दिवाली आ गयी है. यह पटाखों और रोशनी उत्सव माना जाता है. लेकिन तेज धमाके कई लोगों के लिए परेशानी का सबब बनते हैं. छोटे बच्चे, बुजुर्ग, बीमार लोग और पालतू जानवर शोर से खास तौर पर प्रभावित होते हैं. की लोगों की सेहत खराब हो जाती है. कोई पटाखों से जल जाता है तो किसी को सांस की बीमारी घेर लेती है. आइए, इसी बहाने जानते हैं कि पटाखों की आवाज की कानूनी सीमा कितनी है? कितना हो रहा है शोर? कैसे ट्रैक करें? नियम तोड़ने पर कितनी मिलेगी सजा?

पटाखों के लिए केंद्रीय ध्वनि मानक सामान्यतः तय किए गए हैं. विस्फोट के स्थान से 4 मीटर की दूरी पर आवाज 125 डेसीबल से अधिक नहीं होनी चाहिए. यह पटाखे की आवाज के लिए मानक है. इलाके के सामान्य ध्वनि मानक अलग हैं. आवासीय क्षेत्र में दिन के समय सीमा 55 डेसीबल और रात में 45 डेसीबल तय की गयी है. व्यावसायिक क्षेत्र में यह सीमा दिन में 65 और रात में 55 डेसीबल है. औद्योगिक क्षेत्र में दिन में 75 और रात में 70 डेसीबल है. साइलेंस जोन में दिन की सीमा 50 और रात की 40 डेसीबल है. दिन का समय सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक माना जाता है. रात का समय रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक होता है. एक जरूरी फर्क और समझना होगा. आवासीय क्षेत्र की 55 या 45 डेसीबल सीमा आसपास के वातावरण के शोर स्तर के लिए है.
क्या रात में पटाखे जलाने की अनुमति है?
देशभर में पटाखे जलाने का समय हर जगह एक जैसा नहीं होता. कई जगह रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक शोर पैदा करने वाले पटाखों पर रोक लागू होती है. दिवाली पर कुछ राज्यों या स्थानीय प्रशासन की ओर से सीमित समय की अनुमति दी जाती है. समय और शर्तें आदेश के अनुसार बदल सकती हैं. इसीलिए पिछले साल का समय इस साल पर लागू मानना ठीक नहीं है. पटाखे जलाने से पहले अपने जिले के प्रशासन, पुलिस या राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा सूचना देखना उचित कदम होगा. किसी शहर में ग्रीन पटाखों, बिक्री, समय या पटाखों की किस्म पर अलग पाबंदी भी हो सकती है. कानूनन अस्पताल, वृद्धाश्रम, घनी आबादी में तेज आवाज पटाखे नहीं जलाए जा सकते.
शोर को कैसे ट्रैक करें?
शोर मापने का सबसे भरोसेमंद तरीका कैलिब्रेट किए गए साउंड लेवल मीटर का इस्तेमाल है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासन ऐसी मशीनों से तय स्थानों पर ध्वनि स्तर दर्ज करते हैं. उनके माप में समय, स्थान और उपकरण का रिकॉर्ड रखा जा सकता है. मोबाइल फोन के शोर मापने वाले ऐप से केवल शुरुआती अंदाजा मिलता है. फोन का माइक्रोफोन, ऐप की गुणवत्ता और आसपास की स्थिति रीडिंग को बदल सकते हैं. इसलिए मोबाइल ऐप की संख्या को कानूनी प्रमाण या आधिकारिक माप न मानें. पटाखे के ठीक पास जाकर आवाज मापने की कोशिश भी न करें. यह जोखिम भरा हो सकता है.
अगर आपके इलाके में लगातार तेज पटाखे चल रहे हैं, तो सुरक्षित जगह से समय और स्थान लिख लें. संभव हो तो दूर से छोटा वीडियो या ऑडियो रिकॉर्ड करें. अपनी रिकॉर्डिंग में तारीख और समय सुरक्षित रखें. किसी व्यक्ति से भिड़ने या पटाखे को छूने से बचें. शिकायत स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन या राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से की जा सकती है. तत्काल खतरा हो तो स्थानीय आपातकालीन सेवा से संपर्क करें.
