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70s के वो खलनायक जिनका किरदार इतना असरदार कि असल जिंदगी में भी मिलने लगी नफरत, खौफ खाने लगे थे लोग

Satya Report: बॉलीवुड का 1970 का दशक सिर्फ रोमांस, एक्शन और सामाजिक फिल्मों का दौर नहीं था, बल्कि ये वो समय भी था जब खलनायकों ने पर्दे पर अपनी ऐसी पहचान बनाई कि वे सिर्फ विलेन नहीं रहे, बल्कि डर का चेहरा बन गए।

70s के वो खलनायक जिनका किरदार इतना असरदार कि असल जिंदगी में भी मिलने लगी नफरत, खौफ खाने लगे थे लोग
70s के वो खलनायक जिनका किरदार इतना असरदार कि असल जिंदगी में भी मिलने लगी नफरत, खौफ खाने लगे थे लोग

उस दौर में एक्टिंग इतनी रियलिस्टिक होती थी कि दर्शक ये भूल जाते थे कलाकार ने सिर्फ किरदार निभाया है, मगर रियल लाइफ में वो भी एक आम इंसान ही है।
तमाम एक्टर्स ने अपनी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से ऐसा असर छोड़ा कि कई बार लोग उन्हें असल जिंदगी में देखकर भी डर या गुस्से से प्रतिक्रिया देने लगते थे।

आज हम ऐसे ही कलाकारों के बारे में बताने वाले हैं, जो पर्दे पर अपने किरदार के कारण रियल लाइफ में भी लोगों को विलेन लगने लगे थे। इनमें गब्बर सिंह, प्राण का नाम भी शामिल है।

गब्बर सिंह: डर का दूसरा नाम

ने 1975 की फिल्म ‘शोले’ में गब्बर सिंह का किरदार निभाकर भारतीय सिनेमा में विलेन की परिभाषा ही बदल दी। ‘कितने आदमी थे?’ और ‘जो डर गया, समझो मर गया’ जैसे डायलॉग सिर्फ डायलॉग नहीं रहे, बल्कि लोगों की यादों में बस गए डर का हिस्सा बन गए।

कहा जाता है कि उस दौर में बच्चे गब्बर के नाम से डरने लगे थे। लोग गांवों में लोग उनके पोस्टर देखकर रास्ता बदल लेते थे। कई लोग अमजद खान को असल जिंदगी में गब्बर समझ लेते थे। खुद अमजद खान ने इंटरव्यू में बताया था कि लोग उनसे दूरी बनाकर रखते थे, क्योंकि उनकी छवि एक खतरनाक डाकू की बन चुकी थी।

प्रेम चोपड़ा: मुस्कान में छुपा खलनायक

प्रेम चोपड़ा भी 70 के उन चुनिंदा एक्टर्स में से थे जिन्होंने स्माइलिंग विलेन की इमेज बनाई। उनका मशहूर डायलॉग ‘प्रेम नाम है मेरा… प्रेम चोपड़ा’ आज भी सिनेमा इतिहास में एक आइकॉनिक माना जाता है।

उनकी खासियत थी कि वो नरम आवाज में खतरनाक कलाकार थे। शालीन चेहरे के पीछे चालाक खलनायकी, रोमांस और धोखे वाली इमेज ने उनको रियल लाइफ विलेन बना दिया था। लोग अक्सर उन्हें असल जिंदगी में भी संदिग्ध नजरों से देखते थे, क्योंकि उनका ऑनस्क्रीन किरदार इतना चालाक और विश्वासघाती था कि दर्शक उन्हें रियल लाइफ से जोड़ बैठते थे।

प्राण: खामोशी में छुपा सबसे बड़ा डर

प्राण हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित और गंभीर खलनायकों में गिने जाते हैं। 70 के दशक में उनका अंदाज बेहद अलग था। ना ज्यादा बोलना, ना ज्यादा चिल्लाना, बस आंखों और एक्सप्रेशन से डर पैदा करना।

उनकी खास बात उनकी तीखी नजर, शांत लेकिन दमदार प्रेसेंज थी। एक समय ऐसा भी था जब लोग उन्हें फिल्मों में देखकर असहज हो जाते थे और असल जिंदगी में उनसे दूरी बनाए रखते थे।

रंजीत: स्क्रीन पर खलनायक, समाज की नजर में खतरा

रंजीत ने 70 के दशक में कई ऐसे किरदार निभाए जो अक्सर महिलाओं के खिलाफ अपराध या नकारात्मक सोच को दिखाते थे। उनकी इमेज इतनी मजबूत हो गई थी कि लोग उन्हें सड़क पर देखकर नाराजगी जताते थे।

कई बार असल जिंदगी में ताने और गुस्सा झेलना पड़ता था, क्योंकि दर्शक उन्हें किरदार नहीं, असल में गुंडा मानने लगे थे। रंजीत ने बाद में कई इंटरव्यू में बताया कि इस छवि की वजह से उन्हें व्यक्तिगत जीवन में भी काफी असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।

अमरीश पुरी: गूंजती आवाज और भारी व्यक्तित्व

का शुरुआती दौर 70 के दशक के अंत में उभरने लगा था, लेकिन उनकी खलनायकी का असर धीरेधीरे इतना गहरा हुआ कि वे भारतीय सिनेमा के सबसे डरावने चेहरों में से एक बन गए।

उनकी खास पहचान थी उनकी गहरी, गूंजती आवाज और दमदार चेहरा। उनकी उपस्थिति ही सीन में तनाव पैदा कर देती थी, और दर्शक उन्हें देखकर सहज नहीं रह पाते थे।

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