Satya Report: प्यार, प्रताड़ना और फिर इंसाफ की एक ऐसी कहानी ग्वालियर हाईकोर्ट पहुंची, जिसने कानून और मानवीय संवेदनाओं के बीच एक नया सेतु बना दिया. 8 साल की शादी और 3 बच्चों की जिम्मेदारी के बाद जब एक मां ने अपने प्रेमी के साथ नई जिंदगी शुरू करने की जिद की, तो अदालत ने न केवल उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान किया, बल्कि बच्चों की कस्टडी भी उसी को सौंप दी. यह मामला उस वक्त और भी अनोखा हो गया जब पति ने भी बिना किसी विवाद के तलाक की सहमति दे दी और दोनों परिवारों ने महिला के फैसले को स्वीकार कर लिया.

दरअसल, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ में ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण’ याचिका की सुनवाई के दौरान यह भावुक और चौंकाने वाला मामला सामने आया. एक पति ने अपनी पत्नी को वापस पाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट रूम में पत्नी के बयानों ने मामले की दिशा ही बदल दी.
प्रताड़ना की कहानी और प्रेमी का साथ
कोर्ट में पेश हुई महिला ने अपने पति के साथ जाने से साफ इनकार कर दिया. उसने पिछले 8 वर्षों के वैवाहिक जीवन को प्रताड़ना से भरा बताया और यहाँ तक कहा कि वह आत्महत्या करने की दहलीज पर थी. महिला ने स्वीकार किया कि इस कठिन समय में एक अन्य युवक ने उसका साथ दिया और अब वह उसी के साथ अपना भविष्य बिताना चाहती है.
प्रेमी की मां ने मान लिया बहू
इस मामले का सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि महिला के मातापिता ने उसकी पसंद को स्वीकार किया. इतना ही नहीं, जिस युवक के साथ वह रहना चाहती है, उसकी मां ने भी महिला को अपनी बहू के रूप में स्वीकार कर लिया है.



