Satya Report: बाजार के रेगुलेटर सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को ब्रोकर्स द्वारा क्लाइंट्स की बिना पूरी तरह भुगतान की गई सिक्योरिटीज़ को संभालने के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है. इसका मकसद सिस्टम को आसान बनाना और कामकाज में आने वाली दिक्कतों को कम करना है. ये बदलाव CUSPA फ्रेमवर्क से जुड़े हैं, जो उन सिक्योरिटीज़ के इस्तेमाल को तय करता है जिन्हें क्लाइंट ने खरीदा है लेकिन पूरा पैसा अभी नहीं दिया है.

भुगतान की समयसीमा पर नया प्रस्ताव
अभी के नियमों के मुताबिक क्लाइंट्स को पेमेंट करने के लिए 5 ट्रेडिंग दिनों का समय मिलता है. लेकिन अब SEBI ने सुझाव दिया है कि ब्रोकर्स अपनी पॉलिसी के हिसाब से इससे कम समय भी तय कर सकते हैं.
गिरवी हटाने के नियम साफ
SEBI ने यह भी तय किया है कि अगर क्लाइंट शाम 5 बजे से पहले अपना बकाया चुका देता है, तो उसी दिन उसकी सिक्योरिटीज़ पर लगा प्लेज हटा दिया जाएगा. अगर 5 बजे के बाद भुगतान होता है, तो अगले ट्रेडिंग दिन तक प्लेज हटाना जरूरी होगा. इससे निवेशकों को अपने शेयर जल्दी मिल सकेंगे और देरी कम होगी.
रोजाना समीक्षा और आंशिक राहत
अब रोजाना गिरवी रखी गई सिक्योरिटीज़ की समीक्षा होगी. अगर ज्यादा कोलैटरल रखा गया है या क्लाइंट ने आंशिक भुगतान कर दिया है, तो उतना हिस्सा रिलीज़ किया जा सकेगा.
खास हालात में समय बढ़ाने की सुविधा
कुछ असाधारण परिस्थितियों जैसे लोअर सर्किट लगना, ट्रेडिंग सस्पेंड होना या अन्य कारण की वजह से अगर 5 ट्रेडिंग दिनों में सिक्योरिटीज़ बेचना संभव नहीं होता, तो ब्रोकर्स डिपॉजिटरी से एक हफ्ते तक का अतिरिक्त समय मांग सकते हैं. अगर ऐसी स्थिति जारी रहती है, तो आगे भी इसी तरह का एक्सटेंशन मिल सकता है. लेकिन जैसे ही हालात सामान्य हो जाते हैं और सिक्योरिटीज़ बेची जा सकती हैं, फिर कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा.
समय पर एक्सटेंशन नहीं मांगा तो ऑटो रिलीज
SEBI ने साफ किया है कि अगर तय समय के अंदर एक्सटेंशन नहीं मांगा गया, तो सिस्टम अपने आप उन सिक्योरिटीज़ का प्लेज हटा देगा.



