
मुंबई, महाराष्ट्र: अभिनेता इमरान खान की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) की ओर से जारी ‘लीव इंडिया नोटिस’ को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सोमवार, 2 नवंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने उनके ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड और कथित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर कई तीखे सवाल किए। पीठ ने यहां तक पूछा कि भारत में जन्म लेने, यहीं रहने और काम करके कमाने के बावजूद वह भारतीय नागरिकता क्यों नहीं लेते।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत एम. सेठना की पीठ ने सुनवाई के दौरान OCI कार्डधारकों पर लागू नियमों का जिक्र किया। अदालत ने कहा कि OCI दर्जे के तहत भारत में रहने वाले व्यक्ति को राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक प्रदर्शनों में शामिल होने की अनुमति नहीं है। पीठ ने इस बात पर भी जोर दिया कि OCI कार्डधारकों को अपने अधिकारों के साथ-साथ उन पर लागू प्रतिबंधों की जानकारी होनी चाहिए।
OCI कार्ड को लेकर अदालत ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने इमरान खान से उनके नागरिकता संबंधी दर्जे पर सवाल किया। अदालत ने टिप्पणी की कि जब उनका जन्म भारत में हुआ, वह यहीं रहते हैं और काम करते हैं, तो फिर भारतीय नागरिकता लेने में क्या परेशानी है। पीठ ने उनके सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स होने का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसे मामले में उनकी जिम्मेदारी को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
इमरान खान की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि उन्हें इस मामले में जांच के लिए कभी नहीं बुलाया गया। बचाव पक्ष ने यह भी जानकारी दी कि अभिनेता के पास अमेरिकी पासपोर्ट है और वह वर्ष 2006 से नौकरी की तलाश में हैं।
अभिनेता के वकील ने दी भविष्य में प्रदर्शन से दूर रहने की दलील
इमरान खान के वकील ने अदालत को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि वह भविष्य में किसी भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेंगे। बचाव पक्ष ने कहा कि अभिनेता इस संबंध में अदालत के सामने लिखित अंडरटेकिंग देने के लिए भी तैयार हैं। उनका दावा था कि इमरान खान न तो संबंधित प्रदर्शन में शामिल हुए थे और न ही आगे ऐसे किसी आयोजन का हिस्सा बनने का इरादा रखते हैं।
हालांकि, अदालत ने केवल इस आश्वासन को पर्याप्त नहीं माना। पीठ ने सवाल किया कि इमरान खान किस आधार पर यह साबित करेंगे कि वह कथित प्रदर्शन में शामिल नहीं थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में उनके दावे को तथ्यों के आधार पर स्पष्ट करना होगा।
सरकारी पक्ष ने सोशल मीडिया पोस्ट का किया जिक्र
सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने दावा किया कि इमरान खान कथित प्रदर्शन में शामिल हुए थे और उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी पोस्ट भी साझा की थी। सरकार ने उनके उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने प्रदर्शन में शामिल होने से इनकार किया था। सरकारी पक्ष के अनुसार, इस मामले में शिकायत दर्ज की गई है और OCI कार्डधारक होने के कारण अभिनेता के अधिकार भारतीय नागरिकों से अलग हैं।
अदालत ने बिना शर्त माफी की बात कही
पीठ ने सुनवाई के दौरान संकेत दिया कि यदि इमरान खान माफी मांगना चाहते हैं, तो वह बिना किसी शर्त के होनी चाहिए। अदालत ने OCI नियमों के पालन पर भी जोर दिया और कहा कि संबंधित व्यक्ति को अपने दर्जे के तहत मिलने वाले अधिकारों तथा प्रतिबंधों को समझना जरूरी है।
फिलहाल मामला FRRO के ‘लीव इंडिया नोटिस’ को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कथित प्रदर्शन में अभिनेता की भूमिका, उनके सोशल मीडिया पोस्ट और OCI कार्ड से जुड़े नियमों पर सवाल उठाए। आगे की कानूनी प्रक्रिया में इन सभी पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट होगी। अदालत की टिप्पणियां सुनवाई के दौरान सामने आई हैं और मामले में अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और अदालत में सुनवाई के दौरान सामने आई जानकारी पर आधारित है। मामले में लगाए गए आरोपों और दावों पर अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।



