उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में गुलाब जल बनाने की आड़ में कथित तौर पर नशीला पदार्थ तैयार करने की फैक्ट्री पर कार्रवाई हुई. यह कार्रवाई राजस्व खुफिया निदेशालय ने की है. खबरों के मुताबिक, परिसर में टीनशेड के नीचे गुलाब जल बनाने का काम दिखाया जा रहा था. छापे के दौरान एजेंसियों को वहां मेफेड्रोन नशीला पदार्थ और उसे तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री मिली. बरामद सामग्री की कीमत 200 करोड़ रुपये बताई गयी है. यहां से एजेंसी तैयार माल, अधबना पदार्थ, रसायन और उपकरण आदि जब्त किया है.

आइए, इसी बहाने समझते हैं कि आखिर क्या है मेफेड्रोन ड्रग, जो गुलाब जल की आड़ में बनाई जा रही थी? कैसे यह सेहत के साथ खिलवाड़ कर सकती है?
क्या है मेफेड्रोन?
मेफेड्रोन एक कृत्रिम यानी लैब में बनाया जाने वाला नशीला पदार्थ है. इसे 4मिथाइल मेथ कैथिनोन या 4MMC भी कहा जाता है. इसका रासायनिक सूत्र C₁₁H₁₅NO है. इसे मीआउ मीआउ, ड्रोन और एमकैट जैसे नामों से भी जाना जाता है. यह सिंथेटिक ड्रग है. इसका असर व्यक्ति के मस्तिष्क और शरीर पर पड़ता है. यह उत्तेजना, बेचैनी और जागे रहने की भावना पैदा कर सकता है. हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता. मात्रा, शरीर की स्थिति और दूसरी दवाओं या पदार्थों के साथ सेवन से जोखिम बदल सकता है.
मेफेड्रोन का सेवन सुरक्षित नहीं माना जाता. इससे दिल की धड़कन तेज होना, रक्तचाप बढ़ना, शरीर का तापमान बढ़ना, घबराहट, भ्रम, नींद न आना और व्यवहार में बदलाव जैसे प्रभाव हो सकते हैं. गंभीर स्थिति में दौरे, शरीर का अत्यधिक गर्म होना, बेहोशी या जानलेवा जटिलताएं भी हो सकती हैं. नशीले पदार्थ की वास्तविक मात्रा और शुद्धता का पता उपयोगकर्ता को अक्सर नहीं होता. इसलिए जोखिम और बढ़ जाता है.
मेफेड्रोन एक कृत्रिम यानी लैब में बनाया जाने वाला नशीला पदार्थ है.
नशे के अलावा इसका कोई उपयोग है?
मेफेड्रोन का कोई मान्य चिकित्सकीय या औद्योगिक उपयोग स्थापित नहीं है. इसे न तो स्वीकृत दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, न ही पौधों की खाद या बाथसॉल्ट के रूप में इसका कोई प्रमाणित उपयोग है. यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एण्ड क्राइम यानी संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय के मुताबिक इसे कुछ समय ऑनलाइन प्लांट फूड के नाम से बेचा गया, लेकिन यह मानव सेवन के लिए न होने का दावा था. ऐसा लेबल होना वास्तविक या वैध उपयोग का प्रमाण नहीं है. इंटरनेट पर इसे कभीकभी खाद या दूसरे गैरमानवीय उपयोगों के नाम से भी पूर्व में प्रचारित किया गया. इसका अर्थ यह नहीं कि मेफेड्रोन वास्तव में बागवानी या किसी घरेलू काम की सामग्री है.
यह दुनिया के किन हिस्सों में पाया गया है?
मेफेड्रोन का उपयोग और जब्ती अलगअलग समय पर कई क्षेत्रों में हुए हैं. यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एण्ड क्राइम ने 2010 में यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से इसके उपयोग की बढ़ती रिपोर्ट का उल्लेख किया था. बाद की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में यूरोप के कई देशों में इसके फैलाव की बात आई. ब्राजील में भी इसके सामने आने की रिपोर्ट दर्ज हुई. लेकिन केवल इस आधार पर यह नहीं कहा जा सकता है कि यह पूरी दुनिया में पाया जाता है.
