मौजूदा साल में मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर करीब 28 फीसदी की गिरावट पर था. ऐसे माहौल में पहले जियो प्लेटफॉर्म का आईपीओ आया और उसने शेयर बाजार के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए. जियो प्लेटफॉर्म देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बन गई. लेकिन रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में कोई ऐसा उछाल देखने को नहीं मिला, जिसकी उम्मीद की जा रही थी. अब सारी उम्मीदे तिमाही नतीजों पर टिकी थीं.

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार की शाम अपना रिपोर्ट कार्ड दुनिया के सामने रखा और इतिहास रच गया. नतीजों में रिलायंस के नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर 41 फीसदी का उछाल देखने को मिला. बीते कई सालों में ऐसा पहली बार ही देखने को मिला होगा. जिसका असर सोमवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में भी देखने को मिला.
बीएसई पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में 8 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली और कंपनी की वैल्यूएशन ना सिर्फ 17 लाख करोड़ रुपए के पार गई, बल्कि 1.29 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का फायदा भी हुआ. जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में किस तरह के आंकड़े देखने को मिल रहे हैं.
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में बंपर तेजी
बीएसई के आंकड़ों के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर तेजी के साथ 1,227.40 रुपए पर ओपन हुए और देखते ही देखते 45 मिनट में 1,259 रुपए के साथ दिन के हाई पर पहुंच गए. वैसे शुक्रवार को कंपनी के शेयर 1,163.55 रुपए के साथ बंद हुए थे. दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर कंपनी का शेयर 7.72 फीसदी की तेजी के साथ 1253.40 रुपए पर कारोबार कर रहा है. वैसे कंपनी कंपनी का शेयर अपने 53 हफ्तों के हाई 1,611.20 रुपए से करीब 22 फीसदी नीचे की ओर ट्रेड कर रहा है. अगर शेयरों में इसी तरह की तेजी बनी रहती है तो जल्द ही कंपनी के नुकसान की भरपाई हो सकती है.
क्यों आई कंपनी के शेयरों में तेजी
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सितंबर तिमाही में अपने कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर 41 फीसदी% की बढ़ोतरी दर्ज की है, जो 25,548 करोड़ रुपए हो गया है. पिछले साल की इसी अवधि में यह 18,165 करोड़ रुपए था. यह ग्रोथ कंपनी के ‘ऑयलटूकेमिकल्स’ और ‘डिजिटलसर्विसेज’ बिजनेस के मजबूत योगदान की वजह से आई है. ऑपरेशंस से होने वाला रेवेन्यू सालाना आधार पर 29 फीसदी बढ़कर 3.32 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 2.58 लाख करोड़ रुपए था. कमाई में हुई इस बढ़ोतरी में ‘ऑयलटूकेमिकल्स’ सेगमेंट का सबसे बड़ा योगदान रहा. इस सेगमेंट का EBITDA सालाना आधार पर 68 फीसदी उछलकर 15,008 करोड़ रुपए से रिकॉर्ड 25,203 करोड़ रुपए पर पहुंच गया.
जफरीफने लगाया 47 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान
जेफरीज ने इस शेयर पर अपनी ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है और 1,710 रुपए का टारगेट प्राइस दिया है, जिसका मतलब है कि इसमें 47 फीसदी तक की तेजी आ सकती है. ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि O2C सेगमेंट के शानदार प्रदर्शन की बदौलत कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA अनुमान से 6% अधिक रहा, जिसने रिटेल सेगमेंट में 6% की कमी की भरपाई कर दी. त्योहारों के समय में बदलाव और ‘क्विक कॉमर्स’ के लगातार विस्तार के असर के कारण, कोर रिटेल की ग्रोथ और EBITDA में सालदरसाल गिरावट आई है.
जेफरीज को उम्मीद है कि मिडिल ईस्ट और रूस में रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान के चलते, सर्दियों के दौरान O2C सेगमेंट का मुनाफा ऊंचा बना रहेगा. ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2028 के लिए अपने EBITDA अनुमानों को क्रमशः 6 फीसदी और 2 फीसदी तक बढ़ा दिया है. फर्म ने यह भी बताया कि यह शेयर अपने लॉन्गटर्म एवरेज से 2 स्टैंडर्ड डेविएशन से भी नीचे ट्रेड कर रहा है, जो निवेशकों की बेहद निराशावादी उम्मीदों को दर्शाता है. जेफरीज के अनुसार, अर्निंग्स अपग्रेड और रिटेल ग्रोथ में रिकवरी स्टॉक की रीरेटिंग के लिए कैटेलिसट का काम कर सकती है.
