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भारतीय हॉकी को लगा बड़ा झटका, ओलंपियन गुरबख्श सिंह ग्रेवाल का 84 वर्ष की उम्र में निधन

Satya Report: Gurbaksh Singh Grewal Death News: पूर्व भारतीय ओलंपियन गुरबख्श सिंह ग्रेवाल के निधन पर पूरे हॉकी जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। 84 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। हॉकी इंडिया ने शनिवार को उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि खेल के प्रति उनका समर्पण और योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

भारतीय हॉकी को लगा बड़ा झटका, ओलंपियन गुरबख्श सिंह ग्रेवाल का 84 वर्ष की उम्र में निधन
भारतीय हॉकी को लगा बड़ा झटका, ओलंपियन गुरबख्श सिंह ग्रेवाल का 84 वर्ष की उम्र में निधन

ओलंपिक पदक विजेता रहे गुरबख्श सिंह

गुरबख्श सिंह ग्रेवाल 1968 मैक्सिको सिटी ओलंपिक में भारत को ब्रॉन्ज मेडल दिलाने वाली टीम का अहम हिस्सा थे। वह अपने समय के तेजतर्रार फॉरवर्ड खिलाड़ी थे, जिन्होंने मैदान पर शानदार प्रदर्शन से टीम को मजबूती दी। उनकी उपलब्धियां भारतीय हॉकी इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं।

हॉकी इंडिया ने जताया शोक

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, “भारतीय हॉकी जगत गुरबख्श सिंह ग्रेवाल जी के निधन से गहरे सदमे में है। वह ओलंपिक पदक विजेता टीम के सम्मानित सदस्य और खेल के सच्चे सेवक थे। हॉकी के प्रति उनका जुनून और नई पीढ़ी को संवारने का उनका प्रयास हमेशा याद रखा जाएगा।”

वहीं महासचिव भोला नाथ सिंह ने कहा, “आज हमने भारतीय हॉकी परिवार के एक सम्मानित सदस्य को खो दिया है। एक खिलाड़ी और प्रशासक के रूप में उनका योगदान अमिट है और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”

भाई के साथ रचा था इतिहास

गुरबख्श सिंह ग्रेवाल अपने भाई बलबीर सिंह ग्रेवाल के साथ 1968 ओलंपिक में का हिस्सा थे। यह भारतीय हॉकी इतिहास का पहला मौका था जब दो सगे भाइयों ने एक साथ ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया। यह उपलब्धि आज भी खास मानी जाती है।

करियर

1 अप्रैल 1942 को पंजाब प्रांत के लायलपुर में जन्मे गुरबख्श सिंह ग्रेवाल ने करीब 20 साल की उम्र में मुंबई आकर अपने करियर को नई दिशा दी। उन्होंने वेस्टर्न रेलवे का प्रतिनिधित्व किया और शानदार खेल दिखाया। मैदान के अंदर ही नहीं, बल्कि बाहर भी उन्होंने खेल के विकास में अहम भूमिका निभाई।

वेस्टर्न रेलवे में ऑफिसर के पद से रिटायर होने के बाद भी गुरबख्श सिंह ग्रेवाल खेल से जुड़े रहे। उन्होंने मुंबई की कई टीमों को कोचिंग दी और युवा खिलाड़ियों को तराशने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा उन्होंने मुंबई हॉकी एसोसिएशन के मानद सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं, जिससे भारतीय हॉकी को आगे बढ़ाने में मदद मिली।

IANS इनपुट के साथ

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