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​LTCG टैक्स खत्म होने से सरकारी खजाने को होगा 50 हजार करोड़ का नुकसान! SBI ने लगाया अनुमान

SBI रिसर्च के अनुसार, सरकार अपने फिस्कल कंसोलिडेशन के रोडमैप को प्रभावित किए बिना लॉन्गटर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को खत्म कर सकती है. इससे होने वाले संभावित रेवेन्यू का नुकसान केवल 40,000 से 50,000 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है. यह अनुमान वित्त वर्ष 2025 में वसूले गए 1.3 लाख करोड़ रुपए से काफी कम है. उस साल शेयर बाजार ने लगभग 30% का रिटर्न दिया था. SBI रिसर्च का कहना है कि LTCG को खत्म करने से होने वाले संभावित रेवेन्यू नुकसान का आकलन करने के लिए उस आंकड़े को आधार मानना ​​गलत होगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसलिए, यह कहना गलत होगा कि कैपिटल गेन्स टैक्स खत्म करने से सरकार को 1.3 लाख करोड़ रुपए के रेवेन्यू का नुकसान होगा.

​LTCG टैक्स खत्म होने से सरकारी खजाने को होगा 50 हजार करोड़ का नुकसान! SBI ने लगाया अनुमान

SBI रिसर्च का अनुमान है कि कमजोर बाजार रिटर्न और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी के बीच, वित्त वर्ष 2026 में LTCG से होने वाली कमाई लगभग 1 लाख करोड़ रुपए रही होगी, जो वित्त वर्ष 2027 में घटकर 40,000 से 50,000 करोड़ रुपए रह सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 से वित्त वर्ष 2027 के बीच निफ्टी का तीन साल का औसत रिटर्न केवल 0.5 फीसदी रहा है, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की कुल निकासी 4.8 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है. SBI रिसर्च ने कहा कि अगर मान भी लें कि सरकार LTCG टैक्स को खत्म करने का फैसला करती है, तो भी वित्त वर्ष 2028 में रेवेन्यू की कमी केवल 40,000 से 50,000 करोड़ रुपए के दायरे में ही रहेगी.

रिपोर्ट के मुताबिक, यह रकम GDP का लगभग 0.1 फीसदी से 0.2 फीसदी होगी, जिसे सरकार आसानी से संभाल सकती है. हमारा मानना ​​है कि अगर मान लिया जाए कि सभी कैपिटल गेन्स टैक्स खत्म कर दिए जाएं, तो भी सरकार इस नुकसान को सहने में सक्षम होगी. यह तर्क ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार अपने राजकोषीय आंकड़ों को लेकर दबाव में है. SBI रिसर्च का अनुमान है कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती, उर्वरक सब्सिडी में बढ़ोतरी, और पेट्रोलियम तथा LPG सब्सिडी में वृद्धि के कारण, वित्त वर्ष 2027 में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान से लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपए अधिक हो सकता है.

रिपोर्ट में राजकोषीय घाटा GDP का 4.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि बजट में इसका अनुमान 4.3 फीसदी था. इसमें कहा गया है कि वित्तीय घाटे के लक्ष्य से भटकने को रोकने के लिए, सरकार को खर्चों को तर्कसंगत बनाने, कैश बैलेंस को मजबूत करने और बजट में तय की गई उधारी से कम उधार लेने की जरूरत पड़ सकती है. ‘स्विच’ और ‘बायबैक’ के बाद, सरकार की उधारी बजट में तय 17.2 लाख करोड़ रुपए से घटकर 15.97 लाख करोड़ रुपए रह गई है. वहीं, SBI रिसर्च का अनुमान है कि अक्टूबर 2026 के अंत तक केंद्र सरकार का कैश बैलेंस लगभग 8.5 लाख करोड़ रुपए होगा.

LTCG फ्रेमवर्क की जगह क्या आ सकता है?

SBI रिसर्च ने मौजूदा टैक्स ढांचे को ज्यों का त्यों रखने के बजाय, कई अन्य विकल्प सुझाए हैं.

पहला विकल्प यह है कि LTCG छूट की सीमा को मौजूदा 1.25 लाख रुपए से बढ़ाकर महंगाई से जोड़ दिया जाए. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सीमा ऐसी होनी चाहिए जो रिटेल निवेशकों की बढ़ती संख्या और एसेट की बढ़ती कीमतों को दर्शाती हो.

