
नई दिल्ली: सस्ती दवाइयां दिलाने का लालच देकर ग्रामीणों की आधार और बायोमेट्रिक जानकारी जुटाने के कथित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट को इस मामले का पता उस समय चला, जब टीम 1.64 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े एक मामले की जांच कर रही थी। इस सिलसिले में पुलिस ने उत्तर प्रदेश के मथुरा से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
दवाओं के नाम पर जुटाई जा रही थी जानकारी
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों पर ग्रामीणों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने का लालच देकर उनकी आधार संबंधी और बायोमेट्रिक जानकारी जुटाने का आरोप है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस जानकारी का इस्तेमाल साइबर अपराध में किया जा सकता था।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि कितने लोगों का डेटा जुटाया गया और गिरफ्तार आरोपियों ने कथित तौर पर इसका इस्तेमाल किस तरह किया। पुलिस इन पहलुओं की जांच कर रही है।
1.64 करोड़ रुपये की ठगी की जांच में मिला सुराग
पुलिस की IFSO यूनिट डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1.64 करोड़ रुपये की कथित साइबर ठगी के मामले की जांच कर रही थी। इसी दौरान आधार और बायोमेट्रिक डेटा जुटाने से जुड़े नेटवर्क के बारे में जानकारी सामने आई।
जांच के आधार पर पुलिस ने मथुरा से दो लोगों को गिरफ्तार किया। अब जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कथित नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था, डेटा कहां भेजा जाता था और इसका इस्तेमाल किन वित्तीय लेनदेन या साइबर गतिविधियों में हुआ।
आधार और बायोमेट्रिक जानकारी साझा करते समय रहें सतर्क
इस मामले के सामने आने के बाद लोगों के लिए यह जरूरी है कि वे किसी अनजान व्यक्ति या संस्था को दवाइयों, सरकारी लाभ अथवा किसी अन्य सुविधा का लालच मिलने पर अपनी संवेदनशील पहचान संबंधी जानकारी न दें। किसी भी सेवा के लिए आधार या बायोमेट्रिक सत्यापन कराने से पहले संबंधित संस्था की विश्वसनीयता और प्रक्रिया की पुष्टि करना जरूरी है।
सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और कथित नेटवर्क की भूमिका की पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगी।