नोमुरा का क्या है अंदाजा
नोमुरा ने रिलायंस के लिए अपना टारगेट प्राइस 1,690 रुपए प्रति शेयर से घटाकर 1,560 रुपए कर दिया है, जबकि इसमें 34 फीसदी की नई अपसाइड संभावना जताई है. ब्रोकरेज ने बताया कि कंसोलिडेटेड EBITDA उनके अनुमान से 9 फीसदी अधिक रहा. यह बेहतर प्रदर्शन मुख्य रूप से ऑयलटूकेमिकल्स सेगमेंट में उम्मीद से कहीं अधिक अच्छा काम करने की वजह से रहा, जबकि अपस्ट्रीम और टेलीकॉम व्यवसायों का प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप रहा. हालांकि, रिटेल EBITDA ब्रोकरेज के अनुमान से 10 फीसदी कम रहा.
O2C बिजनेस का EBITDA 25,200 करोड़ रुपए रहा, जबकि नोमुरा का अनुमान 20,300 करोड़ रुपए था. यह पिछली तिमाही के मुकाबले 48 फीसदी और पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 68 रुपए की वृद्धि है, जो इस सेगमेंट का अब तक का सबसे मजबूत तिमाही प्रदर्शन है. पिछले साल की तुलना में गैसऑयल, एविएशन टर्बाइन फ्यूल और गैसोलीन के क्रैक्स में क्रमशः 3.5 गुना, 3.7 गुना और 3 गुना की वृद्धि हुई. कच्चे तेल की बास्केट की लागत कम रहने से तिमाहीदरतिमाही सुधार हुआ, मार्जिन बेहतर रहा और थ्रूपुट में भी बढ़ोतरी हुई.
नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने लगाया ये अनुमान
नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने RIL पर अपनी ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है और 1,703 रुपए का टारगेट प्राइस दिया है, जिसका मतलब है कि इसमें 25 फीसदी की अपसाइड संभावना है. हालांकि, ब्रोकरेज ने अपना टारगेट 1,766 रुपए से घटा दिया है, जिसमें जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग के बाद 25% होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट को शामिल किया गया है. उन्होंने बताया कि RIL पर 1.17 लाख करोड़ रुपए का मामूली नेट डेट है, जो पिछले साल की तुलना में 1% कम है. इससे कंपनी की ‘वेटेड एवरेज कॉस्ट ऑफ कैपिटल’ नियंत्रित रहती है.
नुवामा ने कहा कि उनका ‘गोल्डन रिफाइनिंग एरा’ वाला अनुमान अभी भी कायम है, जिसके तहत प्रति बैरल 10 डॉलर से अधिक का सस्टेनेबल ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन मिलने की उम्मीद है. इसमें आगे कहा गया है कि रिलायंस के ‘न्यू एनर्जी’ बिजनेस की शुरुआत से समय के साथ ‘आफ्टरटैक्स प्रॉफिट’ में 50% से ज्यादा का योगदान मिल सकता है. साथ ही, कंपनी के 2035 तक ‘नेटजीरो कार्बन’ लक्ष्य के समर्थन से, O2C बिजनेस सहित पूरे कारोबार की वैल्यूएशन में भी सुधार देखने को मिल सकता है.
1.29 लाख करोड़ बढ़ी वैल्यूएशन
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में इस तेजी की वजह से कंपनी की वैल्यूएशन में 1.29 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. आंकड़ों को देखें तो रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर जब दिन के हाई पर पहुंचा था, तब कंपनी की वैल्यूएशन 17,04,357.77 करोड़ रुपए देखने को मिली थी. जबकि शुक्रवार को कंपनी के शेयर 15,75,143.36 करोड़ रुपए थी. इसका मतलब है कि कारोबारी सत्र के दौरान कंपनी की वैल्यूएशन में 1,29,214.41 करोड़ रुपए का फायदा हुआ है.



