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World​​​ Stroke Day: हाई बीपी से लेकर डायबिटीज तक, ये 6 समस्याएं बढ़ा सकती हैं स्ट्रोक का खतरा; शुरुआती संकेत पहचानना है जरूरी

World​​​ Stroke Day: हाई बीपी से लेकर डायबिटीज तक, ये 6 समस्याएं बढ़ा सकती हैं स्ट्रोक का खतरा; शुरुआती संकेत पहचानना है जरूरी

नई दिल्ली: स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें दिमाग के किसी हिस्से तक खून और ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो जाती है या दिमाग की कोई रक्त वाहिका फट जाती है। ऐसी स्थिति में मस्तिष्क की कोशिकाएं तेजी से प्रभावित होने लगती हैं। समय पर इलाज न मिलने पर व्यक्ति को स्थायी विकलांगता या जान का खतरा हो सकता है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकती हैं।

विश्व स्ट्रोक दिवस के मौके पर यह समझना जरूरी है कि किन स्वास्थ्य समस्याओं से खतरा बढ़ सकता है और किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ये 6 समस्याएं बढ़ा सकती हैं स्ट्रोक का खतरा

1. हाई ब्लड प्रेशर

हाई बीपी स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। लंबे समय तक रक्तचाप बढ़ा रहने से दिमाग की रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है। इससे उनमें नुकसान होने और रक्त वाहिका के फटने या ब्लॉक होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराना जरूरी है।

2. डायबिटीज

डायबिटीज में लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने से रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इससे स्ट्रोक सहित दिल और रक्त संचार से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। ब्लड शुगर की नियमित निगरानी और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज जरूरी है।

3. हाई कोलेस्ट्रॉल

खून में खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL का स्तर अधिक होने पर धमनियों में फैट जमा हो सकता है। इससे रक्त वाहिकाएं संकरी हो सकती हैं और दिमाग तक खून पहुंचने में रुकावट आ सकती है। संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं जोखिम कम करने में मदद कर सकती हैं।

4. दिल की कुछ बीमारियां

दिल की कुछ समस्याएं, खासकर एट्रियल फिब्रिलेशन यानी दिल की धड़कन का अनियमित होना, स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है। इस स्थिति में दिल के भीतर खून का थक्का बनने और उसके दिमाग तक पहुंचने की आशंका रहती है। दिल की बीमारी होने पर नियमित जांच और निर्धारित इलाज जरूरी है।

5. मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी

मोटापा हाई बीपी, डायबिटीज और असामान्य कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। ये सभी स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाते हैं। नियमित पैदल चलना, शारीरिक गतिविधि बनाए रखना और संतुलित भोजन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।

6. धूम्रपान

सिगरेट और तंबाकू का सेवन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे खून के थक्के बनने और रक्त संचार से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ता है। धूम्रपान छोड़ना स्ट्रोक के जोखिम को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

स्ट्रोक के इन शुरुआती संकेतों को पहचानें

स्ट्रोक के लक्षण अक्सर अचानक दिखाई देते हैं। इनके प्रमुख संकेत हैं:

  • चेहरे का एक हिस्सा अचानक लटक जाना या मुस्कुराने में परेशानी होना।
  • शरीर के एक तरफ हाथ या पैर में कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना।
  • बोलने या दूसरों की बात समझने में अचानक परेशानी होना।
  • एक या दोनों आंखों से देखने में अचानक दिक्कत होना।
  • अचानक संतुलन बिगड़ना, चक्कर आना या चलने में परेशानी होना।
  • बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक तेज सिरदर्द होना।

स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो क्या करें?

स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में पहुंचें। लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें, भले ही कुछ समय बाद व्यक्ति सामान्य महसूस करने लगे। लक्षण शुरू होने का समय याद रखें, क्योंकि इलाज के विकल्प तय करने में यह जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है। मरीज को खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल नहीं जाना चाहिए।

स्ट्रोक से बचाव के लिए क्या करें?

  • ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं।
  • धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाएं।
  • संतुलित भोजन करें और नमक का सेवन सीमित रखें।
  • नियमित रूप से पैदल चलें या अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करें।
  • वजन को स्वस्थ सीमा में बनाए रखने की कोशिश करें।
  • दिल की बीमारी या अनियमित धड़कन होने पर डॉक्टर की सलाह से इलाज कराएं।
  • निर्धारित दवाएं बिना चिकित्सकीय सलाह के बंद न करें।

Satya Report नोट: स्ट्रोक के मामले में समय पर इलाज बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लक्षण अचानक दिखाई दे सकते हैं, इसलिए चेहरे, हाथ-पैर या बोलने में अचानक बदलाव को नजरअंदाज न करें। तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जान बचाने और गंभीर नुकसान कम करने में मदद कर सकता है।

contact.satyareport@gmail.com

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