
वाराणसी, उत्तर प्रदेश: आज का बनारस अपने भव्य मंदिरों, गंगा घाटों, संकरी गलियों और धार्मिक परंपराओं के लिए दुनिया भर में मशहूर है। लेकिन करीब 94 साल पहले काशी का नजारा कैसा था? उस दौर में लोग कैसे रहते थे, घाटों पर कैसी गतिविधियां होती थीं और शहर की गलियां कैसी दिखाई देती थीं? इन सवालों के जवाब 1930 में रिकॉर्ड किए गए एक दुर्लभ ऐतिहासिक फुटेज में देखने को मिलते हैं।
सोशल मीडिया पर इन दिनों पुराने बनारस की झलकियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं। करीब 1930 के इस फुटेज में गंगा के घाट, मणिकर्णिका घाट, काशी विश्वनाथ मंदिर, दुर्गा मंदिर, पुरानी इमारतें और उस समय की सड़कों पर होने वाली आवाजाही दिखाई देती है। इसे देखकर लोग काशी के उस पुराने स्वरूप को करीब से जान पा रहे हैं, जो आज काफी बदल चुका है।
गंगा घाटों पर दिखती थी आस्था की वही पुरानी रौनक
इस ऐतिहासिक फुटेज को जे. शिपली डिक्सन ने अपने कैमरे में रिकॉर्ड किया था। इसे ‘द भारत आर्काइव’ नाम के यूट्यूब चैनल पर साझा किया गया है। इसकी शुरुआत गंगा घाटों के दृश्यों से होती है। यहां बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक कपड़े पहने गंगा में स्नान करते और धार्मिक अनुष्ठान करते दिखाई देते हैं।
कुछ लोग सूर्य को जल अर्पित करते नजर आते हैं, तो कुछ घाट की सीढ़ियों पर बैठकर पूजा-पाठ में लगे हैं। इन दृश्यों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय भी काशी के घाट धार्मिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र हुआ करते थे। समय के साथ शहर का स्वरूप बदला, लेकिन गंगा और घाटों से जुड़ी आस्था आज भी काशी की पहचान बनी हुई है।
मणिकर्णिका घाट की भी मिली दुर्लभ झलक
इस फुटेज में मणिकर्णिका घाट का पुराना दृश्य भी देखने को मिलता है। यहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार होते दिखाई देते हैं। काशी की धार्मिक मान्यताओं में मणिकर्णिका घाट का विशेष स्थान है। इसे मोक्ष और जीवन-मृत्यु के चक्र से जोड़कर देखा जाता है।
करीब एक सदी पुराने इन दृश्यों से पता चलता है कि उस समय भी यह घाट शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
गलियों में बैलगाड़ियां और ऊंट थे आवाजाही का हिस्सा
पुराने बनारस की गलियों के दृश्य इस फुटेज को और खास बनाते हैं। इसमें संकरी सड़कें, पुरानी इमारतें और अपने रोजमर्रा के काम में व्यस्त लोग दिखाई देते हैं। आज जिन रास्तों पर कारें, बाइक और दूसरे आधुनिक वाहन नजर आते हैं, वहां उस दौर में बैलगाड़ियां और ऊंट भी आवाजाही का हिस्सा हुआ करते थे।
फुटेज में काशी विश्वनाथ मंदिर और दुर्गा मंदिर की झलक भी दिखाई गई है। मंदिरों के आसपास श्रद्धालुओं की मौजूदगी और पुरानी इमारतों की बनावट देखकर लोग उस समय के शहर की कल्पना कर सकते हैं।
सड़क किनारे सांप और नेवले की लड़ाई ने भी खींचा ध्यान
इस ऐतिहासिक फुटेज का एक और दिलचस्प दृश्य सड़क किनारे सांप और नेवले की लड़ाई का है। पुराने समय में इस तरह के दृश्य कई जगह लोगों के आकर्षण का केंद्र बनते थे। फुटेज में यह नजारा भी दर्ज है, जिसे देखकर आज के दर्शक उस दौर के मनोरंजन और जनजीवन के बारे में सोचने पर मजबूर हो जाते हैं।
कौन थे जे. शिपली डिक्सन?
जे. शिपली डिक्सन 1930 और 1940 के दशक में यात्रा करने वाले शौकिया फिल्म निर्माता थे। उन्होंने भारत और दक्षिण अमेरिका सहित कई देशों की यात्राएं कीं और वहां के शहरों, ऐतिहासिक स्थलों तथा आम लोगों के जीवन को अपने कैमरे में दर्ज किया।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने 1937 और 1938 के दौरान ब्रिटिश भारत के कई ऐतिहासिक शहरों का दौरा किया था। उनके संग्रह में दिल्ली, आगरा और फतेहपुर सीकरी जैसे स्थानों के दृश्य भी शामिल बताए जाते हैं।
करीब 94 साल पुराने बनारस के ये दृश्य केवल एक शहर की पुरानी झलक नहीं हैं, बल्कि उस दौर की जीवनशैली, धार्मिक परंपराओं, परिवहन और स्थापत्य को समझने का भी एक दुर्लभ अवसर देते हैं। यही वजह है कि काशी के पुराने स्वरूप को दिखाने वाला यह ऐतिहासिक संग्रह लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बना हुआ है।
Satya Report: यह लेख उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी और साझा किए गए फुटेज के विवरण पर आधारित है। पुराने दृश्यों से काशी के उस दौर की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत की झलक मिलती है।



