
बाड़मेर, राजस्थान: देशभर में बिजली पहुंचाने और हर घर को रोशन करने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में आज भी हजारों परिवार अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। हैरानी की बात यह है कि इन इलाकों में बिजली पहुंचाने के लिए 182 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट चल रहा है, इसके बावजूद 34 हजार से अधिक ढाणियों में अब तक बिजली नहीं पहुंच पाई है। ग्रामीणों ने ठेकेदारों की लापरवाही और बिजली कनेक्शन के नाम पर अवैध वसूली के आरोप लगाए हैं।
बाड़मेर जिले के रामसर क्षेत्र के नील्सर, राठौड़ का तला और कुंतल का पार सहित कई सीमावर्ती इलाकों में बिजली की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि कई साल पहले आवेदन करने और निर्धारित राशि जमा कराने के बावजूद उन्हें बिजली कनेक्शन नहीं मिला। शाम होते ही इन बस्तियों में अंधेरा छा जाता है और लोगों को वैकल्पिक साधनों के सहारे रात गुजारनी पड़ती है।
182 करोड़ का प्रोजेक्ट, हजारों ढाणियां अब भी वंचित
डिस्कॉम की आरडीएसएस योजना के एईएन नवल किशोर मीणा के मुताबिक, बाड़मेर जिले में करीब 34 हजार ढाणियां बिजली कनेक्शन से वंचित हैं। इनमें से अब तक लगभग 4 हजार ढाणियों को ही बिजली से जोड़ा जा सका है।
इस काम के लिए 182 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। योजना के तहत सबसे पहले जनजातीय क्षेत्रों की ढाणियों में कनेक्शन देने का काम किया जा रहा है। इसके लिए 15 महीने की समयसीमा निर्धारित की गई थी, जिसमें से लगभग 6 से 7 महीने शेष बताए गए हैं। विभाग का कहना है कि निर्धारित समय में बाकी इलाकों तक भी बिजली पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
नील्सर में 2017 से बिजली का इंतजार
रामसर तहसील के अभे का पार यानी नील्सर इलाके में कुछ ग्रामीण साल 2017 से बिजली कनेक्शन मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, हाल ही में कुछ ढाणियों को बिजली से जोड़ा गया है, लेकिन अभी भी करीब 5 से 7 ढाणियां इससे वंचित हैं।
लंबे इंतजार के बावजूद बिजली नहीं मिलने के कारण लोगों को सोलर प्लेटों के सहारे अपना काम चलाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के बावजूद उनकी बस्तियों तक बिजली पहुंचने का इंतजार खत्म नहीं हुआ है।
राठौड़ का तला में रसीद कटवाने के बाद भी नहीं मिला कनेक्शन
जुगवा गांव के राठौड़ का तला इलाके में करीब 35 से 40 ढाणियों के लोग बिजली की सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कनेक्शन के लिए 200-200 रुपये की रसीदें कटवाई थीं और जरूरी दस्तावेज भी जमा कराए थे।
इसके बावजूद सभी ढाणियों तक बिजली नहीं पहुंची। ग्रामीणों का आरोप है कि पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले ठेकेदारों ने अपनी सुविधा के अनुसार कुछ बस्तियों में काम कराया, जबकि बाकी परिवारों को इंतजार करने के लिए छोड़ दिया गया।
कुंतल का पार में लकड़ी के खंभों के सहारे बिजली
मिठड़ा वीरमियां इलाके में करीब 50 घरों की आबादी है। यहां बिजली के खंभे नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने खुद लकड़ी के खंभे लगाकर बिजली की तारें खींच रखी हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इन तारों की स्थिति बेहद खराब है और किसी भी समय दुर्घटना हो सकती है। ग्रामीणों को सुरक्षित बिजली व्यवस्था मिलने के बजाय खुद के इंतजामों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
ठेकेदारों पर मनमानी और अवैध वसूली के आरोप
सीमावर्ती इलाकों में बिजली पहुंचाने के लिए सरकारी स्तर पर टेंडर जारी किए गए हैं, लेकिन ग्रामीणों ने काम कर रहे ठेकेदारों और पेटी कॉन्ट्रैक्टर्स पर मनमानी के आरोप लगाए हैं।
कुछ ग्रामीणों का दावा है कि बिजली कनेक्शन देने के नाम पर उनसे अतिरिक्त पैसे मांगे जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ग्रामीणों की मांग है कि पूरे प्रोजेक्ट की जांच कराई जाए और जिन परिवारों ने आवेदन व निर्धारित शुल्क जमा किया है, उन्हें जल्द बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि 182 करोड़ रुपये की योजना के बावजूद हजारों ढाणियों तक बिजली पहुंचने में इतनी देरी क्यों हो रही है और ग्रामीणों की शिकायतों पर जिम्मेदार अधिकारी कब कार्रवाई करेंगे?
Satya Report Disclaimer: यह खबर उपलब्ध ग्राउंड रिपोर्ट और विभागीय जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। ठेकेदारों पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।