दूसरा विकल्प यह है कि लंबे समय तक निवेश बनाए रखने पर फायदा दिया जाए. SBI रिसर्च के प्रस्तावित ढांचे के अनुसार, 1 से 2 साल तक रखे गए एसेट से होने वाले मुनाफे पर मौजूदा 12.5% ​​की दर लागू रह सकती है. 2 से 3 साल तक रखे गए निवेश पर 5% टैक्स लग सकता है, जबकि 3 साल से ज्यादा समय तक रखे गए निवेश पर टैक्स शून्य हो सकता है.

रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि सरकार राजस्व के नुकसान की भरपाई के लिए ‘सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स’ बढ़ा सकती है. इसमें कहा गया है कि STT में 50 फीसदी की बढ़ोतरी करने से वित्त वर्ष 2028 में लगभग 45,000 करोड़ रुपए का एक्स्ट्रा रेवेन्यू मिल सकता है.

SBI रिसर्च के प्रस्तावित ढांचे के तहत, LTCG छूट की सीमा बढ़ाकर 2 लाख रुपए कर दी जाएगी. 1 से 2 साल तक रखे गए निवेश पर 12.5 फीसदी ​​की दर बनी रहेगी, 2 से 3 साल तक रखे गए निवेश पर 5 फीसदी की दर लगेगी, और 3 साल से ज्यादा समय तक रखे गए निवेश पर टैक्स की दर शून्य हो जाएगी.

STT के प्रस्ताव के तहत, इक्विटी डिलीवरी पर टैक्स की दर 0.10 फीसदी से बढ़कर 0.15 फीसदी हो सकती है, जबकि फ्यूचर्स पर यह दर 0.05 फीसदी से बढ़कर 0.075 फीसदी हो सकती है. ऑप्शंस पर टैक्स की दर 0.15 फीसदी से बढ़कर 0.225 फीसदी हो सकती है.

SBI रिसर्च का कहना है कि अगर LTCG को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए, तो इससे मार्केट टर्नओवर बढ़ सकता है भले ही STT की दरों को धीरेधीरे बढ़ा दिया जाए. रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित ढांचे के तहत STT कलेक्शन बढ़कर 1.36 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है, जबकि मौजूदा दरों के हिसाब से वित्त वर्ष 2028 में यह 0.91 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है.

सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार, इक्विटी कैपिटल गेन्स पर लगने वाले टैक्स के ढांचे की समीक्षा करने के लिए विदेशी निवेशकों की मांग पर “विचार” करेगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्केट रेगुलेटर SEBI ने भी सरकार को सुझाव दिया है कि FIIs पर लगने वाले LTCG को हटा दिया जाए.

म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए टैक्स टालने की सुविधा

रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि अगर किसी म्यूचुअल फंड से मिली रकम को 90 दिनों के भीतर किसी पात्र इक्विटी म्यूचुअल फंड में फिर से निवेश किया जाता है, तो निवेशकों को LTCG टैक्स टालने की अनुमति दी जानी चाहिए. रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम से निवेशकों को कम रिटर्न देने वाले म्यूचुअल फंड से बेहतर रिटर्न देने वाली स्कीमों में जाने में मदद मिल सकती है, और उन्हें तुरंत कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा.

SBI रिसर्च का यह भी तर्क है कि LTCG में सुधार पर विचार करते समय बैंक डिपॉजिट से जुड़े टैक्स बदलावों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए. अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो इक्विटी निवेश पर मिलने वाले टैक्स लाभ, बैंक डिपॉजिट पर मिलने वाले लाभों की तुलना में बहुत अधिक हो सकते हैं. इससे परिवारों की वित्तीय बचत का संतुलन बिगड़ सकता है.

इसमें सेविंग अकाउंट के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को 10,000 रुपए से बढ़ाकर 20,000 रुपएकरने का प्रस्ताव दिया गया है. साथ ही, टर्म डिपॉजिट पर अभी लागू ‘मैच्योरिटी के आधार पर टैक्स’ की व्यवस्था को बदलकर, उस पर 15 फीसदी की एक समान टैक्स दर लागू करने का सुझाव दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, डिपॉजिट से जुड़े इन प्रस्तावों के कारण सरकार को मिलने वाले रेवेन्यू में लगभग 12,000 करोड़ रुपए की कमी आ सकती है.

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