
दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा करने की परंपरा है। इसे अन्नकूट पर्व के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण को तरह-तरह के पकवान और छप्पन भोग अर्पित किए जाते हैं।
साल 2026 में गोवर्धन पूजा की तारीख को लेकर लोगों के मन में असमंजस है कि यह पर्व 9 नवंबर को मनाया जाएगा या 10 नवंबर को। आइए जानते हैं गोवर्धन पूजा की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और इस पर्व का धार्मिक महत्व।
गोवर्धन पूजा 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगी और 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे समाप्त होगी।
उदयातिथि के आधार पर गोवर्धन पूजा का पर्व 10 नवंबर 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना करेंगे।
गोवर्धन पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा के लिए प्रातःकालीन और गोधूलि मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- प्रातःकालीन पूजा मुहूर्त: सुबह 6:41 बजे से 8:51 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:30 बजे से 5:56 बजे तक
इन शुभ समयों में श्रद्धालु अपनी परंपरा और सुविधा के अनुसार पूजा कर सकते हैं। स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है।
क्यों मनाई जाती है गोवर्धन पूजा?
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को देवराज इंद्र की पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत और प्रकृति की पूजा करने का संदेश दिया। श्रीकृष्ण ने समझाया कि गोवर्धन पर्वत ब्रजवासियों और उनके पशुओं के जीवन का आधार है, इसलिए इसकी पूजा और सम्मान करना चाहिए।
इस बात से देवराज इंद्र क्रोधित हो गए और उन्होंने ब्रज में तेज बारिश शुरू कर दी। लगातार बारिश से लोगों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया। इसके नीचे ब्रजवासी और उनके पशु सुरक्षित रहे।
कथा के अनुसार, बाद में इंद्र देव को अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की महिमा स्वीकार की। इसी घटना की याद में गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है।
गोवर्धन पूजा पर क्यों लगाया जाता है अन्नकूट का भोग?
गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्रीकृष्ण को विभिन्न प्रकार के पकवान, मिठाइयां और मौसमी खाद्य पदार्थ अर्पित किए जाते हैं। इस भोग को अन्नकूट कहा जाता है। कई मंदिरों में इस दिन छप्पन भोग लगाने की भी परंपरा है।
धार्मिक मान्यता है कि अन्नकूट का भोग लगाने और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस दिन गायों की पूजा और सेवा करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
गोवर्धन पूजा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा को प्रकृति, पशुधन और अन्न के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व माना जाता है। यह त्योहार भगवान श्रीकृष्ण की उस लीला की याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने ब्रजवासियों को प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करने का संदेश दिया था।
इस दिन श्रद्धालु परिवार की खुशहाली, अन्न-धन की वृद्धि और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। ब्रज क्षेत्र में गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने की भी विशेष परंपरा है।
Satya Report डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई तिथि और पूजा मुहूर्त उपलब्ध पंचांग संबंधी जानकारी पर आधारित हैं। अलग-अलग स्थानों के पंचांग और स्थानीय समय के अनुसार इनमें अंतर हो सकता है। पूजा से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग से पुष्टि अवश्य करें।



