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चीनी हथियार वाले जहाज पर अमेरिका का कब्जा, मचा बवाल !

Satya Report:

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अब एक और नया मोड़ सामने आया। अमेरिका द्वारा जब्त किए गए एक ईरानी मालवाहक जहाज को लेकर अब चीन ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है। सवाल यह है कि क्या वाकई चीन इस पूरे मामले में शामिल है या फिर यह सिर्फ एक भू राजनीतिक आरोपप्रत्यारोप का खेल है। दरअसल, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना ने एक मालवाहक जहाज को अपने कब्जे में ले लिया। अमेरिका का दावा है कि इस जहाज पर मिसाइल निर्माण से जुड़ी खतरनाक रासायनिक सामग्री लदी हुई थी और यह जहाज ईरान जा रहा था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक जब जहाज को रोकने के लिए कहा गया तो उसने आदेश मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद अमेरिकी नौसैनिक जहाज ने फायरिंग की और फिर मरीन कमांडो ने उस जहाज को कब्जे में ले लिया। अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा बयान आया है अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली की तरफ से। 

चीनी हथियार वाले जहाज पर अमेरिका का कब्जा, मचा बवाल !
चीनी हथियार वाले जहाज पर अमेरिका का कब्जा, मचा बवाल !
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि यह जहाज चीन से ईरान जा रहा था और इसमें मिसाइल वाली सामग्री थी। यह साफ सबूत है कि चीन ईरान की मदद कर रहा है। हेली का कहना है कि चीन लगातार ईरान के शासन को मजबूत करने में लगा हुआ है जो वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है। अब इन आरोपों के बाद चीन ने आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गो जियाकुन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि हमारी जानकारी के अनुसार यह एक विदेशी ध्वज वाला मालवाहक जहाज है। चीन का इससे कोई संबंध नहीं है। चीन ऐसे किसी भी निराधार आरोप का कड़ा विरोध करता है। यानी साफ है चीन इस मामले में खुद को पूरी तरह अलग बता रहा है। अब बात करें ईरान की तो उसने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। 

ईरानी सेना ने अमेरिका की इस कारवाई को समुद्री डकैती करार दिया। ईरान ने चेतावनी दी कि अमेरिका की इस कारवाई का जवाब दिया जाएगा। इतना ही नहीं सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी सेना का कहना है कि अमेरिका ने ना केवल जहाज पर हमला किया बल्कि उसके नेविगेशन सिस्टम को भी नष्ट कर दिया। ईरान का साफ कहना है कि अमेरिका ने इस कारवाही के जरिए सीज फायर का उल्लंघन किया। ओमान सागर के जल क्षेत्र में हुई इस घटना को लेकर ईरान ने अंतरराष्ट्रीय नियमों की बात उठाई। इस पूरे विवाद के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चीन को लेकर सख्त अपनाया। अगर चीन ईरान को हथियार या सैन्य सहायता देता है तो उस पर भारी टेरिफ यानी कि शुल्क लगाया जाएगा। इससे साफ है कि मामला सिर्फ एक जहाज का नहीं बल्कि अमेरिका, चीन, ईरान के बीच बढ़ती राजनीतिक टकराव का हिस्सा है।

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