Satya Report: राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में एटीएस की बड़ी कार्रवाई के बाद फर्जी आधार रैकेट को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं. भादरा क्षेत्र में नगरपालिका के पास संचालित अवैध आधार सेंटर पर छापेमारी में पकड़े गए मुख्य आरोपी कुलदीप शर्मा से पूछताछ में कई अहम सुराग मिले हैं, जिससे यह मामला अब केवल फर्जी दस्तावेज बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके तार साइबर अपराध और संभावित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं.

राजस्थान एटीएस और हनुमानगढ़ जिला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में सामने आया है कि आरोपी कुलदीप शर्मा ऑपरेटर आईडी का दुरुपयोग कर लंबे समय से फर्जी आधार कार्ड बना रहा था.
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि जिस सेंटर की लोकेशन गुजरात में दर्ज होनी चाहिए थी, उसे अवैध रूप से हनुमानगढ़ में संचालित किया जा रहा था. इस पूरे मामले में जसवंत और आमिर खान की भूमिका भी जांच के दायरे में है, यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी आईडी चोरी कर इस्तेमाल की गई या उनकी सहमति से यह खेल चल रहा था.
बायोमेट्रिक को धोखा देने के लिए हाईटेक तरीका
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने बायोमेट्रिक सिस्टम को धोखा देने के लिए हाईटेक तरीके अपनाए थे. मौके से लाल और सफेद रबर पर बने डमी फिंगरप्रिंट बरामद किए गए, जिनसे लॉग-इन किया जाता था.
इसके अलावा कागज पर प्रिंट की गई आंखों की रेटिना की तस्वीरों को आईरिस डिवाइस के सामने रखकर पहचान सत्यापन प्रक्रिया को फर्जी तरीके से पूरा किया जा रहा था. एनरोलमेंट रसीदों पर जसवंत और आमिर के फर्जी हस्ताक्षर भी खुद आरोपी द्वारा किए जा रहे थे.
एटीएस जांच में क्या मिला?
एटीएस जांच में सामने आया है कि इन फर्जी आधार कार्ड का उपयोग सिम कार्ड जारी करवाने, बैंक खाते खुलवाने और साइबर ठगी में किया जा रहा था. सूत्रों के मुताबिक, कुछ मामलों में इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाकर अपराधियों के विदेश भागने की भी आशंका जताई जा रही है. इसके अलावा फर्जी मोबाइल नंबरों के जरिए राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल की संभावना को लेकर एजेंसियां सतर्क हो गई हैं.
एटीएस जांच में खुलासा हुआ है कि हनुमानगढ़ के भादरा से संचालित गिरोह पिछले एक साल से देश के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले आधार डेटाबेस में सेंध लगा रहा था. यह नेटवर्क जयपुर से संचालित एक गिरोह से भी जुड़ा मिला है. तार दिल्ली से लेकर श्रीनगर तक फैले हैं. दिल्ली के संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के पतों पर दबिश दी गई, लेकिन कोई नहीं मिला.
एटीएस को 150 फर्जी रबर थंब (सिलिकॉन क्लोन), 12 लैपटॉप और 500 से ज्यादा सिम कार्ड मिले हैं. जांच में सामने आया कि गिरोह ऑपरेटरों की मिलीभगत से बटर पेपर और सिलिकॉन की मदद से फिंगरप्रिंट क्लोन बनाता था.
क्लोन अंगूठों से पोर्टल लॉग-इन
रात के समय इन क्लोन अंगूठों से पोर्टल लॉग-इन कर फर्जी डेटा फीड किया जाता था. जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आधार पर नाम और पता राजस्थान के गांवों का होता था, जबकि फोटो और बायोमेट्रिक कश्मीरी संदिग्धों से जुड़े पाए गए. जांच एजेंसियों का फोकस आतंकी नेटवर्क और टेरर फंडिंग पर भी है.
एजेंसियां हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, जयपुर, दिल्ली और बीकानेर में एक साथ जांच कर रही हैं. एक आधार पर दर्जनों प्री-एक्टिवेटेड सिम लेकर कश्मीर में बैठे हैंडलर्स से संपर्क के लिए इस्तेमाल किया गया. दस्तावेजों से बैंक खाते खोलकर खाड़ी देशों से आने वाले संदिग्ध पैसे ट्रांसफर किए गए. टेरर फंडिंग का एंगल भी सामने आया है, जिसकी पुष्टि जांच के बाद होगी. .
अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में
मामले में DOIT आधार कार्यालय से जुड़े कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत के संभव था या नहीं. पुलिस और एटीएस अब इस रैकेट के संभावित अंतरराज्यीय कनेक्शन की जांच कर रही है.
आरोपी के मोबाइल और लैपटॉप को जब्त कर फोरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे पिछले एक साल के दौरान बनाए गए फर्जी आधार कार्ड और उनसे जुड़े लोगों की पहचान की जा सके. फिलहाल एटीएस इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए अन्य संदिग्धों की तलाश में जुटी है.



