भारत में एक ऐसा गांव भी है जहां अंतरराष्ट्रीय सीमा किसी मैदान या नदी से नहीं, बल्कि गांव के मुखिया के घर के बीच से होकर गुजरती है. यह गांव है नागालैंड का लोंगवा, जहां एक ही बस्ती का हिस्सा भारत में है और दूसरा म्यांमार में. उस गांव का नाम है लोंगवा. लोंगवा नागालैंड के मोन जिले में भारतम्यांमार सीमा पर बसा है. मोन जिला प्रशासन के मुताबिक यह जिले के सबसे बड़े गांवों में से एक है. चारों ओर हरीभरी पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा यह गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है.

यहां की सबसे खास बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा गांव के बीच से होकर गुजरती है, जिससे बस्ती का एक हिस्सा भारत में और दूसरा म्यांमार में पड़ता है. इसी वजह से इसे देश के सबसे अनोखे सीमावर्ती गांवों में गिना जाता है.
कौन हैं कोन्याक नागा?
लोंगवा कोन्याक नागा समुदाय का घर है. कोन्याक नागा नागालैंड की प्रमुख जनजातियों में से एक हैं और अपनी अलग संस्कृति, परंपराओं और रहनसहन के लिए पहचाने जाते हैं. यहां के लोग सदियों से इसी इलाके में बसे हैं. उनके लिए सीमा रेखा बाद में खींची गई एक लकीर है, जबकि रिश्ते, परंपराएं और सामुदायिक जीवन उससे कहीं पुराने हैं.
लोंगवा गांव में रहने वाले कोन्याक नागा समुदाय के लोग. फोटो: PTI
कौन होता है ‘आंघ’?
इस गांव की पहचान जिस पद से सबसे ज्यादा जुड़ी है, वह है ‘आंघ’. आंघ कोन्याक नागा समुदाय का पारंपरिक वंशानुगत मुखिया होता है. यह पद रीतिरिवाजों के अनुसार चलता है और गांव की पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है. गांव के सामाजिक और सांस्कृतिक मामलों में आंघ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. लोंगवा के आंघ का घर ही वह जगह है, जिसके बीच से अंतरराष्ट्रीय सीमा गुजरती बताई जाती है. यानी घर का एक हिस्सा भारत में है और दूसरा म्यांमार में. यही बात इस गांव को दुनियाभर के सैलानियों और शोधकर्ताओं की दिलचस्पी का केंद्र बनाती है.
हरीभरी पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा लोंगवा गांव. फोटो: Instagram
गांव से गुजरती हैं चार नदियां
सीमा के अलावा लोंगवा अपनी प्राकृतिक बनावट के लिए भी जाना जाता है. मोन जिला प्रशासन की पर्यटन वेबसाइट के अनुसार गांव से चार नदियां बहती हैं. इनमें दो नदियां भारतीय हिस्से में हैं, जबकि दो म्यांमार वाले हिस्से में. यानी इस गांव में सीमा के साथसाथ जलधाराएं भी दो देशों में बंटी हुई हैं.
यह गांव कोन्याक संस्कृति की जीवंत झलक भी पेश करता है. फोटो: PTI
क्यों खास है लोंगवा?
लोंगवा की खासियत सिर्फ उसकी भौगोलिक स्थिति नहीं है. यह गांव कोन्याक संस्कृति की जीवंत झलक भी पेश करता है. यहां की लकड़ी की कारीगरी, पारंपरिक पहनावा और सामुदायिक जीवन देखने लायक है. इसी वजह से नागालैंड आने वाले कई पर्यटक मोन जिले का रुख करते हैं, ताकि वे इस दुर्लभ सीमावर्ती गांव को करीब से देख सकें.
सीमा पर बसे गांवों की अनोखी कहानी
भारत और म्यांमार के बीच की सीमा कई जनजातीय समुदायों की बस्तियों से होकर गुजरती है. इन समुदायों के परिवार और रिश्तेदार अक्सर सीमा के दोनों ओर रहते हैं. लोंगवा इसी साझा विरासत का सबसे चर्चित उदाहरण है, जहां एक ही गांव के लोग दो देशों में बंटे दिखते हैं, फिर भी एक ही संस्कृति से जुड़े रहते हैं.



