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बैंकों में धड़ाधड़ खुल रही हैं नई ब्रांचें, फिर भी कम हो रहे हैं कर्मचारी, क्या AI खा रहा है नौकरियां?

Satya Report: भारत के बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा बदलाव बहुत ही खामोशी से आकार ले रहा है. देश के दिग्गज प्राइवेट बैंक लगातार अपनी नई शाखाएं खोल रहे हैं, अपना विस्तार कर रहे हैं, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि वे अब पहले से कम कर्मचारियों के साथ काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल ने बैंकों के काम करने के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है. इसका सीधा असर नौकरियों पर दिखने लगा है, जहां नई भर्तियों की जगह ‘एम्प्लॉई ऑप्टिमाइजेशन’ यानी कर्मचारियों की संख्या को सुव्यवस्थित करने ने ले ली है.

बैंकों में धड़ाधड़ खुल रही हैं नई ब्रांचें, फिर भी कम हो रहे हैं कर्मचारी, क्या AI खा रहा है नौकरियां?
बैंकों में धड़ाधड़ खुल रही हैं नई ब्रांचें, फिर भी कम हो रहे हैं कर्मचारी, क्या AI खा रहा है नौकरियां?

नई शाखाओं की भरमार, लेकिन घट रहा स्टाफ

आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बिल्कुल साफ हो जाती है. देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक, एचडीएफसी बैंक के पास वित्त वर्ष 2026 के अंत में 2.11 लाख कर्मचारी थे, जो ठीक एक साल पहले 2.14 लाख थे. अकेले मार्च तिमाही में ही बैंक के कर्मचारियों की संख्या में 4,000 की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. वहीं, एक्सिस बैंक का वर्कफोर्स भी 1.04 लाख से घटकर 1.01 लाख रह गया है.

ऐसा नहीं है कि बैंकों ने अपना दायरा सिकोड़ लिया है. इसके उलट, एक्सिस बैंक ने इसी दौरान लगभग 400 नई शाखाएं खोली हैं. एचडीएफसी ने भी अपनी 234 नई शाखाएं शुरू की हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि बैंक अब कम लोगों के साथ एक बहुत बड़ी व्यवस्था चलाने में सक्षम हो गए हैं.

क्या छोटे बैंकों में भी है यही ट्रेंड?

यह बदलाव सिर्फ सबसे बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं है. यूएई स्थित एमिरेट्स एनबीडी के संभावित अधिग्रहण का लक्ष्य बने आरबीएल बैंक में भी पिछले दस सालों में पहली बार कर्मचारियों की संख्या घटी है. यह आंकड़ा 14,265 से कम होकर 13,316 हो गया है.

दूसरी तरफ, देश के दूसरे सबसे बड़े प्राइवेट बैंक आईसीआईसीआई में यह रणनीति और भी स्पष्ट नजर आती है. बैंक ने वित्त वर्ष 2025 में अपने वर्कफोर्स में करीब 6,000 की कमी की थी. उन्होंने यह भी साफ कर दिया था कि वे वित्त वर्ष 2026 में नई भर्तियां नहीं करेंगे, भले ही इस दौरान उन्होंने 600 नई शाखाएं क्यों न जोड़ी हों. इस पूरी लहर में सिर्फ यस बैंक एक अपवाद रहा, जहां कर्मचारियों की संख्या में मामूली बढ़त देखी गई.

टेक्नोलॉजी में अरबों डॉलर का निवेश

आखिर ये बैंक कम कर्मचारियों के साथ अपना काम कैसे मैनेज कर पा रहे हैं? इसका जवाब है, तकनीक में भारी निवेश. बैंकों ने अपनी कई प्रक्रियाओं को डिजिटल और ऑटोमेट कर दिया है, जिससे मैन्युअल काम करने वाले कई पदों की जरूरत ही खत्म हो गई है.

एचडीएफसी बैंक ने स्पष्ट किया है कि उसने अपने टेक्नोलॉजी निवेश को चार गुना बढ़ाकर लगभग एक अरब डॉलर कर दिया है. उनका मुख्य फोकस ग्राहकों को बिना किसी रुकावट के बेहतरीन डिजिटल अनुभव देने पर है. एक्सिस बैंक के कार्यकारी निदेशक सुब्रत मोहंती ने भी बताया कि बैंक अपने कुल संचालन खर्च का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा तकनीक पर लगा रहा है. इस निवेश से काम में तेजी आई है और उत्पादकता बढ़ी है.

अभी AI का असली असर बाकी है

नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह एक बड़ा और गंभीर संकेत है. बैंकिंग क्षेत्र में काम करने का पारंपरिक तरीका अब इतिहास बनता जा रहा है. एक्सिस बैंक ने साफ किया है कि वर्तमान में जो नौकरियां घटी हैं, उनमें अभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पूरा प्रभाव तो शामिल ही नहीं है.

बैंक खुद मान रहे हैं कि जब एआई का पूरी तरह से इस्तेमाल शुरू हो जाएगा, तो इसका कर्मचारियों की संख्या पर कहीं अधिक गहरा असर पड़ेगा. यानी आने वाले समय में बैंकिंग सेक्टर में सिर्फ उन्हीं पेशेवरों की जरूरत होगी जो इस नई डिजिटल क्रांति और एआई तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें.

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