BusinessIndia

​अमेरिका से एशिया तक मचा हाहाकार, फिर भी गुलजार रहा भारत का शेयर बाजार

Share Market Today: दुनिया भर के शेयर बाजारों में इस वक्त भारी कोहराम मचा हुआ है. अमेरिकी बाजार वॉल स्ट्रीट से शुरू हुई बिकवाली की सुनामी ने शुक्रवार सुबह एशियाई बाजारों को अपनी चपेट में ले लिया. जापान का निक्केई 7 फीसदी तक लुढ़क गया, ताइवान का बाजार 9 फीसदी टूट गया, वहीं दक्षिण कोरिया के कोस्पी में 9 फीसदी की भारी गिरावट आ गई. कोरिया में हालात इतने बिगड़ गए कि शुरुआती कारोबार में 8.55 फीसदी की गिरावट के बाद सर्किट ब्रेकर लगाना पड़ा. वहां ट्रेडिंग को 20 मिनट के लिए पूरी तरह रोक दिया गया. लेकिन इस ग्लोबल तबाही के बीच भारतीय शेयर बाजार चट्टान की तरह मजबूत खड़ा नजर आया.

​अमेरिका से एशिया तक मचा हाहाकार, फिर भी गुलजार रहा भारत का शेयर बाजार

विदेशी निवेशकों की बंपर खरीदारी से चमका भारतीय बाजार

जब अमेरिका से लेकर एशिया तक के बाजार लाल निशान में गोते लगा रहे थे, तब भारतीय बाजार ने अपने निवेशकों को कोई झटका नहीं लगने दिया. हालांकि सुबह गिफ्ट निफ्टी ने कमजोर शुरुआत के संकेत दिए थे, लेकिन बाजार खुलते ही भारतीय शेयरों ने अपनी ताकत दिखा दी. सुबह 9 बजकर 34 मिनट पर सेंसेक्स 220.38 अंक की शानदार बढ़त के साथ 79,530.39 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. वहीं निफ्टी भी शुरुआती दबाव से उबरकर 5.31 अंक की हल्की बढ़त के साथ 24,541.90 पर हरे निशान में आ गया.

सेंसेक्स के शेयरों में M&M सबसे आगे रहा, जिसमें 2.30% की तेजी आई. इंफोसिस 2.01%, टेक महिंद्रा 1.34%, TCS 1.30% और HCL टेक्नोलॉजीज 1.26% ऊपर रहे. वहीं पावर ग्रिड के शेयरों में 2.24% की गिरावट आई, जबकि बजाज फाइनेंस 2.14% नीचे गिरा. इंडिगो के शेयर भी 2 फीसदी फिसल गए.

इससे ठीक एक दिन पहले गुरुवार को भी सेंसेक्स ने अप्रैल के बाद की सबसे बड़ी एक दिनी उछाल दर्ज की थी. भारत के बाजार में इस मजबूती का सबसे बड़ा कारण विदेशी निवेशक हैं. विदेशी निवेशकों ने पिछले दो साल से ज्यादा के वक्त में भारतीय शेयरों में अब तक की सबसे बड़ी खरीदारी की है.

कैसे संभला भारत का शेयर बाजार?

दरअसल, अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजों से उम्मीद जगी है कि पश्चिमी एशिया में महीनों से चल रहा ईरान युद्ध खत्म हो सकता है. इस उम्मीद में कच्चे तेल की कीमतों में अप्रैल के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट आई है, जिसका सीधा फायदा भारत को मिल रहा है. इसके अलावा, अमेरिकी संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण बढ़ने से व्हाइट हाउस की नीतियों को लेकर अनिश्चितता कम हुई है. निवेशक अब जोखिम भरे एआई शेयरों से पैसा निकालकर भारत जैसे स्थिर बाजार में लगा रहे हैं.

वॉल स्ट्रीट पर चिप कंपनियों की पिटाई से बिगड़ा खेल

विदेशी बाजारों में आई इस गिरावट की शुरुआत गुरुवार को अमेरिकी बाजार से हुई. वहां S&P 500 इंडेक्स 4.4 फीसदी टूट गया. अप्रैल 2025 में टैरिफ से जुड़ी गिरावट के बाद ये इसका सबसे बुरा दिन था. वहीं नैस्डैक 100 में 6.4 फीसदी की बड़ी गिरावट आई, जिससे बाजार की वैल्यू एक ही दिन में 2.3 ट्रिलियन डॉलर घट गई. मार्च 2020 के बाद ये एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है.

अमेरिका में चिप शेयरों के पिटने के बाद निवेशकों ने पूरे एशिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों को बेचना शुरू कर दिया. ट्रेडरों को डर है कि अमेरिकी संसद में बहुमत हासिल करने वाली डेमोक्रेटिक पार्टी एआई इंडस्ट्री पर कड़े नियम थोप सकती है.

इस डर से हुई बिकवाली का सबसे बुरा असर सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स, एसके हाइनिक्स व ताइवान की कंपनी TSMC पर पड़ा. कोरिया में सैमसंग व एसके हाइनिक्स के शेयर 9 फीसदी से ज्यादा टूट गए. उधर जापान का निक्केई जून के अंत से ही गिर रहा है. अब ये अपने उच्चतम स्तर से 20 फीसदी नीचे आने की कगार पर है, जिसे ‘टेक्निकल बियर मार्केट’ माना जाता है.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply