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​​​​​ज्यादा प्रोटीन खाने से बिगड़ सकती है आंतों की सेहत? गट में बढ़ सकते हैं नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया, जानें कितना सेवन है सही

​​​​​ज्यादा प्रोटीन खाने से बिगड़ सकती है आंतों की सेहत? गट में बढ़ सकते हैं नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया, जानें कितना सेवन है सही

प्रोटीन को शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व माना जाता है। यह मांसपेशियों को मजबूत बनाने, हड्डियों और त्वचा के निर्माण तथा शरीर की टूट-फूट की मरम्मत में अहम भूमिका निभाता है। यही वजह है कि जिम जाने वाले और फिटनेस पर ध्यान देने वाले लोग अपनी डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जरूरत से ज्यादा प्रोटीन खाना और फाइबर का कम सेवन करना आपकी आंतों की सेहत को प्रभावित कर सकता है?

यूके के सर्जन डॉ. करण राजन ने सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी में बताया है कि जरूरत से ज्यादा प्रोटीन और कम फाइबर वाली डाइट आंतों में मौजूद बैक्टीरिया के संतुलन को प्रभावित कर सकती है। इसका असर पाचन तंत्र पर भी पड़ सकता है। आइए समझते हैं कि ज्यादा प्रोटीन और कम फाइबर का गट हेल्थ से क्या संबंध है।

ज्यादा प्रोटीन खाने से आंतों में क्या बदलाव हो सकते हैं?

जब हम प्रोटीन युक्त भोजन करते हैं, तो उसका ज्यादातर हिस्सा छोटी आंत में पचकर शरीर में अवशोषित हो जाता है। लेकिन अगर प्रोटीन का सेवन जरूरत से ज्यादा हो और भोजन में फाइबर की मात्रा कम हो, तो कुछ प्रोटीन बड़ी आंत तक पहुंच सकता है।

बड़ी आंत में मौजूद बैक्टीरिया इस प्रोटीन का फर्मेंटेशन करते हैं। सामान्य तौर पर आंतों के अच्छे बैक्टीरिया फाइबर को फर्मेंट करके शॉर्ट-चेन फैटी एसिड बनाते हैं। ये तत्व आंतों की कोशिकाओं को ऊर्जा देने और गट हेल्थ बनाए रखने में मदद करते हैं।

लेकिन जब डाइट में प्रोटीन ज्यादा और फाइबर कम होता है, तो प्रोटीन फर्मेंटेशन बढ़ सकता है। इससे आंतों में बनने वाले कुछ रासायनिक पदार्थों और बैक्टीरिया के संतुलन में बदलाव आ सकता है।

आंतों में बन सकते हैं ये पदार्थ

प्रोटीन के फर्मेंटेशन के दौरान अमोनिया, पी-क्रेसोल, इंडोल, फिनॉल और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसे पदार्थ बन सकते हैं। इनकी अधिकता आंतों के वातावरण को प्रभावित कर सकती है। कुछ परिस्थितियों में ये आंतों की सुरक्षात्मक परत पर दबाव डाल सकते हैं और सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं में भूमिका निभा सकते हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि प्रोटीन खाना नुकसानदायक है या हर हाई-प्रोटीन डाइट आंतों को खराब कर देती है। शरीर की जरूरत के अनुसार प्रोटीन लेना मांसपेशियों के निर्माण और मरम्मत के लिए जरूरी है। समस्या तब हो सकती है जब डाइट में पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ जाए।

रोजाना कितना प्रोटीन लेना चाहिए?

प्रोटीन की जरूरत हर व्यक्ति के लिए एक जैसी नहीं होती। यह उम्र, वजन, शारीरिक गतिविधि, स्वास्थ्य और व्यायाम के स्तर पर निर्भर करती है।

नियमित रूप से एक्सरसाइज करने वाले और मांसपेशियां मजबूत बनाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए शरीर के प्रति किलोग्राम वजन पर लगभग 1.6 से 2 ग्राम प्रोटीन एक सामान्य लक्ष्य हो सकता है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति का वजन 80 किलो है और वह नियमित व्यायाम करता है, तो उसे प्रतिदिन लगभग 128 से 160 ग्राम प्रोटीन की जरूरत हो सकती है। हालांकि, यह मात्रा हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। किडनी की बीमारी या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को प्रोटीन की मात्रा डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह से तय करनी चाहिए।

प्रोटीन के साथ फाइबर लेना भी है जरूरी

डॉ. करण राजन के मुताबिक, मांसपेशियों को मजबूत रखने के साथ आंतों की सेहत बनाए रखने के लिए डाइट में प्रोटीन और फाइबर दोनों का संतुलन जरूरी है।

सिर्फ व्हे प्रोटीन, चिकन या मटन पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग खाद्य पदार्थों से प्रोटीन लेना बेहतर हो सकता है। इसके लिए दही, अंडे, बीन्स, टोफू और दालों को डाइट में शामिल किया जा सकता है।

वहीं फाइबर की जरूरत पूरी करने के लिए हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, फलियां और मेवों का सेवन करें। दही और छाछ जैसे फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ भी संतुलित डाइट का हिस्सा बन सकते हैं।

जरूरत से ज्यादा प्रोटीन लेने पर शरीर दे सकता है ये संकेत

बेंगलुरु के साइटकेयर हॉस्पिटल में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और हेपेटो-पैंक्रिएटिक सर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. आदित्य वी. नरगुंड के मुताबिक, जब डाइट में प्रोटीन ज्यादा और फाइबर कम होता है, तो कुछ लोगों को पाचन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • पेट फूलना और भारीपन महसूस होना।
  • बार-बार गैस बनना।
  • कब्ज की समस्या।
  • मल त्याग में परेशानी।
  • पेट में असहजता महसूस होना।
  • भूख कम लगना।
  • सांसों से दुर्गंध आना।

हालांकि, ये लक्षण केवल ज्यादा प्रोटीन लेने की वजह से ही हों, यह जरूरी नहीं है। इनके पीछे दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।

प्रोटीन और फाइबर का संतुलन कैसे बनाएं?

अपनी डाइट में प्रोटीन के साथ फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को भी पर्याप्त जगह दें। इसके लिए कुछ आसान बदलाव किए जा सकते हैं।

  1. रोजाना दालें, बीन्स और फलियां खाएं।
  2. भोजन में हरी सब्जियों और मौसमी फलों को शामिल करें।
  3. सफेद अनाज की जगह साबुत अनाज को प्राथमिकता दें।
  4. अंडे, दही, टोफू और अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोतों का इस्तेमाल करें।
  5. पर्याप्त पानी पिएं और नियमित शारीरिक गतिविधि बनाए रखें।
  6. फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं, ताकि पेट को इसकी आदत पड़ सके।

कुल मिलाकर, प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन अधिक मात्रा में सेवन करना और फाइबर की अनदेखी करना पाचन तंत्र के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए फिटनेस के चक्कर में सिर्फ प्रोटीन पर ध्यान देने के बजाय संतुलित डाइट अपनाना ज्यादा जरूरी है।

Satya Report डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध स्वास्थ्य जानकारी और विशेषज्ञों के बयानों पर आधारित है। प्रोटीन की मात्रा हर व्यक्ति की जरूरत और स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकती है। डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन से सलाह लें।

contact.satyareport@gmail.com

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