
एक तरफ पुलिस की वर्दी पहनकर लोगों का भरोसा जीतने वाला शख्स था, तो दूसरी तरफ तंत्र-मंत्र और चमत्कारों के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाने वाली एक महिला। दोनों के काम करने के तरीके अलग थे, लेकिन आरोप है कि उनका मकसद लोगों से मोटी रकम वसूलना था। जब एक युवती को अपने मंगेतर की असलियत पर शक हुआ और उसने पड़ताल शुरू की, तो ऐसा मामला सामने आया जिसने कई लोगों को ठगी का शिकार बनाए जाने की कहानी उजागर कर दी।
मंगेतर की वर्दी पर हुआ शक, फिर खुलने लगी पोल
इस मामले की शुरुआत एक युवती की सगाई से जुड़ी थी। उसका मंगेतर खुद को पुलिस अधिकारी बताता था। वह कभी सहायक उपनिरीक्षक तो कभी उपनिरीक्षक होने का दावा करता और वर्दी पहनकर उससे मिलने पहुंचता था।
आरोप है कि सगाई के दौरान उसने युवती से करीब आठ लाख रुपये लिए और एक दोपहिया वाहन भी हासिल कर लिया। शुरुआत में युवती को उसकी बातों पर भरोसा रहा, लेकिन समय के साथ उसे उसकी नौकरी को लेकर संदेह होने लगा।
जब उसने अपने परिवार की मदद से जानकारी जुटाई, तो पता चला कि जिस व्यक्ति को वह पुलिस अधिकारी समझ रही थी, उसके पुलिस विभाग में कार्यरत होने की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद युवती ने शिकायत दर्ज कराई और मामले की जांच शुरू हुई।
नकली पहचान के सहारे लोगों को बनाता था निशाना
जांच के दौरान सामने आए आरोपों के मुताबिक, आरोपी ने पुलिस अधिकारी का रूप धारण करने के लिए नकली पहचान पत्र और वर्दी का सहारा लिया था। वह अपनी कथित सरकारी पहचान के जरिए लोगों का विश्वास जीतता और नौकरी दिलाने या पदोन्नति कराने का लालच देकर उनसे पैसे मांगता था।
इस तरह उसकी पहुंच केवल एक युवती तक सीमित नहीं रही। आरोप है कि उसने अलग-अलग लोगों को अपने झांसे में लेकर रकम वसूली। पुलिस की वर्दी और पद का दिखावा उसके लिए लोगों को प्रभावित करने का जरिया बन गया था।
तंत्र-मंत्र और नोटों की बारिश का झांसा
इस ठगी के मामले में एक अन्य आरोपी भी सामने आया, जो खुद को पुरुष तांत्रिक के रूप में पेश करता था। बाद में उसकी पहचान एक महिला के रूप में होने की बात सामने आई। वह कथित तौर पर कई वर्षों से अलग-अलग स्थानों पर तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसा रही थी।
आरोप था कि लोगों को पूजा-पाठ, विशेष अनुष्ठान और नोटों की बारिश जैसे चमत्कारों का लालच दिया जाता था। उन्हें विश्वास दिलाया जाता कि धार्मिक क्रियाओं के जरिए उनकी आर्थिक परेशानियां दूर हो सकती हैं और बड़ी रकम प्राप्त हो सकती है।
इस कथित नेटवर्क में कुछ अन्य सहयोगियों की भूमिका भी सामने आई। बताया गया कि लोगों को डराने और अनुष्ठानों को रहस्यमय दिखाने के लिए सुनसान स्थानों तथा श्मशान जैसी जगहों का इस्तेमाल किया जाता था। इसके बाद उनसे पैसे ऐंठे जाने के आरोप लगे।
युवतियों को भी बनाया गया निशाना
पुलिस जांच में आरोपी के खिलाफ महिलाओं को धोखे में रखने और गंभीर अपराधों से जुड़े आरोप भी सामने आने की बात कही गई। यह भी आरोप था कि तांत्रिक के संपर्क में आने वाली कुछ युवतियों को आरोपी की ऊंची पुलिस पदस्थापना और भविष्य में बड़े अधिकारी बनने की झूठी कहानी सुनाई जाती थी।
इस तरह सरकारी पद, प्रभाव और चमत्कारों के दावों को मिलाकर लोगों को भरोसे में लेने की कोशिश की जाती थी। हालांकि, प्रत्येक आरोप की पुष्टि संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही की जा सकती है।
शिकायत के बाद खुला कथित नेटवर्क
युवती की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की पड़ताल शुरू की। जांच के दौरान आरोपियों के संपर्कों, कथित ठगी के तरीकों और उनसे जुड़ी अन्य शिकायतों की जानकारी जुटाई गई। एक आश्रमनुमा स्थान की तलाशी में अनुष्ठानों में इस्तेमाल होने वाली कुछ सामग्री मिलने की बात भी सामने आई।
मामले ने यह सवाल खड़ा किया कि आखिर नकली पहचान, सरकारी नौकरी का लालच और चमत्कारों के दावों पर भरोसा करके लोग अपनी मेहनत की कमाई कैसे गंवा बैठते हैं। ऐसे मामलों में किसी की वर्दी, पद या चमत्कारी शक्तियों के दावे को बिना जांचे स्वीकार करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
सत्यमेव रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख पहले प्रकाशित घटना पर आधारित पुनर्लेखन है। इसमें शामिल आरोपों को न्यायालय द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। मामले की अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायिक निर्णयों पर निर्भर करती है।



