
लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में अगले वित्तीय वर्ष के लिए बिजली की नई दरें तय करने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। बिजली कंपनियों को 30 नवंबर तक वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) का प्रस्ताव दाखिल करना होगा। इसके बाद नियामक आयोग इन प्रस्तावों के आधार पर बिजली की दरों को लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू करेगा। ऐसे में प्रदेश के घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले समय में बिजली सस्ती होगी या महंगी।
दरअसल, बिजली कंपनियां हर साल अपनी आय और खर्च का हिसाब आयोग के सामने रखती हैं। इसी आधार पर बिजली की नई दरें निर्धारित की जाती हैं। लेकिन इस बार प्रस्ताव दाखिल होने से पहले ही उपभोक्ता हितों से जुड़े पुराने आदेशों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
पुराने आदेशों के पालन पर उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल
पिछली बार बिजली दरें निर्धारित करते समय नियामक आयोग ने उपभोक्ताओं की सुविधाओं को लेकर कई निर्देश दिए थे। इनमें बिजली संबंधी शिकायतों के लिए टोल फ्री नंबर 1912 पर मिलने वाली शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने का आदेश भी शामिल था। हालांकि, उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि पावर कॉरपोरेशन ने अब तक इस दिशा में जरूरी व्यवस्था नहीं बनाई है।
इसके अलावा एक किलोवॉट के घरेलू बिजली कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को घर में छोटी व्यावसायिक गतिविधियां चलाने के लिए अलग वाणिज्यिक कनेक्शन लेने से छूट देने के मामले में भी आयोग ने प्रस्ताव मांगा था। परिषद का कहना है कि इस संबंध में भी अब तक कोई ठोस नीति सामने नहीं आई है।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने चेतावनी दी है कि यदि पुराने आदेशों पर फैसला किए बिना बिजली कंपनियां एआरआर दाखिल करती हैं तो परिषद इस पर आपत्ति दर्ज कराएगा। परिषद आयोग से मांग करेगा कि पुराने निर्देशों का पालन होने तक प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए जाएं।
संविदा कर्मचारियों के मामले में भी हुई कार्रवाई
पिछली टैरिफ प्रक्रिया के दौरान बिजली विभाग में संविदा कर्मचारियों की छंटनी का मुद्दा भी सामने आया था। कर्मचारियों की कमी के कारण उपभोक्ताओं को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ने वाले असर को लेकर नियामक आयोग ने गंभीरता से विचार करने के निर्देश दिए थे। इस मामले में पावर कॉरपोरेशन की ओर से कुछ सकारात्मक कदम उठाए जाने की जानकारी सामने आई है।
नवंबर में बिजली बिल पर मिल रही 9.17 फीसदी की राहत
नई बिजली दरों की प्रक्रिया के बीच उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर भी है। नवंबर महीने के बिजली बिल में उपभोक्ताओं को 9.17 फीसदी की छूट दी जा रही है। यह राहत ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार (FPPAAS) के तहत मिलेगी। इससे बिल में लगने वाला शुल्क कम होगा और घरेलू, व्यावसायिक समेत अन्य श्रेणियों के उपभोक्ताओं को फायदा मिलेगा।
इससे पहले जुलाई में 4.43 फीसदी, अगस्त में 2.92 फीसदी, सितंबर में 7.93 फीसदी और अक्टूबर में 5.24 फीसदी की छूट दी गई थी। नवंबर में यह राहत बढ़कर 9.17 फीसदी हो गई है।
इस व्यवस्था के तहत जब बिजली खरीद और ईंधन की वास्तविक लागत निर्धारित लागत से कम होती है तो उसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है। अब देखना होगा कि आगामी एआरआर प्रस्तावों के बाद उत्तर प्रदेश में बिजली की नई दरें किस स्तर पर तय होती हैं।
Satya Report Disclaimer: यह रिपोर्ट उपलब्ध समाचार जानकारियों पर आधारित है। बिजली की नई दरों को लेकर अंतिम फैसला नियामक आयोग द्वारा लिया जाएगा।



