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​हेलिकॉप्टर पायलट की कितनी होती है सैलरी, दो पायलट अनिवार्य करने के फैसले का हो रहा विरोध

DGCA ने चारधाम यात्रा रूट पर उड़ान भरने वाले हर हेलिकॉप्टर में दो पायलट रखना अनिवार्य कर दिया है. इसके साथ ही कोपायलट के लिए पहाड़ी इलाकों में उड़ान भरने की योग्यता भी जरूरी की गई है. इस फैसले का हेलिकॉप्टर ऑपरेटर विरोध कर रहे हैं. चारधाम मार्ग पर सेवाएं देने वाले 13 में से 11 ऑपरेटरों ने संयुक्त पत्र भेजकर 2 नवंबर से सेवाएं स्थगित करने की चेतावनी दी है. ऑपरेटरों का कहना है कि इस फैसले से उनकी लागत बढ़ेगी और परिचालन प्रभावित होगा.

​हेलिकॉप्टर पायलट की कितनी होती है सैलरी, दो पायलट अनिवार्य करने के फैसले का हो रहा विरोध

यह फैसला बद्रीनाथ से देहरादून लौटते समय जोशीमठ के पास हुए हेलिकॉप्टर हादसे के बाद लिया गया था. इस दुर्घटना में पायलट समेत सभी 6 लोगों की मौत हो गई थी. ऐसे में सवाल है कि हेलिकॉप्टर पायलट की सैलरी कितनी होती है, इसके लिए क्या योग्यता चाहिए और दूसरे पायलट की नियुक्ति से ऑपरेटरों का खर्च कितना बढ़ेगा?

कितनी मिलती है हेलिकॉप्टर पायलट को सैलरी?

पवन हंस लिमिटेड के मुताबिक हेलिकॉप्टर पायलट की सैलरी उसके अनुभव और उड़ान के घंटों के आधार पर तय होती है. जूनियर हेलिकॉप्टर पायलट को सालाना 12 लाख रुपये CTC मिलता है. वहीं, 1,000 घंटे का अनुभव रखने वाले पायलट को 21.48 लाख रुपये और 2,000 घंटे का अनुभव रखने वाले पायलट को 22.44 लाख रुपये सालाना CTC दिया जाता है. कैप्टन के पद पर यह सैलरी 23.64 लाख से 25.56 लाख रुपये सालाना तक पहुंच जाती है. यानी 5,000 घंटे का उड़ान अनुभव रखने वाले कैप्टन को जूनियर पायलट के मुकाबले दोगुने से ज्यादा CTC मिलता है. हालांकि, ये पवन हंस की भर्ती में दिए गए औसत CTC के आंकड़े हैं. इन्हें देश की सभी हेलिकॉप्टर कंपनियों का तय वेतनमान नहीं माना जा सकता.

हेलिकॉप्टर पायलट बनने के लिए क्या मानक हैं?

भारत में कमर्शियल हेलिकॉप्टर उड़ाने के लिए DGCA से कमर्शियल हेलिकॉप्टर पायलट लाइसेंस लेना जरूरी है. इसके लिए उम्मीदवार की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए. शैक्षणिक योग्यता के तौर पर 12वीं में फिजिक्स और मैथ्स जरूरी हैं. इसके अलावा निर्धारित मेडिकल फिटनेस और फ्लाइंग ट्रेनिंग की शर्तें पूरी करनी होती हैं. लाइसेंस के लिए कम से कम 150 घंटे की उड़ान ट्रेनिंग जरूरी है. इसमें पायलटइनकमांड के तौर पर उड़ान का अनुभव भी शामिल होता है. इसके बाद संबंधित परीक्षाएं और स्किल टेस्ट पास करने होते हैं.

सिर्फ लाइसेंस हासिल कर लेना ही पर्याप्त नहीं है. हेलिकॉप्टर के अलगअलग मॉडल के लिए पायलट को विशेष ट्रेनिंग और टाइप एंडोर्समेंट की जरूरत पड़ सकती है. उदाहरण के तौर पर Bell 407, Bell 412, Dauphin और Mi172 जैसे हेलिकॉप्टरों के लिए अलगअलग अनुभव और योग्यता की जरूरत होती है. यही वजह है कि कंपनियां भर्ती के दौरान पायलट के कुल उड़ान घंटों के साथ यह भी देखती हैं कि उसने किस मॉडल का हेलिकॉप्टर उड़ाया है और उसे किस तरह का अनुभव है.

ऑपरेटरों का कितना बढ़ेगा खर्च?

ऑपरेटरों के विरोध की सबसे बड़ी वजह अतिरिक्त पायलट की सैलरी और परिचालन खर्च है. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चारधाम मार्ग पर काम करने वाले ऑपरेटरों के पास फिलहाल करीब 70 पायलट हैं. नए नियम के बाद उन्हें यह संख्या बढ़ाकर करीब 110 करनी पड़ सकती है. यानी करीब 40 अतिरिक्त पायलटों की जरूरत होगी. ऑपरेटरों का कहना है कि इतनी कम अवधि में पहाड़ी इलाकों में उड़ान भरने का अनुभव रखने वाले योग्य पायलटों की व्यवस्था करना आसान नहीं है. इसके अलावा पायलटों के काम के घंटों की भी सीमा है. हर पायलट महीने में अधिकतम 90 घंटे ही उड़ान भर सकता है. ऐसे में पर्याप्त पायलटों की उपलब्धता उनके लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.

हेलिकॉप्टर का टिकट 4 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एक हेलिकॉप्टर ऑपरेटर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि अभी चारधाम मार्ग पर एक यात्री से 2.25 लाख से 2.50 लाख रुपये तक किराया लिया जाता है. मौजूदा व्यवस्था में हेलिकॉप्टर में पायलट के अलावा अधिकतम 5 यात्री बैठ सकते हैं. लेकिन दूसरा पायलट रखने पर यात्रियों की संख्या घटकर 4 रह जाएगी. इससे हर उड़ान में एक यात्री की सीट कम हो जाएगी और ऑपरेटरों की कमाई पर असर पड़ेगा. इसके साथ ही अतिरिक्त पायलट की सैलरी भी देनी होगी. ऑपरेटर के मुताबिक, इन दोनों वजहों से हेलिकॉप्टर का टिकट करीब 4 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. हालांकि, यह किसी कंपनी की ओर से घोषित नया किराया नहीं, बल्कि ऑपरेटर का अनुमान है.

सैलरी के अलावा रहने और आनेजाने का खर्च भी बढ़ेगा

ऑपरेटरों ने DGCA को भेजे संयुक्त पत्र में कहा है कि हर उड़ान में दो पायलट तैनात करने से केवल सैलरी का खर्च नहीं बढ़ेगा, बल्कि क्रू की उपलब्धता, रहने, आनेजाने और दूसरे लॉजिस्टिक्स पर भी अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा. उनका कहना है कि मौजूदा चार्टर रेट और सीमित ऑपरेटिंग मार्जिन में इस खर्च को उठाना मुश्किल होगा. वहीं, पूरा अतिरिक्त बोझ यात्रियों पर डालना भी व्यावसायिक रूप से संभव नहीं है. ऑपरेटरों ने नियम लागू करने से पहले उनसे पर्याप्त बातचीत और इसके आर्थिक असर का आकलन नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाया है. उन्होंने मांग की है कि सुरक्षा से समझौता किए बिना ऐसा व्यावहारिक विकल्प निकाला जाए, जिससे हेलिकॉप्टर सेवाएं भी जारी रह सकें.

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