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मोदी के लिए जिद पर अड़े थे बाइडेन, अमेरिका नहीं, भारत था QUAD की अहम ताकत, पूर्व उप विदेश मंत्री का खुलासा

Satya Report:

भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका का समूह क्वाड फिर चर्चा में है। अमेरिका के उप विदेश सचिव कर्ट एम कैंपबेल ने कहा है कि क्वाड की अहम ताकत भारत है। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन ने पीएम मोदी को एक घंटे से ज्यादा समय तक मनाया था। कैंपबेल ने खुलासा किया, क्वाड में पर्दे के पीछे से अगुवाई करने वाला देश अमेरिका नहीं था। वह ऑस्ट्रेलिया भी नहीं था। वह जापान भी नहीं था। वह भारत था। पूर्व राष्ट्रपति बाइडन को पीएम मोदी को राष्ट्राध्यक्ष स्तर पर इस समूह में शामिल होने के लिए एक घंटे तक मनाया। पीएम मोदी हिचकिचा रहे थे। बाइडन के मनाने पर पीएम मोदी ने कहा कि ठीक है, लेकिन आप इस बारे में बारबार समझाना बंद करें। बतौर मेजबान भारत को बीते साल ही क्वाड समिट की मेजबानी करनी थी। इस साल भी बैठक पर अभी संशय है।

मोदी के लिए जिद पर अड़े थे बाइडेन, अमेरिका नहीं, भारत था QUAD की अहम ताकत, पूर्व उप विदेश मंत्री का खुलासा
मोदी के लिए जिद पर अड़े थे बाइडेन, अमेरिका नहीं, भारत था QUAD की अहम ताकत, पूर्व उप विदेश मंत्री का खुलासा

अमेरिका ने चीन के खिलाफ भारत को गुप्त समर्थन दिया

इस खुलासे से एक और अहम बात सामने आई है: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान जब भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव बढ़ गया था—अमेरिका ने भारत को बेहद संवेदनशील खुफिया जानकारी मुहैया कराई थी। अमेरिका द्वारा दी गई यह रणनीतिक मदद, जिसका मकसद भारत को चीन की गतिविधियों पर करीब से नज़र रखने में सक्षम बनाना था, दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे का प्रतीक मानी जाती है। भारत की इसी सक्रिय भागीदारी की बदौलत आज ‘क्वाड’ एशियाप्रशांत क्षेत्र में सबसे बड़ी ताकत के तौर पर उभरा है।

आपसी सम्मान और बदलती राजनीति की आवश्यकता

कैंपबेल ने भारतअमेरिका संबंधों की मौजूदा स्थिति को लेकर कुछ चिंताजनक विचार भी व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दो प्रमुख लोकतंत्रों के बीच संबंध “आपसी सम्मान” के सिद्धांत पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने अफ़सोस जताते हुए कहा कि कभीकभी हमें इस बुनियादी सिद्धांत की याद दिलाने की ज़रूरत पड़ती है। मौजूदा माहौल में—जब ऐसा लग रहा है कि ट्रंप ‘क्वाड’ से कुछ दूरी बना रहे हैं। इस समूह के भीतर भारत का महत्व और भी ज़्यादा ज़ोरदार ढंग से उभरकर सामने आ रहा है। कैंपबेल की टिप्पणियों से यह साफ़ हो गया कि भारत के बिना, यह समूह महज़ नाम का ही समूह बनकर रह जाता।

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