पटाखों के शोर पर कार्रवाई उल्लंघन की प्रकृति और लागू आदेश पर निर्भर करती है. फोटो: Pexels
नियम तोड़ने पर क्या सजा हो सकती है?
कार्रवाई उल्लंघन की प्रकृति और लागू आदेश पर निर्भर करती है. पुलिस या अधिकृत अधिकारी पटाखे बंद करा सकते हैं और प्रतिबंधित पटाखे या अवैध भंडार जब्त कर सकते हैं. बिना लाइसेंस बिक्री, भंडारण या निर्माण पर विस्फोटक पदार्थों से जुड़े कानूनों के तहत अलग कार्रवाई हो सकती है. ध्वनि प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन होने पर पर्यावरण कानून के तहत दंडात्मक कार्रवाई संभव है. सजा या जुर्माने की एक ही रकम हर मामले में लागू नहीं होती. यह इस बात पर निर्भर कर सकता है कि कौनसा नियम या आदेश तोड़ा गया, किस राज्य में घटना हुई और अधिकारी किस कानून के तहत कार्रवाई कर रहे हैं.
अदालत या प्रशासन की रोक के बाद भी उल्लंघन जारी रखने पर मामला अधिक गंभीर हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट अश्वनी कुमार दुबे कहते हैं कि दिल्लीएनसीआर में प्रतिबंधित पटाखे जलाने या खरीदने पर छह महीने तक की जेल, 200 रुपये तक जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं. बिक्री या भंडारण के मामले में तीन साल तक की जेल और पांच हजार रुपये तक जुर्माना हो सकता है. यह बेहद संवेदनशील मसला है. विस्फोट हुआ और जानें चली गईं तो अन्य संबंधित धाराएं जुड़ जाएंगी और सजा की अवधि बढ़ सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों के इस्तेमाल और प्रदूषण को लेकर समयसमय पर कई निर्देश दिए हैं.
शिकायत करते समय क्या जानकारी दें?
शिकायत में स्थान का पूरा पता या पहचानने योग्य निशान बताएं. शोर किस समय शुरू हुआ और कितनी देर चला, यह लिखें. यदि सुरक्षित हो, तो दूर से लिया गया वीडियो या ऑडियो जोड़ें. आपने किस अधिकारी या विभाग से संपर्क किया, उसका समय और शिकायत संख्या भी संभालकर रखें. झूठी या बढ़ाचढ़ाकर की गई शिकायत न करें. रिकॉर्डिंग लेने के लिए किसी की निजी जगह में प्रवेश न करें. पटाखा जलाने वाले व्यक्ति को धमकाना या उससे बहस करना स्थिति बिगाड़ सकता है. शिकायत का उद्देश्य प्रशासन को नियम लागू करने की सूचना देना है.
सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं पटाखों को लेकर निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों के इस्तेमाल और प्रदूषण को लेकर समयसमय पर कई निर्देश दिए हैं. दिल्लीएनसीआर में कुछ वर्षों में प्रमाणित ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल और उन्हें जलाने के समय पर सीमाएं तय की गईं. ये आदेश अक्सर खास क्षेत्र और खास त्योहार के लिए होते हैं. इसलिए हर साल अपने शहर और राज्य के ताजा सरकारी आदेश की जांच करनी चाहिए. देखना रोचक होगा कि इस बार इलाकाई अफसर दिवाली पर इस सिलसिले में किस तरह का आदेश जारी करते हैं.
जिम्मेदारी से मनाएं दिवाली
पटाखा खरीदते समय पैकेट पर निर्माता, लाइसेंस और वैधता की जानकारी जरूर देखें. केवल दुकानदार के कहने पर किसी पटाखे को सुरक्षित या नियमों के अनुरूप न मानें. निर्धारित समय का पालन करें. अस्पतालों, स्कूलों, अदालतों और अन्य साइलेंस जोन के आसपास विशेष सावधानी रखें. सबसे सुरक्षित विकल्प कम शोर वाले उत्सव और रोशनी पर जोर देना है. दिवाली की खुशी दूसरों की नींद, स्वास्थ्य और शांति की कीमत पर नहीं होनी चाहिए. नियमों की जानकारी रखें, स्थानीय आदेश मानें और शोर की समस्या दिखे तो सुरक्षित तरीके से संबंधित अधिकारी को बताएं.



