
उज्जैन, मध्य प्रदेश: गर्मी से बचने के लिए आजकल ज्यादातर घरों में एयर कंडीशनर का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन मध्य प्रदेश के उज्जैन में दो भाइयों ने घर को प्राकृतिक तरीके से ठंडा रखने का एक अनोखा प्रयोग शुरू किया है। इस मकान की खासियत यह है कि इसमें ठंडक पहुंचाने के लिए जमीन के करीब 10 फीट नीचे से हवा गुजारने की व्यवस्था बनाई जा रही है। इस पहल में पारंपरिक निर्माण सामग्री और आधुनिक तकनीक को एक साथ इस्तेमाल किया जा रहा है।
IIT से पढ़े भाइयों ने तैयार किया अनोखा डिजाइन
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मकान को उज्जैन के संत नगर में प्रतीक यादव और उनके भाई ऋतिक यादव तैयार कर रहे हैं। प्रतीक ने IIT मुंबई और ऋतिक ने IIT खड़गपुर से पढ़ाई की है। दोनों भाइयों का उद्देश्य पारंपरिक भारतीय निर्माण पद्धतियों को आधुनिक जरूरतों के साथ जोड़ना है।
करीब पांच महीने से निर्माणाधीन इस मकान में सीमेंट और आधुनिक निर्माण सामग्री पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय मिट्टी, गोबर, चूना और पारंपरिक कवेलू जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
35 टन मिट्टी और गोबर से तैयार हो रही दीवारें
इस घर की दीवारों पर पीली मिट्टी और गोबर का लेप किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण में करीब 35 टन मिट्टी और गोबर का इस्तेमाल किया जा रहा है। दीवारों की लिपाई और प्लास्टर के लिए मिट्टी, गोबर तथा चूने का मिश्रण तैयार किया गया है। इसमें लगभग 40 प्रतिशत चूने का उपयोग किए जाने की जानकारी दी गई है।
छत पर गुजरात से मंगवाए गए मिट्टी के कवेलू लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश से रेड ब्रिक्स और ब्लैक स्टोन लाए गए हैं। दरवाजों और खिड़कियों में पुराने मकानों से निकाली गई सागौन की लकड़ी का दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा है।
जमीन के 10 फीट नीचे से आएगी हवा
इस मकान की सबसे खास व्यवस्था अर्थ टनल सिस्टम है। इसके तहत जमीन के करीब 10 फीट नीचे तीन एयर डक्ट बनाए गए हैं। इन पाइपों की लंबाई लगभग 80 से 90 फीट रखने की योजना है।
पाइपों के मुहाने पर पंखे लगाए जाएंगे, जो बाहर की हवा को खींचकर जमीन के नीचे बिछे रास्तों से घर के भीतर पहुंचाने में मदद करेंगे। इस तकनीक के पीछे विचार यह है कि जमीन के अंदर से गुजरते समय हवा का तापमान आसपास की मिट्टी के प्रभाव से कम हो सकता है। इसके बाद इस हवा को घर के कमरों और बैठक तक पहुंचाया जाएगा।
इस व्यवस्था से गर्मियों में घर के अंदर का तापमान कम रखने और एयर कंडीशनर पर निर्भरता घटाने की उम्मीद है।
बाहर से 4 से 5 डिग्री कम तापमान रहने का दावा
प्रतीक और ऋतिक के मुताबिक, प्राकृतिक निर्माण सामग्री और घर की खास डिजाइन के कारण अंदर का तापमान बाहर की तुलना में करीब 4 से 5 डिग्री तक कम रह सकता है।
हालांकि, यह अंतर मौसम, बाहरी तापमान, हवा में नमी, मिट्टी की प्रकृति और निर्माण की गुणवत्ता जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा। अर्थ टनल सिस्टम से कितनी ठंडक मिलेगी, इसका वास्तविक आकलन घर के पूरी तरह तैयार होने और इस्तेमाल के बाद ही हो सकेगा।
पारंपरिक तकनीक से बदल सकता है घर बनाने का तरीका?
बढ़ती गर्मी और बिजली की खपत के बीच उज्जैन में बन रहा यह मकान एक दिलचस्प प्रयोग है। इसमें पुराने समय की निर्माण पद्धतियों को आधुनिक जरूरतों के हिसाब से इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है।
अगर यह प्रयोग उम्मीद के मुताबिक सफल रहता है, तो भविष्य में प्राकृतिक सामग्री और जमीन के तापमान का उपयोग करके घरों को अधिक आरामदायक बनाने के नए रास्ते खुल सकते हैं।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। तापमान में कमी से जुड़े आंकड़े निर्माणकर्ताओं के दावे हैं, जिनकी वास्तविक पुष्टि मकान के उपयोग के बाद ही हो सकेगी।



