
नई दिल्ली: दिवाली से पहले हवाई टिकटों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद नए विवाद में आ गया है। अदालत ने किराए में कथित तौर पर 700 फीसदी तक वृद्धि के मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए हवाई यात्रा नहीं करने की बात कही थी। इस टिप्पणी पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरभ दास ने नाराजगी जताई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यही व्यवस्था है, जिसने आम लोगों को कॉकरोच बना दिया है।
सौरभ दास ने सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से जुड़ी खबर साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि अगर जहरीले वायु प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है तो सांस मत लो, सड़कों पर गड्ढे हैं तो चलो मत और पेट्रोल महंगा है तो निजी वाहन मत चलाओ। इसी तरह बेरोजगारी होने पर नौकरी मत खोजो और पेपर लीक होने पर परीक्षा मत दो।
उन्होंने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि समाज को बांटने वाला मीडिया है तो टीवी मत देखो और फर्जी बाबा धर्म के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं तो उनके पास मत जाओ। दास ने इन उदाहरणों के जरिए व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसी सिस्टम ने लोगों को कॉकरोच बना दिया है। हालांकि, उन्होंने फिलहाल इस मामले में पार्टी की ओर से किसी अगले कदम की घोषणा नहीं की है।
पहले भी अदालतों की टिप्पणियों पर जता चुके हैं नाराजगी
सौरभ दास इससे पहले भी अदालतों के फैसलों और टिप्पणियों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने न्यायपालिका की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कुछ न्यायाधीशों की कार्यशैली की आलोचना की थी। उनका आरोप था कि कुछ मामलों में कानून के बजाय निजी पूर्वाग्रहों के आधार पर फैसले और टिप्पणियां की जाती हैं।
आखिर सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ था?
दरअसल, दिवाली से पहले घरेलू हवाई मार्गों पर टिकटों की कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता अभिनव ने अदालत को बताया कि कई रूटों पर हवाई किराया सामान्य कीमत से 700 फीसदी तक बढ़ गया है।
उन्होंने दलील दी कि हवाई यात्रा कई लोगों के लिए जरूरी सेवा है और किराए में इतनी बड़ी बढ़ोतरी संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार से जुड़ा सवाल खड़ा करती है।
इस पर जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस ए. सिंह की पीठ ने तत्काल सुनवाई के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, ‘हवाई यात्रा न करें।’
दिल्ली से कोलकाता तक का किराया 78 हजार रुपये से ज्यादा
याचिका में हवाई किराए में बढ़ोतरी को समझाने के लिए कई उदाहरण भी दिए गए हैं। इसमें 29 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि दिवाली से पहले कई प्रमुख घरेलू रूटों पर टिकटों की कीमत सामान्य स्तर से दो से सात गुना तक पहुंच गई थी।
दावा किया गया कि दिल्ली से कोलकाता का टिकट, जिसकी सामान्य कीमत लगभग 10 से 11 हजार रुपये होती है, 6 नवंबर की यात्रा के लिए 78,694 रुपये तक पहुंच गया था। याचिकाकर्ता ने एक ही दिन और एक ही रूट की अलग-अलग उड़ानों के किराए में भारी अंतर का मुद्दा भी उठाया।
डायनेमिक प्राइसिंग पर भी उठे सवाल
हवाई किराए को नियंत्रित करने की मांग को लेकर एस. लक्ष्मीनारायणन की जनहित याचिका पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसमें एयरलाइंस की एल्गोरिदम आधारित डायनेमिक प्राइसिंग व्यवस्था, अचानक बढ़ने वाले टिकट किराए और अतिरिक्त शुल्कों पर सवाल उठाए गए हैं।
फिलहाल हवाई किराए का मुद्दा, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और सौरभ दास की प्रतिक्रिया चर्चा में है। इस पूरे विवाद में आगे क्या रुख सामने आता है, इस पर नजर बनी हुई है।
Satya Report Disclaimer: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। संबंधित टिप्पणियों और दावों को उनके संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।



