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यूपी में प्रतिबंधित गेमिंग ऐप का क्लोन बनाकर सौ करोड़ की ठगी, गैंग का पर्दाफाश; 8 गिरफ्तार

Satya Report: ऑनलाइन गेम लोटस 365, रेड्डी बुक, कार्तिकेय, दुबई ईएक्सएच भारत में प्रतिबंधित हैं। इसके बाद भी दुबई में बैठकर साइबर ठग इन गेमिंग ऐप की क्लोन वेबसाइट बनाकर इसका लिंक टेलीग्राम और रील पर भेज देते थे। पुलिस आयुक्त ने बताया कि ब्रांच 24 नाम की कंपनी का दुबई से संचालन किया जा रहा है।

यूपी में प्रतिबंधित गेमिंग ऐप का क्लोन बनाकर सौ करोड़ की ठगी, गैंग का पर्दाफाश; 8 गिरफ्तार

 प्रतिबंधित गेमिंग ऐप का क्लोन तैयार कर उनका लिंक भेजकर करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के आठ लोगों को बर्रा पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार किया है। हालांकि 14 आरोपी मौके से भाग निकले। गेमिंग ऐप की वेबसाइट का संचालन दुबई से किया जा रहा था। आरोपियों के मोबाइल ऐप पर करीब 50 लाख रुपये की राशि मिली है, जिसे फ्रीज कराया जा रहा है। वहीं खातों में डेढ़ करोड़ से ज्यादा की राशि होने का अनुमान है। यह महज तीन माह में ठगी गई राशि है। कानपुर में पकड़े गए एजेंटों का मुखिया लखनऊ का मोहित है, जो फरार हो गया।

खिलाड़ी कोई भी, बड़ी बाजी ठग की

प्रतिबंधित गेमिंग ऐप के क्लोन बनाकर ठगी करने वाला अंतरराष्ट्रीय गिरोह बड़े ही शातिर है। गिरोह के एजेंटों की ओर से क्लोन ऐप भेजकर लोगों को ऑनलाइन गेम खेलने के लिए उकसाते थे। इसके बाद छोटी-छोटी रकम तो जिता देते थे, सामने वाला लालच में आकर मोटी रकम लगाता तो ये लोग उसे हरा देते थे। ठगी का यह पूरा खेल एक सेट पैटर्न पर चलता है। दुबई में बैठे आका मोबाइल, सिम, एटीएम कार्ड की किट अपने एजेंटों को भेजते हैं। साथ ही उन्हें हर काम के लिए अलग-अलग प्रशिक्षण दिया जाता है। पकड़े जाने पर गुर्गे इन एजेंटों के मोबाइल को दुबई से ही फार्मेट कर देते हैं ताकि कहीं कोई डाटा न मिल सके।

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि यह एक बड़ा नेटवर्क है जो दुबई से चलकर दिल्ली, नोएडा, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश समेत देश के अन्य प्रदेशों में सक्रिय है। यह लोग छह से सात लेयर पर काम करते हैं। कानपुर में इन्होंने अपने नेटवर्क को ‘ब्रांच-24’ नाम दिया है, जिसमें 50 से ज्यादा लड़के बतौर एजेंट काम कर रहे हैं। यह लोग वेबसाइट पर लोगों को रजिस्टर्ड करते हैं। इसके बाद उनका एक खाता जेनरेट कर देते हैं। गेमर को रुपये डालकर खाता रिचार्ज करना होता है। इसके लिए यह लोग बारकोड देते हैं। ऑनलाइन गेम में यदि गेमर जीत गया तो यह ऑनलाइन खाते में पैसा भी भेजते हैं। पकड़े न जाएं इसके लिए यह लोग ओला, उबर टैक्सी का प्रयोग करते हैं और चलती कारों से रुपये ट्रांसफर करते हैं। लोकेशन मूव करती रही है जिससे पकड़ना मुश्किल होता है। पुलिस आयुक्त ने बताया कि यदि पुलिस खाता फ्रीज करा देती है तो नेटवर्क चलाने वाले आका अपने एजेंटों को पूरी किट देते हैं जिसमें मोबाइल (जिसमे गेम अपलोड रहता है), एक्टीवेट सिम, एटीएम कार्ड, चेकबुक भी देते हैं। खाता भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खोला जाता है। पुलिस आयुक्त ने बताया कि ऑनलाइन गेम सीधा और सरल होता है। गेम की मास्टर आईडी नेटवर्क चलाने वाले के पास होती है। वह किसी भी समय गेम का परिणाम बदल सकता है।

इस तरह से फंसाते थे

पुलिस आयुक्त ने बताया कि गिरोह डार्क वेब-टेलीग्राम, रील समेत अन्य माध्यमों से ऑनलाइन गेमिंग बेट से रुपये जीतने का लालच देकर लोगों को फंसाते थे। इस ऑनलाइन गेम के जाल में फंसकर कई लोग आत्महत्या तक कर चुके हैं। आइपीएल के दौरान साइबर ठगी का ये कारोबार कई गुणा बढ़ जाता है। दुबई में बैठा मास्टरमाइंड नए-नए पढ़े लिखे लोगों को पैसों का लालच व लग्जरी जीवन जीने का सपना दिखाकर गिरोह में शामिल करता है। एक-एक खाते में एक माह की कमाई करोड़ों में होती है। .

कानपुर की टीम चलाता है सत्यम

गुजैनी एफ ब्लाक का सत्यम तिवारी कानपुर की टीम संभालता है। पुलिस ने सबसे पहले इसे पकड़ा। इसके साथ ही बर्रा पांच सब्जी मंडी निवासी अनमोल विश्वकर्मा, साकेत नगर डब्ल्यू-1 निवासी नितिन गुप्ता, बर्रा धर्मेंद्र नगर निवासी अभिषेक वर्मा को पकड़ा गया। इनके पास से 25 मोबाइल फोन, तीन काले रंग के बैग, एक लैपटाप, आधार कार्ड, दो डायरी, 54 एटीएम कार्ड, 26 बैंक पासबुक, चेकबुक और दो स्पोर्ट्स बाइक मिली हैं। इन लोगों से पूछताछ के बाद नेहरू नगर निवासी हितेश निगम, कैंट बनिया बाजार निवासी स्नेहिल बजाज, आवास विकास हंसपुरम निवासी सुल्तान अहमद और नौशाद को बर्रा विश्वबैंक में अध्ययन लाइब्रेरी के पास से गिरफ्तार किया गया। सभी को जेल भेज दिया गया।

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