मेरठ के सरधना में 13 साल पहले हुई एक किडनैपिंग की कहानी इस समय सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रही है. दरअसल, इस हाईप्रोफाइल और हैरतंगेज वारदात पर हाल ही में निर्माता निर्देशक राजकुमार हिरानी ने प्रीतम और पेड्रो नाम से एक वेब सीरीज भी बनाई है. इस फिल्म में अरशद वारसी और विक्रांत मैसी मुख्य भूमिका में है. हालांकि इस फिल्म में इस वारदात की अधूरी कहानी ही दिखाई गई है. आइए हम आपको पूरी कहानी बताते हैं, जिसमें वारदात का रोमांचक हिस्सा भी शामिल है.

यह हाईप्रोफाइल वारदात उत्तर प्रदेश के मेरठ में अगस्त 2013 का है. केस डायरी के मुताबिक मेरठ के सरधना में रहने वाले एक प्रतिष्ठित कारोबारी का अपहरण हुआ था. इस वारदात के बाद मेरठ से लखनऊ तक हड़कंप मच गया था. लोकल पुलिस के साथ ही यूपी एसटीएफ भी एक्टिव हो गई थी, लेकिन बदमाशों का कोई सुराग नहीं मिल रहा था. इसी बीच बदमाशों ने कारोबारी के ही नंबर से उनके परिवार को फोन किया और 2 करोड़ की फिरौती मांगी.
आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे पर ली फिरौती
बदमाशों ने फिरौती लेने के लिए आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे का लोकेशन तय किया था. इसमें शर्त रखी थी कि कारोबारी की पत्नी अकेले पूरी रकम लेकर आएंगी. उन दिनों आगरा एक्सप्रेसवे का काम चल रहा था. इसलिए लोकेशन पर पहुंचने के लिए काफी घूम कर जाना होता था. इस स्थान पर पहुंचना अपने आप में काफी कठिन काम था. बदमाशों के इस शर्त की जानकारी मिलने पर पुलिस ने प्रसिद्ध साइबर एक्सपर्ट अमित दुबे की मदद ली.
बदमाशों तक ऐसे पहुंची पुलिस
चूंकि बदमाशों का लोकेशन पुलिस ट्रैस नहीं कर पा रही थी और पुलिस के पास वक्त भी नहीं बचा था. ऐसे में अमित दुबे के कहने पर बदमाशों को फिरौती की रकम देने का फैसला हुआ. शर्त के मुताबिक कारोबारी की पत्नी यह रकम लेकर यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते आगरा पहुंची और फिर वहां से धीरे धीरे गाड़ी चलाते हुए बताई गई लोकेशन पर भी पहुंच गई. इधर, साइबर एक्सपर्ट अमित दुबे ने फिरौती वाले बैग में एक मोबाइल फोन साइलेंट करके छिपा दिया था, जिसका जीपीएस चालू था. पुलिस भी इसी लोकेशन के पीछेपीछे मौके पर पहुंच गई.
पुलिस को गच्चा देकर भागे बदमाश
वहां बदमाशों ने कारोबारी की पत्नी से बैग लेकर कह दिया कि कारोबारी अपने आप घर पहुंच जाएंगे. इतने में बदमाशों को शक हो गया और वह भागने लगे. पुलिस भी उनके पीछे लग गई. काफी दूर तक इधरउधर घुमाने के बाद बदमाश आगरा के एक हॉस्टल में घुस गए. पुलिस ने इस हॉस्टल को घेर तो लिया, लेकिन समस्या यह थी कि 500 से अधिक कमरों वाले इस हॉस्टल में बदमाशों की तलाश कैसे हो. ऐसे में अमित दुबे ने बैग में छिपाए गए फोन पर कॉल किया और पुलिस वालों को हरेक कमरे पर नॉक करने और शोर मचाने के लिए कहा. इस प्रकार पुलिस बदमाशों तक पहुंच तो गई, लेकिन एनकाउंटर में दोनों बदमाश मारे गए.
मास्टरमाइंड तक ऐसे पहुंची पुलिस
इन बदमाशों के मोबाइल नंबर को खंगाला गया तो पता चला कि इन बदमाशों की मेरठ में रहने वाले किसी व्यक्ति से लगातार बात हो रही थी. इस इनपुट पर पुलिस वापस मेरठ पहुंची. यहां उस गांव को घेर लिया गया, जहां उस मोबाइल का लोकेशन मिला था. लेकिन यहां गांव वाले पुलिस के खिलाफ खड़े हो गए. गांव के सरपंच ने खुद पुलिस को वहां से जाने को कहा, बल्कि पुलिस को गांव की सीमा के बाहर तक छोड़ने भी आया. इसी दौरान साइबर एक्सपर्ट अमित दुबे ने देखा कि वो नंबर तो पुलिस के साथ साथ चल रहा है. इसके बाद गांव के प्रधान को पकड़ा गया. पता चला कि जिस नंबर से वह आगरा में मारे गए बदमाशों के संपर्क में था, उसे वाइब्रेशन मोड में डालकर अपनी पगड़ी में छिपा रखा था.
पाताल से रेस्क्यू हुआ कारोबारी
इसके पुलिस ने प्रधान की अच्छी खातिरदारी की तो उसने ना केवल वारदात को कबूला, बल्कि पुलिस को उस स्थान तक ले गया, जहां कारोबारी को छिपाया गया था. यह स्थान खेतों के बीच में एक कुआं था. उस कुएं के अंदर एक खोह बनी थी और उस खोह के अंदर भी एक खोह थी. इस खोह में से 78 घंटे बाद कारोबारी को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया.



