
फैशन और खूबसूरती के लिए कानों में पियर्सिंग कराना आम बात है। कई महिलाएं कान के निचले हिस्से के अलावा ऊपरी हिस्से में भी कई छेद करवाती हैं। लेकिन कभी-कभी छोटी सी दिखने वाली यह प्रक्रिया परेशानी का कारण बन सकती है। एक महिला के साथ भी ऐसा ही हुआ, जिसे कानों की पियर्सिंग कराने के बाद गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
ऊपरी हिस्से में कराई थी पियर्सिंग
महिला को कान छिदवाने का काफी शौक था। इसी शौक के चलते उसने कान के ऊपरी हिस्से में पियर्सिंग कराई। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगा, लेकिन कुछ समय बाद उसके कानों में दर्द और सूजन होने लगी।
महिला को उम्मीद थी कि कुछ दिनों में परेशानी अपने आप ठीक हो जाएगी। मगर समय बीतने के साथ उसकी स्थिति में सुधार होने के बजाय समस्या बढ़ती चली गई। कानों में सूजन के साथ घाव बनने लगे और संक्रमण जैसी परेशानी सामने आने लगी।
दर्द और खून निकलने से बढ़ी परेशानी
स्थिति बिगड़ने पर महिला को डॉक्टरों से संपर्क करना पड़ा। उसे लंबे समय तक इलाज कराना पड़ा। बताया गया कि उसके कानों से कई बार खून भी निकलने लगता था। दर्द और सूजन के कारण उसकी परेशानी लगातार बनी हुई थी।
इलाज से धीरे-धीरे सुधरी हालत
डॉक्टरों के उपचार के बाद महिला की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार आने लगा। सूजन और दर्द कम हुए तथा घाव भी ठीक होने लगे। काफी समय तक इलाज कराने के बाद उसे राहत मिली।
पियर्सिंग से पहले इन बातों का रखें ध्यान
कान छिदवाने के बाद हर व्यक्ति को ऐसी परेशानी हो, यह जरूरी नहीं है। हालांकि, संक्रमण और अन्य जटिलताओं का खतरा बना रह सकता है। इसलिए पियर्सिंग हमेशा साफ-सुथरी और प्रशिक्षित जगह से ही करानी चाहिए।
- पियर्सिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण पूरी तरह स्टरलाइज होने चाहिए।
- घाव को बिना हाथ साफ किए नहीं छूना चाहिए।
- पियर्सिंग वाली जगह की सफाई के लिए विशेषज्ञ की सलाह माननी चाहिए।
- अधिक दर्द, बढ़ती सूजन, पस, बुखार या लगातार खून निकलने पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
- घाव ठीक होने से पहले कानों के आभूषण बार-बार बदलने से बचना चाहिए।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध रिपोर्ट में बताई गई घटना पर आधारित है। पियर्सिंग के बाद संक्रमण या असामान्य लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपायों के बजाय चिकित्सकीय सलाह लें।



