भविष्य को लेकर भी योजनाएं बनाई हैं। वह चाहते हैं कि उनका बड़ा बेटा अपना कारोबार शुरू कर सके और इसके लिए जरूरत पड़ने पर उसे आर्थिक मदद मिले।
वहीं, छोटे बेटे की पढ़ाई भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। वह चाहते हैं कि बेटे को आगे की शिक्षा हासिल करने के लिए अच्छे अवसर मिलें और आर्थिक परेशानियां उसके रास्ते में बाधा न बनें।
राव की योजनाओं से साफ है कि वह इस रकम को परिवार की जरूरतों और बच्चों के भविष्य को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रहे हैं।
1993 में पहुंचे थे यूएई, अब गोल्डन वीजा की तैयारी
किशोर पांडुरंग राव पहली बार साल 1993 में यूएई पहुंचे थे। तब से तीन दशक से अधिक समय बीत चुका है। इस दौरान उन्होंने दुबई, अजमान, शारजाह और अबू धाबी जैसे शहरों में समय बिताया। यूएई लंबे समय से उनके जीवन और कामकाज का अहम हिस्सा रहा है।
अब वह यहां अपना एक पुराना सपना पूरा करना चाहते हैं—गोल्डन वीजा हासिल करना। राव के मुताबिक, वह लंबे समय से इस बारे में सोच रहे थे और दोस्तों से भी चर्चा करते थे कि एक दिन इसके लिए कोशिश करेंगे।
हालांकि, लॉटरी जीतने से गोल्डन वीजा अपने आप नहीं मिलता। इसके लिए यूएई के निर्धारित नियमों और पात्रता की शर्तों को पूरा करना जरूरी है। ऐसे में राव को आवेदन की संबंधित श्रेणी के मुताबिक आवश्यक योग्यताओं की पुष्टि करनी होगी।
पत्नी के साथ दुनिया घूमने का सपना
राव और उनकी पत्नी की इच्छा दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा करने की भी है। दोनों लंबे समय से कुछ खास जगहों पर जाने का सपना देख रहे थे। अब इस जीत से उन्हें उम्मीद है कि वे अपनी योजनाओं को हकीकत में बदल सकेंगे और साथ में नई यादें बना पाएंगे।
राव के लिए यह समय परिवार के साथ भविष्य तय करने और उन इच्छाओं को पूरा करने का अवसर है, जिन्हें वह लंबे समय से टालते आए थे।
लॉटरी खेलने वालों को दी खर्च पर नियंत्रण रखने की सलाह
करोड़ों रुपये जीतने के बाद राव ने लॉटरी खेलने वाले दूसरे लोगों के लिए भी एक अहम संदेश दिया। उन्होंने सलाह दी कि लोग अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार ही टिकट खरीदें और पहले से तय कर लें कि वे इस पर कितना खर्च कर सकते हैं।
लॉटरी में जीत की कोई गारंटी नहीं होती। इसलिए इसे नियमित कमाई या आर्थिक समस्याओं से छुटकारा पाने का पक्का तरीका नहीं समझना चाहिए। जरूरत से ज्यादा पैसा खर्च करने से नुकसान हो सकता है।
किशोर पांडुरंग राव की कहानी में किस्मत ने बड़ी भूमिका निभाई, लेकिन उनकी आगे की योजनाओं में परिवार, बच्चों की शिक्षा और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता मिलती दिख रही है। 60वें जन्मदिन के आसपास मिली यह जीत उनके लिए एक नई शुरुआत का अवसर बन गई है।
सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख खलीज टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। लॉटरी में जीत संयोग पर निर्भर करती है और इससे किसी व्यक्ति को भविष्य में जीतने की गारंटी नहीं मिलती।



