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‘जीते​​​ जी नहीं तो जाने के बाद मिलेगा न्याय’… कौन थीं साध्वी प्रेम बाईसा, जिनकी मौत के बाद उठे थे कई बड़े सवाल?

‘जीते​​​ जी नहीं तो जाने के बाद मिलेगा न्याय’… कौन थीं साध्वी प्रेम बाईसा, जिनकी मौत के बाद उठे थे कई बड़े सवाल?

राजस्थान की युवा कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा जनवरी 2026 में अपनी अचानक मौत के बाद देशभर में चर्चा में आ गई थीं। उनके निधन के कुछ घंटे बाद सोशल मीडिया अकाउंट से एक ऐसी भावुक पोस्ट साझा की गई, जिसमें लिखा था कि अगर उन्हें जीते जी न्याय नहीं मिला तो जाने के बाद जरूर मिलेगा। इस संदेश ने उनकी मौत को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए थे।

मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब उनके पिता ने आरोप लगाया कि तबीयत खराब होने पर आश्रम में उन्हें इंजेक्शन दिया गया था और इसके कुछ ही देर बाद उनकी हालत बिगड़ गई। शुरुआत में पुलिस ने मौत के हर पहलू की जांच की। बाद में मेडिकल बोर्ड और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मौत की वजह गंभीर फेफड़ों की बीमारी से जुड़ा कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट बताई।

आखिर कौन थीं साध्वी प्रेम बाईसा, कैसे उन्होंने कथावाचन की दुनिया में पहचान बनाई और उनकी मौत के बाद ऐसा क्या हुआ था, जिसने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया? आइए जानते हैं पूरी कहानी।

कौन थीं साध्वी प्रेम बाईसा?

साध्वी प्रेम बाईसा राजस्थान के बालोतरा जिले के परेऊ गांव की रहने वाली थीं। वह कम उम्र में ही धार्मिक कथावाचन और भक्ति संगीत के कारण लोगों के बीच पहचान बनाने लगी थीं। उन्हें भागवत कथा और भजन गायन के लिए जाना जाता था।

उनके पिता का नाम वीरमनाथ बताया जाता है। बचपन में ही उनकी मां का निधन हो गया था। इसके बाद पिता उन्हें जोधपुर के गुरुकृपा आश्रम लेकर गए, जहां उन्होंने संतों के सानिध्य में धार्मिक शिक्षा और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया।

धीरे-धीरे प्रेम बाईसा ने भागवत कथा और सत्संग के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। उनके कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते थे। सोशल मीडिया पर भी उनके काफी अनुयायी थे।

बाद में उन्होंने अपने पिता के साथ जोधपुर के आरती नगर इलाके में साधना कुटीर आश्रम की स्थापना की थी। यही आश्रम उनकी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गया।

2025 में किस विवाद के कारण चर्चा में आई थीं?

साध्वी प्रेम बाईसा की मौत से कुछ महीने पहले एक निजी सीसीटीवी फुटेज को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। इस फुटेज में उन्हें अपने पिता के साथ गले मिलते हुए दिखाया गया था। साध्वी का आरोप था कि कुछ लोगों ने फुटेज को गलत संदर्भ में पेश करके उनकी छवि खराब करने की कोशिश की।

उन्होंने आरोप लगाया था कि इस फुटेज के जरिए उन्हें ब्लैकमेल करने और पैसे मांगने की कोशिश की गई। शिकायत में कथित तौर पर 20 लाख रुपये की मांग का भी जिक्र किया गया था।

इस मामले में उन्होंने पुलिस से शिकायत की थी। पुलिस ने जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। साध्वी ने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखते हुए कहा था कि पिता के साथ उनके रिश्ते को गलत तरीके से दिखाकर उन्हें बदनाम किया जा रहा है।

यह विवाद उनकी मौत के बाद फिर चर्चा में आया, क्योंकि पुलिस ने शुरुआती जांच में यह भी देखा कि कहीं इस घटना से जुड़े तनाव का उनकी सेहत पर कोई असर तो नहीं पड़ा था।

28 जनवरी 2026 को अचानक बिगड़ी तबीयत

28 जनवरी 2026 को जोधपुर स्थित साधना कुटीर आश्रम में साध्वी प्रेम बाईसा की तबीयत बिगड़ गई। उनके पिता के अनुसार, उन्हें कुछ दिनों से सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत थी।