क्या भारत में इसका औपचारिक उत्पादन होता है?
भारत में मेफेड्रोन के मान्य औपचारिक उत्पादन या चिकित्सकीय उपयोग का प्रमाण नहीं मिला है. भारत में मेफेड्रोन को फरवरी 2015 में एनडीपीएस एक्ट के तहत नियंत्रित पदार्थों की सूची में जरूर शामिल किया गया. इसका अर्थ यह है कि मेफेड्रोन का निर्माण, कब्जा, बिक्री या वितरण कानूनी नियंत्रण के दायरे में आता है. वैध औद्योगिक उत्पादन की पुष्टि के लिए किसी विशिष्ट सरकारी अनुमति या स्वीकृत उपयोग का प्रमाण चाहिए. अभी तक ऐसा वैध उपयोग स्थापित नहीं है.
गुलाब जल की आड़ क्यों चर्चा में है?
असल में जहां से बरामदगी हुई है, परिसर में गुलाब जल तैयार करने का काम भी दिखाया जा रहा था. आसपास के लोगों को यही बताया गया कि वहां गुलाब जल बनाया जाता है. कुछ खबरों में स्थानीय गांवों से गुलाब के फूल खरीदने और सामग्री मंगाने की बात भी कही गई है. जांच एजेंसियों का संदेह है कि इस परिचित कारोबारी गतिविधि ने वास्तविक काम को छिपाने में मदद की होगी. यह तरीका कथित तौर पर लोगों का ध्यान भटकाने के लिए अपनाया गया हो सकता है. लेकिन जांच पूरी होने और पूरे तथ्य सामने आने पर स्थिति और साफ हो सकेगी. अभी इस पूरे मामले को दावे के रूप में ही देखा जाएगा.
क्यों गंभीर है यह मामला?
इस मामले की गंभीरता केवल जब्त सामग्री की कीमत से नहीं जुड़ी है. यदि किसी गांव या खेत में बड़े पैमाने पर अवैध नशीले पदार्थ तैयार किए जा रहे थे, तो इससे स्थानीय लोगों, कामगारों और आसपास के पर्यावरण के लिए भी खतरा पैदा हो सकता था. ऐसी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों के संपर्क से स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है. अनुचित भंडारण या आग लगने की स्थिति भी जोखिम बढ़ा सकती है. पदार्थ बनाने वाले लोग, उसे ले जाने वाले लोग और बेचने वाले लोग अलगअलग हो सकते हैं. इसलिए जांच का उद्देश्य केवल परिसर में मौजूद लोगों तक सीमित नहीं रहता. एजेंसियों को कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी तलाशनी होगी. यह भी जानना होगा कि इस अवैध कारोबार की जड़ें कहाँ तक फैली हैं?
भारतीय परिवारों के सतर्क रहने का समय
मेफेड्रोन या किसी भी अज्ञात नशीले पदार्थ को आजमाना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है. दोस्तों के दबाव या किसी के भी प्रभाव में नशीले पदार्थ का इस्तेमाल घातक हैं. यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है. पूरी दुनिया में इसे लेकर सतर्कता बरती जा रही है. ऐसे में भारतीय परिवारों की जिम्मेदारी भी बढ़ती है. यह मसला केवल सरकारी एजेंसियों से हल नहीं होने वाला. परिवार और समुदाय भी जागरूकता में भूमिका निभा सकते हैं. बच्चों और युवाओं से बिना डराए खुलकर बात करना जरूरी है. नशे की समस्या को केवल अनुशासन या चरित्र का मुद्दा मानने के बजाय स्वास्थ्य और सुरक्षा का विषय समझना चाहिए. जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय और परामर्श सहायता लेना बेहतर है.



