
श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के बेमिना इलाके में आधी रात को भीषण अग्निकांड ने भारी तबाही मचा दी। दुर्बल इलाके में लगी आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते करीब 80 अस्थायी झुग्गियां जलकर राख हो गईं। इस हादसे में दो लोगों की जान चली गई। मृतकों में एक 16 वर्षीय किशोर भी शामिल है। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जानकारी के मुताबिक, आग 3 और 4 नवंबर की दरमियानी रात करीब 12 बजकर 23 मिनट पर लगी थी। बस्ती में ज्यादातर झुग्गियां लकड़ी और तिरपाल से बनी हुई थीं। इनमें मौजूद ज्वलनशील सामान के कारण आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया। जब तक दमकल विभाग की टीमों को सूचना मिली, तब तक आग कई झुग्गियों को अपनी चपेट में ले चुकी थी।
कई दमकल केंद्रों की टीमों ने संभाला मोर्चा
आग की सूचना मिलते ही जेवीसी और रावलपोरा फायर स्टेशन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। इसके बाद बटामालू स्थित फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज मुख्यालय से भी अतिरिक्त सहायता भेजी गई। अधिकारियों के समन्वय में कई दमकल केंद्रों की गाड़ियों और कर्मचारियों ने आग बुझाने का अभियान चलाया।
आग की तेज लपटों और अत्यधिक गर्मी का असर पास में स्थित एक खाली पोल्ट्री फार्म पर भी पड़ा। यह इमारत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। दमकलकर्मियों को आग पर काबू पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। काफी प्रयासों के बाद आग को फैलने से रोका जा सका।
मलबे के नीचे मिले दो लोगों के शव
आग बुझने के बाद जब खोज और बचाव अभियान चलाया गया तो मलबे के नीचे दो जले हुए शव बरामद हुए। मृतकों की पहचान 27 वर्षीय मोहम्मद नूर आलम और 16 वर्षीय अल अमीन के रूप में हुई है।
मोहम्मद नूर आलम के पिता का नाम अब्दल वहाब बताया गया है। वह मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले थे और फिलहाल दुर्बल इलाके में रह रहे थे। वहीं, दूसरे मृतक अल अमीन के पिता का नाम मोहम्मद रफी है। वह भी दिल्ली के रहने वाले थे और वर्तमान में कुपवाड़ा में रह रहे थे। दोनों ही स्थानीय स्तर पर कबाड़ बीनने का काम करते थे।
पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपे जाएंगे शव
घटनास्थल पर फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की टीम ने जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कीं और निरीक्षण किया। इसके बाद कानूनी औपचारिकताओं के लिए दोनों शव पुलिस को सौंप दिए गए। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।
अधिकारियों ने अग्निकांड के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। फिलहाल इस घटना में करीब 80 झुग्गियों के जलने और दो लोगों की मौत से इलाके में शोक का माहौल है।
सतर्कता और सुरक्षा जरूरी
घनी आबादी वाली अस्थायी बस्तियों में लकड़ी, प्लास्टिक और तिरपाल जैसी ज्वलनशील सामग्री के इस्तेमाल से आग लगने पर नुकसान तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे इलाकों में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच बेहद जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध समाचार रिपोर्टों और अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। जांच के बाद घटना से जुड़े अन्य तथ्य सामने आ सकते हैं।
Satya Report



