
अक्सर लोग हाई ब्लड प्रेशर को सेहत के लिए बड़ा खतरा मानते हैं, लेकिन ब्लड प्रेशर का सामान्य से कम होना भी कई तरह की परेशानियां पैदा कर सकता है। लो बीपी होने पर चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, आंखों के सामने धुंधलापन छाना और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन अगर ब्लड प्रेशर कम होने के साथ हाथ-पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी भी महसूस होने लगे तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, हाथ-पैरों का सुन्न होना हमेशा लो ब्लड प्रेशर की वजह से नहीं होता। इसके पीछे नसों से जुड़ी समस्या, डायबिटीज या शरीर में विटामिन B12 की कमी जैसे कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
ISIC मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी विभाग के निदेशक एवं प्रमुख डॉ. सौरभ जुनेजा के अनुसार, केवल लो ब्लड प्रेशर की वजह से आमतौर पर हाथ-पैरों में सुन्नपन नहीं होता। ऐसे में इसके दूसरे संभावित कारणों को समझना जरूरी है।
लो ब्लड प्रेशर होने पर शरीर में दिखते हैं ये लक्षण
जब ब्लड प्रेशर सामान्य से नीचे चला जाता है तो शरीर के विभिन्न अंगों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त पहुंचने में परेशानी हो सकती है। इसकी वजह से कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
- अचानक चक्कर आना या सिर हल्का महसूस होना।
- शरीर में कमजोरी और थकान रहना।
- आंखों के सामने धुंधलापन छाना।
- बेहोशी महसूस होना या बेहोश हो जाना।
- अचानक बीपी गिरने पर भ्रम और असहजता महसूस होना।
हालांकि, हर व्यक्ति में लो बीपी के लक्षण एक जैसे नहीं होते। अगर बीपी अचानक बहुत कम हो जाए तो शरीर के जरूरी अंगों तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
हाथ-पैर सुन्न होने के पीछे क्या हो सकते हैं कारण?
डॉक्टरों के मुताबिक, हाथ-पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी होने के पीछे कई स्वास्थ्य संबंधी कारण हो सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
1. नसों पर दबाव पड़ना: गर्दन, कमर या शरीर के दूसरे हिस्सों में नसों पर दबाव पड़ने से हाथ-पैरों में सुन्नपन और झुनझुनी महसूस हो सकती है।
2. डायबिटीज: लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं रहने पर नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। इसमें खासकर पैरों में सुन्नपन, जलन और झुनझुनी की परेशानी हो सकती है।
3. विटामिन B12 की कमी: शरीर में विटामिन B12 की कमी होने पर नसों के कामकाज पर असर पड़ सकता है। इसकी वजह से हाथ-पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन महसूस हो सकता है।
4. न्यूरोलॉजिकल समस्याएं: कुछ तंत्रिका संबंधी बीमारियां भी शरीर के अलग-अलग हिस्सों में सुन्नपन और कमजोरी पैदा कर सकती हैं।
इसलिए केवल बीपी कम होने को हाथ-पैर सुन्न होने की वजह मानना सही नहीं है।
लो बीपी के साथ सुन्नपन हो तो कब डॉक्टर को दिखाएं?
अगर ब्लड प्रेशर कम होने के दौरान कुछ समय के लिए चक्कर, कमजोरी या सिर हल्का महसूस होता है और साथ में झुनझुनी भी होती है, तो इसकी वजह की जांच जरूरी है।
लेकिन अगर शरीर का कोई एक हिस्सा लगातार सुन्न रहता है या हाथ-पैरों में सुन्नपन के साथ कमजोरी महसूस होती है तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
डॉक्टर ब्लड प्रेशर की रीडिंग, पहले से चल रही दवाओं, पुरानी बीमारियों और नसों से जुड़ी जांच के आधार पर समस्या की वास्तविक वजह पता लगा सकते हैं।
अचानक दिखें ये लक्षण तो बिल्कुल न करें नजरअंदाज
डॉ. सौरभ जुनेजा ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि शरीर के कुछ लक्षण गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर सकते हैं। खासकर अगर अचानक चेहरे, हाथ या पैर में सुन्नपन महसूस हो तो तुरंत सतर्क होना जरूरी है।
इन लक्षणों को पहचानें:
- चेहरे का एक तरफ लटक जाना।
- शरीर के एक तरफ हाथ या पैर में अचानक सुन्नपन या कमजोरी होना।
- बोलने या दूसरों की बात समझने में परेशानी होना।
- अचानक धुंधला दिखाई देना या नजर प्रभावित होना।
- तेज सिरदर्द होना।
- चलने में परेशानी या शरीर का संतुलन बिगड़ना।
ये स्ट्रोक के चेतावनी संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लें। लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें।
इसके अलावा सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी या बेहोशी होने पर भी तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
बार-बार हाथ-पैर सुन्न होते हैं तो क्या करें?
अगर आपको बार-बार हाथ-पैरों में सुन्नपन, झुनझुनी या जलन महसूस होती है तो इसे केवल लो बीपी का लक्षण मानकर अनदेखा न करें। इसके पीछे डायबिटीज, विटामिन B12 की कमी, एनीमिया, थायरॉइड संबंधी परेशानी, नसों पर दबाव या पेरिफेरल न्यूरोपैथी जैसे कारण हो सकते हैं।
ऐसी स्थिति में डॉक्टर से मिलकर जरूरी जांच कराएं। अपनी मर्जी से दवाएं लेना या केवल बीपी बढ़ाने के लिए घरेलू उपाय करना नुकसानदायक हो सकता है।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों और विशेषज्ञों के बयानों पर आधारित है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर खुद से इलाज करने के बजाय योग्य डॉक्टर से सलाह लें। अचानक सुन्नपन, कमजोरी या स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर तुरंत इमरजेंसी सहायता लें।



