
सहारनपुर, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में करीब 11 साल पुराने देवबंद थाने के सामूहिक दुष्कर्म मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। पति को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की गुहार लेकर थाने पहुंची महिला के साथ तत्कालीन थाना प्रभारी के सरकारी आवास पर सामूहिक दुष्कर्म करने के मामले में दो पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया गया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय ने दोनों को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
पति को छुड़ाने पहुंची थी महिला, सरकारी आवास में हुई वारदात
यह मामला 6 अगस्त 2015 का है। उस दिन महिला अपने पति को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की गुहार लेकर देवबंद थाने पहुंची थी। आरोप के मुताबिक, तत्कालीन थाना प्रभारी बृजमोहन यादव के सरकारी आवास पर महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। महिला को मुंह खोलने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई थी।
इस मामले में दोषी ठहराए गए बृजमोहन यादव बाद में सीओ के पद से सेवानिवृत्त हो गए। वहीं, तत्कालीन एसएसआई वेदपाल सिंह वर्तमान में इंस्पेक्टर हैं और उनकी तैनाती फिरोजाबाद में बताई गई है।
दोनों दोषियों को जेल और जुर्माने की सजा
फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय के न्यायाधीश प्रबोध कुमार वर्मा ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दोनों दोषियों को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के तहत धमकी देने के मामले में पांच-पांच साल के साधारण कारावास और 20-20 हजार रुपये के जुर्माने का भी आदेश दिया गया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। सामूहिक दुष्कर्म के मामले में लगाए गए एक-एक लाख रुपये के जुर्माने की पूरी रकम पीड़िता को दी जाएगी। धमकी के मामले में लगाए गए जुर्माने की 75 प्रतिशत राशि भी पीड़िता को आर्थिक प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया गया है। जुर्माना जमा नहीं करने पर दोषियों को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
थाने से लेकर अधिकारियों तक लगाई गुहार, फिर हाईकोर्ट पहुंची महिला
पीड़िता के वकीलों राजीव तोमर और जपनीत सिंह छाबड़ा के मुताबिक, घटना के बाद महिला ने स्थानीय थाने से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक शिकायत की, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
30 नवंबर 2015 को तत्कालीन एसएसपी को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजी गई। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर पीड़िता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। करीब दो साल की कानूनी लड़ाई के बाद 7 नवंबर 2017 को हाईकोर्ट के आदेश पर चार आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई।
सीबीसीआईडी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद भी पीड़िता ने हार नहीं मानी। उसने प्रोटेस्ट पिटीशन और परिवाद के जरिए अदालत में अपनी लड़ाई जारी रखी।
500 से ज्यादा तारीखें, परिवार पर हमलों का भी आरोप
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ताओं के अनुसार, इस मुकदमे की सुनवाई करीब 11 साल तीन महीने तक चली। इस दौरान 500 से अधिक तारीखें पड़ीं और आठ गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
वकीलों ने दावा किया कि केस वापस लेने का दबाव बनाने के लिए पीड़ित परिवार पर करीब 10 बार हमले और मारपीट की घटनाएं हुईं। परिवार के सदस्यों के खिलाफ पांच से अधिक मुकदमे भी दर्ज कराए गए। इन तमाम मुश्किलों के बावजूद महिला अपनी गवाही पर कायम रही।
फैसले वाले दिन भी परिवार को सताता रहा डर
पीड़ित पक्ष के मुताबिक, पहले हुई घटनाओं के कारण फैसला सुनाए जाने वाले दिन भी परिवार को सुरक्षा की चिंता थी। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि उन्हें मदद नहीं मिली। परिवार का दावा है कि शुक्रवार सुबह देवबंद कोतवाली के सीयूजी नंबर पर कई बार फोन किया गया, लेकिन बाद में नंबर ब्लॉक कर दिया गया।
इसके बाद परिवार ने रास्ता बदलकर सहारनपुर कचहरी पहुंचने का फैसला किया। अदालत का फैसला आने के बाद दोनों दोषियों को जेल भेज दिया गया।
2015 से 2026 तक ऐसे चली कानूनी लड़ाई
- 6 अगस्त 2015: महिला के साथ देवबंद थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी के सरकारी आवास पर सामूहिक दुष्कर्म की घटना।
- 30 नवंबर 2015: एसएसपी को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजी गई।
- 7 नवंबर 2017: हाईकोर्ट के आदेश पर चार आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई।
- 2017 से 2026: अदालत में लंबी सुनवाई चली, 500 से अधिक तारीखें पड़ीं और आठ गवाहों के बयान दर्ज हुए।
- 6 नवंबर 2026: फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय ने दो दोषियों को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
करीब 11 साल तक चली इस कानूनी लड़ाई के बाद आए फैसले ने पीड़िता को न्याय दिलाने की लंबी प्रक्रिया को एक अहम मुकाम पर पहुंचा दिया।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट, अदालत के फैसले से संबंधित प्रकाशित विवरण और पीड़ित पक्ष के वकीलों के बयानों के आधार पर तैयार की



