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पुरानी​​​ मस्जिद में परछाईं दिखने के दावे, अजीब​​​​​​ आवाजों की भी होती है चर्चा; जानिए क्यों शाम के बाद नहीं मिलता प्रवेश

पुरानी​​​ मस्जिद में परछाईं दिखने के दावे, अजीब​​​​​​ आवाजों की भी होती है चर्चा; जानिए क्यों शाम के बाद नहीं मिलता प्रवेश

महरौली, दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में कई ऐसी ऐतिहासिक इमारतें हैं, जिनका इतिहास बेहद दिलचस्प है। इन्हीं में एक है जमाली-कमाली मस्जिद, जो अपनी खूबसूरत वास्तुकला के साथ-साथ रहस्यमयी कहानियों के लिए भी जानी जाती है। यहां आने वाले कुछ लोगों ने अजीब आवाजें सुनने, किसी अनदेखी मौजूदगी का एहसास होने और परछाईं दिखाई देने जैसे दावे किए हैं।

इन कहानियों की वजह से इस मस्जिद को दिल्ली की कथित भूतिया जगहों में गिना जाने लगा है। हालांकि, यहां किसी भूत या पैरानॉर्मल गतिविधि के होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक मस्जिद का इतिहास और इससे जुड़ी रहस्यमयी कहानियां।

कहां स्थित है जमाली-कमाली मस्जिद?

जमाली-कमाली मस्जिद दिल्ली के महरौली पुरातत्व पार्क में स्थित है। यह कुतुब मीनार परिसर के नजदीक मौजूद एक ऐतिहासिक स्मारक है। इसका निर्माण 16वीं शताब्दी में कराया गया था।

इतिहास के अनुसार, इस मस्जिद का संबंध सूफी संत और कवि शेख फजलुल्लाह से है, जिन्हें जमाली के नाम से भी जाना जाता था। मस्जिद के साथ ही उनका मकबरा और कमाली नाम से पहचाने जाने वाले व्यक्ति की कब्र भी मौजूद है।

इस परिसर का निर्माण लगभग 1528 से 1536 के बीच हुआ माना जाता है। जमाली की मृत्यु 1535 में हुई थी। हालांकि, कमाली की वास्तविक पहचान को लेकर इतिहासकारों के बीच अलग-अलग मत हैं।

आखिर क्यों दिखाई देती है यहां परछाईं?

इस मस्जिद से जुड़ी सबसे चर्चित कहानियों में अनदेखी परछाईं और किसी के आसपास मौजूद होने का एहसास शामिल है। कुछ आगंतुकों ने दावा किया है कि उन्हें किसी खंभे के पीछे कोई व्यक्ति झांकता हुआ दिखाई दिया, लेकिन जब उन्होंने वहां जाकर देखा तो कोई मौजूद नहीं था।

कुछ लोगों ने खाली परिसर में हंसने जैसी आवाजें सुनने और किसी अदृश्य ताकत के थप्पड़ मारने का दावा भी किया है। इन घटनाओं की वजह से मस्जिद के बारे में डरावनी कहानियां फैलती गईं।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यहां ड्यूटी करने वाले एक सुरक्षा गार्ड ने भी बताया था कि दिन और रात में ड्यूटी के दौरान उसे कभी ऐसी किसी असामान्य गतिविधि का अनुभव नहीं हुआ। उसके मुताबिक, ये बातें बनाई गई कहानियां हो सकती हैं।

क्या सचमुच यहां जाने पर लगी है पाबंदी?

जमाली-कमाली मस्जिद को लेकर अक्सर कहा जाता है कि यहां जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन यह जानकारी सही नहीं है। मस्जिद महरौली पुरातत्व पार्क के परिसर में स्थित है और पर्यटक पार्क के निर्धारित समय में यहां जा सकते हैं।

हालांकि, सूर्यास्त के बाद पार्क बंद हो जाता है और रात में प्रवेश की अनुमति नहीं होती। मस्जिद की कुछ सीढ़ियों और मकबरे वाले हिस्सों को भी संरक्षण के कारण बंद रखा गया है। ऐतिहासिक इमारत को नुकसान और तोड़फोड़ से बचाने के लिए ये पाबंदियां लगाई गई हैं।

यहां शुक्रवार की नमाज पर भी रोक लगाए जाने की जानकारी सामने आई है, जिसका संबंध स्मारक के संरक्षण से बताया गया है।

मस्जिद के अंदर क्या है खास?

जमाली-कमाली मस्जिद अपनी पुरानी वास्तुकला के लिए भी महत्वपूर्ण है। यहां लाल पत्थर से बनी संरचना, मेहराब और ऐतिहासिक मकबरा देखने को मिलता है। इसकी बनावट शुरुआती मुगलकालीन स्थापत्य शैली की झलक दिखाती है।

मस्जिद के आसपास महरौली पुरातत्व पार्क में कई अन्य ऐतिहासिक इमारतें और खंडहर भी मौजूद हैं। इस वजह से यह स्थान इतिहास और पुरानी वास्तुकला में रुचि रखने वाले लोगों के लिए खास है।

क्या मस्जिद में सचमुच भूत या जिन्न रहते हैं?

जमाली-कमाली मस्जिद को लेकर जिन्न और अदृश्य शक्तियों से जुड़ी कई मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ लोग यहां अजीब आवाजें सुनने और अनदेखी मौजूदगी महसूस करने का दावा करते हैं।

लेकिन इन कहानियों के समर्थन में कोई प्रमाणित वैज्ञानिक जांच या ठोस सबूत उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें ऐतिहासिक तथ्य के बजाय स्थानीय मान्यताओं और आगंतुकों के अनुभवों के रूप में ही देखना चाहिए।

जमाली-कमाली मस्जिद की असली पहचान उसका ऐतिहासिक महत्व और स्थापत्य कला है। रहस्यमयी कहानियों ने जरूर इसे चर्चा में ला दिया है, लेकिन इसकी विरासत को समझने के लिए इसके इतिहास को जानना ज्यादा जरूरी है।

Satya Report डिस्क्लेमर: मस्जिद में परछाईं, अदृश्य थप्पड़ और जिन्न से जुड़ी बातें लोगों के दावों और प्रचलित मान्यताओं पर आधारित हैं। इन घटनाओं की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐतिहासिक जानकारी उपलब्ध पर्यटन और विरासत संबंधी स्रोतों के आधार पर दी गई है।

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