परिवार की ओर से एक कंपाउंडर को आश्रम बुलाया गया। आरोप है कि उसने साध्वी को इंजेक्शन लगाया और कुछ दवाइयां दीं। इसके कुछ ही देर बाद उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी और उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी।

परिजन उन्हें तत्काल जोधपुर के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

उनकी अचानक मौत की खबर फैलते ही श्रद्धालुओं और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई। कई लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

मौत के कुछ घंटे बाद इंस्टाग्राम पर आई पोस्ट ने बढ़ाए सवाल

साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के कुछ घंटे बाद उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से एक भावुक संदेश साझा किया गया। इसमें सनातन धर्म के प्रचार, संतों के आशीर्वाद और अग्निपरीक्षा का जिक्र था।

पोस्ट में कहा गया था कि उन्होंने आदि गुरु शंकराचार्य और देश के कई संत-महात्माओं को पत्र लिखकर अग्निपरीक्षा का निवेदन किया था। संदेश के अंत में लिखा था कि उन्हें ईश्वर पर भरोसा है और अगर जीते जी न्याय नहीं मिला तो जाने के बाद जरूर मिलेगा।

इस पोस्ट के सामने आने के बाद कई तरह के सवाल उठे। लोगों ने जानना चाहा कि आखिर साध्वी किस न्याय की बात कर रही थीं और अग्निपरीक्षा की मांग किस संदर्भ में की गई थी।

उनके पिता ने बताया था कि यह संदेश सोशल मीडिया संभालने वाले लोगों के जरिए साझा करवाया गया था। इस पोस्ट को लेकर भी पुलिस ने जांच की और उसके पीछे की परिस्थितियों को समझने की कोशिश की।

पुलिस ने मौत के मामले में क्या जांच की?

शुरुआत में पुलिस ने इंजेक्शन, दवाइयों, पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच सहित सभी पहलुओं की पड़ताल की। कंपाउंडर से भी पूछताछ की गई और यह जानने की कोशिश हुई कि साध्वी को कौन-सी दवाइयां दी गई थीं।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विशेष जांच टीम भी बनाई गई। जांच में मेडिकल बोर्ड की राय, फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट और हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट को शामिल किया गया।

14 फरवरी 2026 को जोधपुर पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर बताया कि साध्वी की मौत गंभीर फेफड़ों की बीमारी से जुड़ी थी। रिपोर्ट में अस्थमा और सीओपीडी जैसी बीमारियों का उल्लेख किया गया। पुलिस के अनुसार, उनकी तत्काल मृत्यु का कारण कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट यानी हृदय और सांस की प्रक्रिया का अचानक बंद होना था।

पुलिस ने यह भी कहा कि जांच में जहर दिए जाने, यौन हमले या शरीर पर चोट के प्रमाण नहीं मिले। इस तरह शुरुआती दौर में उठी जहर और हमले की आशंकाओं को मेडिकल जांच से समर्थन नहीं मिला।

हालांकि, इलाज के दौरान संभावित लापरवाही का पहलू अलग से सामने आया। पुलिस ने बताया कि इंजेक्शन देने वाले कंपाउंडर के उपचार के तरीके और मेडिकल नियमों के पालन की जांच की जा रही थी। इस संबंध में आगे की चिकित्सकीय राय के आधार पर कानूनी कार्रवाई की बात कही गई थी।

साध्वी प्रेम बाईसा की मौत ने क्यों खड़े किए इतने सवाल?

साध्वी की कम उम्र में अचानक मौत, इंजेक्शन के बाद तबीयत बिगड़ने का पारिवारिक आरोप और निधन के बाद सोशल मीडिया पर साझा किया गया संदेश—इन सभी घटनाओं ने मामले को काफी चर्चा में ला दिया था।

उनके अनुयायी शुरुआत से ही निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। वहीं, पुलिस ने मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर मौत की वजह स्पष्ट करते हुए जहर और हमले की आशंका को खारिज किया।

साध्वी प्रेम बाईसा अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी मौत से जुड़ा मामला यह याद दिलाता है कि किसी भी संवेदनशील घटना में शुरुआती आरोपों और अंतिम जांच के निष्कर्षों के बीच अंतर समझना जरूरी है। उनके जीवन, धार्मिक कार्यों और मौत से जुड़े तथ्यों को उसी सावधानी के साथ देखना चाहिए।

— Satya Report

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