उत्तर प्रदेश में, पंचायत चुनावों के लिए मतदाता सूची राज्य चुनाव आयोग द्वारा तैयार की जाती है, जबकि विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए मतदाता सूची भारत निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र में तैयार की जाती है. इन दोनों संस्थाओं द्वारा अपनीअपनी मतदाता सूचियां तैयार करने की प्रक्रियाएं, समयसीमा और सत्यापन के तरीके अलगअलग हैं. नतीजतन, दोनों सूचियों में दर्ज मतदाताओं की संख्या में अंतर आ गया है.

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विधानसभा चुनाव की अंतिम मतदाता सूची में लगभग 13.39 करोड़ मतदाता हैं, जबकि पंचायत चुनाव की सूची में लगभग 12.58 करोड़ नाम शामिल हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 2.4 करोड़ मतदाताओं के इस अंतर को लेकर फिलहाल एक अलग जांच चल रही है. इस बड़े अंतर और आगामी चुनावों को देखते हुए, एक अहम सवाल खड़ा हो गया है: क्या 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले यूपी की मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नाम जोड़े या हटाए जाएंगे?
वोटर लिस्ट में 2.4 करोड़ का अंतर कैसे आया?
दरअसल, पंचायत चुनावों के लिए मतदाता सूची उत्तर प्रदेश राज्य चुनाव आयोग तैयार करता है, जबकि विधानसभा चुनावों के लिए मतदाता सूची भारत निर्वाचन आयोग की देखरेख में तैयार की जाती है. हालांकि, दोनों सूचियों को तैयार करने की प्रक्रिया अलगअलग होने के कारण आंकड़ों में अंतर हो सकता है, लेकिन ग्रामीण मतदाताओं की संख्या में लगभग 24 मिलियन का अंतर चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूचियों की सटीकता पर सवाल खड़े करता है. अब चुनाव आयोग ने दोनों सूचियों का मिलान करने का फैसला किया है. इस संदर्भ में, जिला स्तर पर सामने आने वाले आंकड़े और इन अंतरों के वास्तविक कारण काफी महत्वपूर्ण होंगे.
SIR और मतदाता सूचियों के नियमित पुनरीक्षण
‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ और मतदाता सूचियों के नियमित पुनरीक्षण जैसी प्रक्रियाओं ने इस बहस को और हवा दे दी है. एक मीडिया रिपोर्ट में यूपी के ग्रामीण/पंचायत चुनावों की मतदाता सूचियों और भारत निर्वाचन आयोग के डेटाबेस के बीच एक बड़ा अंतर सामने आया है. ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के लिए तैयार की गई सूचियों और विधानसभा चुनावों के लिए ECI द्वारा रखी गई सूचियों के बीच का यह सांख्यिकीय अंतर एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती पेश करता है.
वोटर लिस्ट में अंतर गंभीर सवाल
हाल ही में हुई ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ प्रक्रिया के दौरान, उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर नामों का सत्यापन किया गया और कई नाम हटाए गए. इससे दोनों मतदाता सूचियों के बीच तालमेल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अब चुनाव आयोग डेटा का मिलान कर रहा है ताकि एकरूपता सुनिश्चित की जा सके और इन विसंगतियों को दूर किया जा सके. ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ बनाम नियमित मतदाता सूची पुनरीक्षण: इनमें मुख्य अंतर क्या हैं? चुनाव आयोग मुख्य रूप से मतदाता सूचियों को बेहतर बनाने और अपडेट करने के लिए दो तरह की प्रक्रियाओं का उपयोग करता है. एक मानक प्रक्रिया है, और दूसरी ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ है. इन दोनों के बीच बहुत बड़ा अंतर है.
कितने पात्र वोटर लिस्ट में शामिल नहीं?
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिन्वा ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों का मिलान पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों की मतदाता सूचियों से करें. इस प्रक्रिया के दौरान, यह पता लगाया जाएगा कि कितने पात्र नागरिक विधानसभा की वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हैं. जिन लोगों की पात्रता की पुष्टि हो जाएगी, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. यह पहल ‘विशेष सारांश पुनरीक्षण2027’ का हिस्सा होगी.



