
महिलाओं की सेहत में यूरिनरी हेल्थ और व्यक्तिगत स्वच्छता की अहम भूमिका होती है। रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतें मूत्राशय और पेल्विक फ्लोर की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं। कई महिलाएं काम की व्यस्तता, यात्रा या सार्वजनिक शौचालय के इस्तेमाल के दौरान पेशाब से जुड़ी ऐसी गलतियां करती हैं, जिनसे परेशानी बढ़ सकती है।
गुरुग्राम की पोषण विशेषज्ञ लीमा महाजन के मुताबिक, पेशाब को लंबे समय तक रोकना, जल्दबाजी में जोर लगाना और गलत तरीके से बैठना जैसी आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। पेल्विक फ्लोर मांसपेशियां मूत्राशय, गर्भाशय और आसपास के अंगों को सहारा देती हैं। इन मांसपेशियों की कमजोरी से कुछ महिलाओं में पेशाब का रिसाव और पेल्विक स्वास्थ्य से जुड़ी दूसरी समस्याएं हो सकती हैं।
हालांकि, हर गलत आदत सीधे यूरिन इन्फेक्शन या पेल्विक फ्लोर की कमजोरी का कारण नहीं बनती। आइए जानते हैं पेशाब करते समय महिलाओं को किन चार आदतों से बचना चाहिए और ब्लैडर को स्वस्थ रखने के लिए क्या सावधानियां अपनानी चाहिए।
1. बिना जरूरत बार-बार पेशाब करने की कोशिश करना
कुछ महिलाएं थोड़ी-सी पेशाब की इच्छा होने पर भी बार-बार टॉयलेट जाने लगती हैं। कई बार वे सावधानी के तौर पर पहले ही मूत्राशय खाली करने की कोशिश करती हैं, जबकि वास्तव में इसकी जरूरत नहीं होती।
ऐसा लगातार करने से कुछ लोगों में मूत्राशय की सामान्य आदत प्रभावित हो सकती है। ब्लैडर थोड़ी मात्रा में पेशाब जमा होने पर भी खाली होने का संकेत देने लगता है। इससे बार-बार पेशाब जाने की आदत विकसित हो सकती है।
हालांकि, बार-बार पेशाब आने के पीछे ओवरएक्टिव ब्लैडर, यूरिन इन्फेक्शन, डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए इस लक्षण को केवल गलत आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
क्या करें: बिना जरूरत खुद को बार-बार पेशाब करने के लिए मजबूर न करें। शरीर के प्राकृतिक संकेतों पर ध्यान दें। यदि अचानक पेशाब की आवृत्ति बढ़ गई है या बार-बार तेज इच्छा होती है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
2. सार्वजनिक टॉयलेट में आधा झुककर पेशाब करना
सार्वजनिक शौचालयों में सीट गंदी होने के डर से कई महिलाएं पूरी तरह बैठने के बजाय हवा में आधा झुककर पेशाब करती हैं। इस स्थिति में पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां पूरी तरह आराम नहीं कर पातीं।
इससे कुछ महिलाओं को मूत्राशय खाली करने में परेशानी हो सकती है। लंबे समय तक ऐसी मुद्रा अपनाने से पेशाब की प्रक्रिया असहज भी हो सकती है।
क्या करें: जहां संभव हो, शौचालय की सीट को साफ करके आराम से बैठें। पैरों को जमीन पर टिकाएं और शरीर को थोड़ा आगे की ओर झुकाकर रखें। पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को आराम दें और जल्दबाजी न करें।
सार्वजनिक शौचालय में स्वच्छता का ध्यान रखें। जरूरत पड़ने पर टॉयलेट सीट को साफ करने के लिए उपयुक्त टिश्यू या सैनिटाइजिंग वाइप का इस्तेमाल कर सकती हैं।
3. घंटों तक पेशाब रोककर रखना
काम की व्यस्तता, लंबी यात्रा या आसपास शौचालय न होने के कारण कई महिलाएं लंबे समय तक पेशाब रोककर रखती हैं। कभी-कभार ऐसा हो जाना सामान्य है, लेकिन बार-बार लंबे समय तक पेशाब रोकने की आदत ठीक नहीं है।
इससे मूत्राशय में असहजता और दबाव महसूस हो सकता है। कुछ परिस्थितियों में पेशाब पूरी तरह खाली न होने की समस्या भी हो सकती है। पेशाब रोकने की आदत और यूरिन इन्फेक्शन के बीच संबंध को लेकर हर व्यक्ति में एक जैसा परिणाम नहीं होता, लेकिन ब्लैडर को नियमित रूप से खाली करना बेहतर है।
क्या करें: पेशाब की इच्छा होने पर बहुत देर तक टालने से बचें। यात्रा या काम के दौरान टॉयलेट जाने के लिए समय निकालें। दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और शरीर में पानी की कमी न होने दें।
4. पेशाब करते समय जोर लगाना
पेशाब करना शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया है। सामान्य स्थिति में इसके लिए ज्यादा जोर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन कुछ महिलाएं जल्दबाजी में या मूत्राशय को जल्दी खाली करने के लिए पेट और पेल्विक मांसपेशियों पर दबाव डालती हैं।
बार-बार जोर लगाकर पेशाब करना सामान्य आदत नहीं है। इसके पीछे मूत्राशय खाली करने में परेशानी, पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों में तालमेल की कमी या दूसरी चिकित्सकीय समस्या हो सकती है।
क्या करें: टॉयलेट में आराम से बैठें और शरीर को ढीला छोड़ें। पेशाब अपने आप होने दें, जबरदस्ती दबाव न डालें। अगर पेशाब पूरा नहीं निकल रहा है या बार-बार जोर लगाना पड़ता है, तो डॉक्टर से जांच कराएं।
महिलाओं को कैसे रखनी चाहिए ब्लैडर और पेल्विक फ्लोर की सेहत?
यूरिनरी हेल्थ को बेहतर बनाए रखने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतें मददगार हो सकती हैं:
- दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- पेशाब की इच्छा को बार-बार नजरअंदाज न करें।
- पेशाब के बाद आगे से पीछे की ओर सफाई करें, ताकि गुदा क्षेत्र के बैक्टीरिया मूत्रमार्ग तक पहुंचने का खतरा कम हो।
- निजी अंगों की सफाई के लिए तेज खुशबू वाले उत्पादों और कठोर केमिकल से बचें।
- कब्ज की समस्या को नजरअंदाज न करें, क्योंकि इससे पेल्विक फ्लोर पर दबाव बढ़ सकता है।
- पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज यानी कीगल एक्सरसाइज सही तरीके से करें। जरूरत पड़ने पर फिजियोथेरेपिस्ट से तरीका सीखें।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर पेशाब करते समय जलन या दर्द होता है, बार-बार पेशाब आता है, पेशाब में खून दिखाई देता है या पेट के निचले हिस्से में दर्द रहता है, तो डॉक्टर से संपर्क करें। ये लक्षण यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन या दूसरी स्वास्थ्य समस्या के संकेत हो सकते हैं।
बुखार, ठंड लगने, पीठ या कमर के एक तरफ दर्द और उल्टी जैसे लक्षणों के साथ यूरिन की परेशानी हो तो जल्द चिकित्सकीय सहायता लें। वहीं, पेशाब बिल्कुल न निकल पाना तत्काल चिकित्सा की जरूरत वाली स्थिति हो सकती है।
Satya Report Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। पेशाब से जुड़ी समस्याओं के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। यूरिन लीकेज, दर्द, जलन या बार-बार संक्रमण होने पर स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य डॉक्टर या यूरोलॉजिस्ट से सलाह लें।



